/आज कुछ नहीं मेरे भाई आज सिर्फ महंगाई

आज कुछ नहीं मेरे भाई आज सिर्फ महंगाई

विजय पाटनी – लो फिर दाम बढ़ गए है , सुना है हमारे मनमोहन सिंह जी  अर्थशास्त्री है , और वो व्यर्थ में कुछ करते नहीं है , सही है , अब कसाब भाई जान का और तिहाड़ में इतने बड़े बड़े vip लोग बैठे है तो उनका रोज का खर्चा कहाँ  से चलेगा ? उन सब कि अच्छे से देख भाल तो हम लोगो को ही करनी है , आखिर वो हमारे जमाई है उनकी सेवा तो बनती है , अतिथि देवो भव: क्यों भूल रहे है हम ?
हम लोग व्यर्थ में हाय तोबा मचा रहे है , अरे कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ ही है ,और  रोज आम आदमी के सर पे पड़  रहा है , और जब कभी हक़ कि बात कि जाती है तो कभी कभी  हाथ के साथ लाठी भी पड़ जाती है ||
जयपाल रेड्डी साहब कह रहे है कि ज्यादा  दाम नहीं बड़े है , ये तो मामूली बात है , रेड्डी साहब सही कहा आप ने , आप कि कार तो वातानुकूलित है , इस लिए आप को आम आदमी के तन बदन में सुलगती आग कि तपिश महसूस नहीं होती , दो कदम आप चल के तो देखिये आम आदमी कि तरह सड़क पे , खेर छोडिये आप क्या चलेंगे ?  क्युकी आप और आप कि सरकार, दोनों बिना सहारे के और मैडम के इशारे के चल नहीं सकती ||
चलो लगे हाथ प्रणव दा को भी मिल लेते है , प्रणव दा तो हमारे प्राणों के पीछे पड़े हुए है जब से वित्त मंत्री बने है , हमें लगा था कि इनके वित्त मंत्री बनने से शेयर मार्केट ऊपर चढ़ेगा लेकिन अब लगता है इन्होने अपना पैसा शेयर मार्केट कि जगह तेल के खेल में लगा दिया है || दा खेलिए आप, वैसे भी अभी कलमाड़ी कि जगह खाली है  तो उनकी जगह किसी को तो लेनी होगी ||
अब देश के सभी लोगो को अनशन करने का चस्का लग गया है तो अब सरकार कह रही है कि सब अनशन ही करो , भूखे रहो , कम खाओ , गम  खाओ , और बस सो जाओ लम्बी तान के , क्युकी इन सब से अब राहत  जल्दी मिलने वाली है नहीं ||
हमारे युवराज भी आज कल कही दिखाई  नहीं दे रहे है , लगता है मैडम ने उन्हें प्रधानमंत्री पद कि ट्रेनिंग लेने के लिए कही भेज रखा है , मनमोहन के सर सब घोटालों का, महंगाई का ठीकरा फोड़ दो , और फिर देश कि भोली भाली  जनता को कांग्रेस का नया चेहरा दिखा दो ||
युवराज तो वैसे भी युवराज है उन्हें तो सब दिख जाता है यहाँ तक कि जो नहीं हुआ है वो भी वो देख लेते है , उन्हें दिख ही रहा होगा कांग्रेस का भविष्य भी ||
लो हमारी लेखनी भी कांग्रेस सरकार कि तरह मुद्दे से भटक गयी ,खेर आज दिल नहीं कर रहा काम करने का भाई इसलिए आज सिर्फ महंगाई ||

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.