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तिरुपति बालाजी के दरबार में रिश्वतखोरों का मेला, भगवान का भी डर नहीं

By   /  January 21, 2012  /  1 Comment

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नागमणि पाण्डेय।।

आंध्र प्रदेश मे स्थित तिरुपति बालाजी के दर्शन करने के लिए प्रति दिन पचास हजार से भी अधिक श्रद्धालू दर्शन के लिए उनकी नगरी मे आते हैं। तिरुपति मंदिर देश के सभी मंदिरो मे सबसे धनवान मना जाता है। इस मंदिर मे दर्शन करने आने वाले भक्तों के कारण ही यहां के लगभग 2 हजार से भी अधिक लोगों का  परिवार चलता है। इस के साथ ही  यहा प्रतिदिन आने वाले श्र्धलुओ के सुरक्षा के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया है।

मात्र यहा व्यवसाय करने वाले छोटे छोटे दुकानदारो से यहा तैनात कुछा सुरक्षाकर्मियों द्वारा  व्यवसाय करने के लिये प्रतिदिन रिश्वत ली जा रही  है, वह भी मंदिर परिसर में खुलेआम। इन्हे किसी भी तरह का डर नहीं है।  अधिकारियों से तो दूर की बात है, भगवान से भी कोई भय नहीं। मंदिर परिसर मे ही रिश्वत लेकर घोर पाप किया जा रहा है।

हम मुंबई से ट्रेन से सफर कर सोमवार को आंध्र प्रदेश स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर पहुंचे। वहा एक दिन आराम कर दूसरे  दिन अर्थात 18 जनवरी को तिरुपति का दर्शन करने गए। 19 जनवरी को हमने वहां के पाप नाशम , गंगा सागर सहित और कुछा दर्शनीय स्थलों पर जाने के लिये एक जीप रिजर्व किया। जीप मे बैठने के  बाद जब हम कुछा  दूर पहुंचने के बाद जब हम  जंगल मे प्रवेश करने वाले थे उस से पहले सबसे पहले जीप के चालक ने पुलिस कि चौकी के गार्ड  को 20 रुपये रिश्वत देनी पडी।

जब वाहन चालक से इस का कारण पूछा तो बताया कि अगर नही दिया जाएगा तो ये लोग हमे बोलेंगे कि तुम गाडी मे अवैध रूप से चंदन ले जा रहे हो जो कि कानूनन अपराध है। उस के बाद  जब हम वहां के जंगलों में स्थित पहले चरण के दर्शन के लिए तिरुमाला पहुंचे तो वहां दर्शन करने के बाद हम आगे के पडाव गंगा सागर का दर्शन करने के लिये निकले। उससे पहले वहां मौजूद कर्मचारियों ने वाहन चालक से प्रवेश के लिये 20 रुपये की रिश्वत ली, तब जाकर आगे जाने की अनुमती मिली।

हम वहा गंगा सागर , पाप नासम और कुच्ह दर्शनीय स्थल का दर्शन कर वापस अपने ठहराव पर आने के बाद दूसरे दिन 20 जनवरी को बालाजी के पास ही कुबेर भगवान का दर्शन करने गए। कुबेर मंदिर बालाजी मंदिर के सामने ही है। जब हम दर्शन करने से पहले जब नारियल लेने गए तो वहा देखा कि मंदिर परिसर मे सुरक्षा मे तैनात एक महिला सुरक्षा कर्मचारी वहा के दुकानदारों से रिश्वत वसूल रही थी। रिश्वत नही देने वाले को बाहर जाने को रही थी। बेचारे दुकानदार चुपचाप उसकी जेब गरम कर रहे थे। ये सब नज़ारा देख कर लगा कि इन सुरक्षा कर्मियों की भगवान ही रक्षा करे।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. Vinay Dubey says:

    aaj kal jo kudh se nahi drth hai oh god se kay drega

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