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क्या शाहरुख ने ये तमाचा शिरीष के बदले सलमान के गाल पर मारा था?

By   /  January 31, 2012  /  No Comments

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संजय दत्त की पार्टी में शाहरुख खान के फराह खान के पति शिरीष कुंदर को थप्पड़ मारने की वजह क्या सलमान खान थे? शिरीष को थप्पड़ मारने के बहाने सलमान को तो नहीं धमका रहे थे शाहरुख?

आईबीएन-7 की खबर के मुताबिक ये सवाल इसलिए खड़ा हुआ है क्योंकि सब जानते हैं कि शिरीष कुंदर और फरहा खान के आजकल सबसे अच्छे दोस्त सलमान खान हैं। शिरीष की मानें तो शाहरुख ने इशारों-इशारों में झगड़े के वक्त ये भी कह डाला था कि ले आओ अपने दोस्त को, उसे भी देख लूंगा।

अग्निपथ की सक्सेस पार्टी में शाहरुख खान और शिरीष कुंदर के बीच झगड़ा शुरू हुआ एक छोटी सी बात पर लेकिन बात इतनी बढ़ गई कि शाहरुख ने शिरीष को एक जोरदार थप्पड़ रसीद कर दिया। शिरीष किंग खान की कभी बेस्ट फ्रेंड कही जाने वालीं फराह खान के पति हैं। शिरीष सबसे ज्यादा दोस्ती निभाते हैं सलमान खान से। माना जाता है कि शाहरुख और फराह के बीच दूरियों की वजह भी शिरीष ही हैं, नहीं तो फराह शाहरुख का गुणगान करते कभी नहीं थकती थीं। लेकिन शिरीष को शाहरुख और फराह की दोस्ती कभी रास नहीं आई।

इसकी वजह भी है। शिरीष को फिल्म बनाने के लिए पैरवी शाहरुख ने नहीं बल्कि सलमान ने साजिद नाडियाडवाला से की थी। यहां तक कि फराह और शिरीष की शादी में स्पेशल गेस्ट भी सलमान ही थे और सलमान ने भी दोस्ती निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। फराह के जन्मदिन पर उऩ्होंने दोनों के लिए खुद पार्टी थ्रो की। फराह ने भी ऐलान कर दिया है कि ओम शांति ओम के सीक्वल में वे सलमान खान को लेंगी।

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  • Published: 7 years ago on January 31, 2012
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  • Last Modified: January 31, 2012 @ 8:52 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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