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आदिवासियों का ‘नंगा नाच’ दिखाने पर दिल्ली के दो खबरिया चैनलों को नोटिस

By   /  January 12, 2012  /  No Comments

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अंडमान के आदिवासियों के शोषण का मामला गरमाता जा रहा है। अंडमान द्वीप के आदिवासियों का सनसनीखेज वीडियो सामने आने पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अंडमान प्रशासन से इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय ने स्थानीय प्रशासन को रिपोर्ट देने के लिए 24 घंटे की मोहलत दी है।

उधर अंडमान-निकोबार प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाने की बात कहने की बजाय उन टीवी चैनलों को नोटिस देने का फैसला किया है, जिन्होंने आदिवासी महिलाओं को डांस करते हुए दिखाया। अंडमान-निकोबार प्रशासन ने मंगलवार को कहा कि जरवा समुदाय की आदिवासी महिलाओं को डांस करते हुए दिखाने पर दिल्ली के दो समाचार चैनलों को कानूनी नोटिस दिया जाएगा। अंडमान-निकोबार प्रशासन के मुताबिक चैनलों को यह नोटिस इसलिए दिया जाएगा क्योंकि उनकी तरफ से दिखाए गए वीडियो एकतरफा थे और उन्हें दिखाने से पहले प्रशासन का पक्ष नहीं लिया गया था।

मंत्रालय को भेजी आरंभिक रिपोर्ट में अंडमान निकोबार प्रशासन ने कहा कि आज भी जंगलों में रहने वाले जारवा आदिवासी वस्त्र नहीं पहनते हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि यह बात स्वाभाविक है कि उस वीडियोग्राफर ने कानून तोड़ा है, जिसने आदिवासियों को नृत्य के लिए उकसाया।

इस बीच, गृह मंत्री पी चिदंबरम 21 और 22 जनवरी को द्वीप के दौरे पर जा रहे हैं और इस दौरान वह वहां के अधिकारियों को संभवत: निर्देश देंगे कि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय सुनिश्चित किए जाएं। आदिवासी मामलों के मंत्री वी किशोर चंद्र देव ने कहा कि इस प्रकरण के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हम वीडियो क्लिप हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। गृह मंत्रालय इसे तकनीकी जांच के लिए भेजेगा ताकि पता लग सके कि यह वीडियो कितना पुराना है।

विकास कार्यों की समीक्षा के लिए अंडमान निकोबार जा रहे चिदंबरम की स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान जारवा आदिवासी महिलाओं के कथित उत्पीड़न का मुद्दा उठने की संभावना है और गृह मंत्री इस तरह की घटनाओं की भविष्य में पुनरावृत्ति रोकने के उपाय सुनिश्चित करने का निर्देश दे सकते हैं।

हालांकि अंडमान के डीजीपी एस बी सिंह देओल ने वीडियो को ‘आधारहीन’ और ‘अविश्वसनीय’ बताया है। उन्‍होंने कहा कि वीडियो को शूट किए जाने की तारीख भी नहीं सामने आ रही है और संभव है कि इसे 2002 में शूट किया गया हो। लेकिन वीडियो जारी करने वाले ब्रिटिश पत्रकार ने दावा किया है कि यह वीडियो पुराना नहीं बल्कि नया है।

अंडमान-निकोबार पुलिस का कहना है कि वीडियो शूट करने वाले के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। अंडमान-निकोबार प्रशासन ने मीडिया को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि वीडियो में जिस व्यक्ति ने जरवा महिलाओं को डांस करने के लिए कहा है, वह पुलिस वाला नहीं है। उस व्यक्ति को पुलिस वाला बता रही रिपोर्ट गलत हैं। केंद्र शासित राज्य की पुलिस की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, ‘यह साफ हो चुका है कि जिस समय यह वीडियो रिकॉर्ड किया गया उस समय जरवा समुदाय के लोग कपड़े नहीं पहनते थे। यहां तक आज भी जंगलों में रहने वाले जरवा बिना कपड़ों के हैं। वीडियो को शूट करने वाला वीडियोग्राफर और महिलाओं को डांस के लिए उकसाने वाले ने कानून तोड़ा है।’

यह विवाद ब्रिटिश मीडिया में एक वीडियो जारी होने के बाद सामने आया है। वीडियो में दिखाया गया है कि किस तरह अंडमान के आदिवासियों की मजबूरी का फायदा उठाया जाता है। वीडियो में यहां मौज-मस्‍ती के लिए आने वाले विदेशी सैलानियों के सामने गरीब आदिवासियों को नाचते हुए दिखाया गया है। जरावा समुदाय के ये आदिवासी आमतौर पर नंगे या कम कपड़े पहने होते हैं। ‘द ऑब्जर्वर’ के पत्रकार गेथिन चैम्बरलेन ने दावा किया है कि स्‍थानीय पुलिसकर्मियों ने जरावा समुदाय के आदिवासियों को खाने के लिए कुछ बिस्किट और चंद सिक्‍कों का लालच देकर सैलानियों के सामने नाचने को कहा। ब्रिटिश पत्रकार का यहां तक कहना है कि जरावा आदिवासियों तक पहुंचने के लिए स्थानीय पुलिसवालों को 15 हजार रुपये की रिश्वत देनी पड़ी थी।

गौरतलब है कि जरावा आदिवासी भारत में अंडमान द्वीप पर ही पाए जाते हैं। अब इनकी तादाद कुछ सौ तक सिमट कर रह गई है। सुप्रीम कोर्ट ने जरावा आदिवासियों के संरक्षण को लेकर पहले ही कई कदम उठाने के आदेश दे रखे हैं। जरावा आदिवासियों के संरक्षण के लिए अदालत का साफ निर्देश है कि उनके रिहायशी इलाके तक जाने वाली सड़क पर आम लोगों को न जाने दिया जाए। लेकिन स्थानीय पुलिसकर्मी सैलानियों से कुछ पैसे लेकर उन्हें आदिवासियों के इलाके तक जाने की छूट दे देते हैं। (भास्कर)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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