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दिल में कुछ फन हो तो गजल होती है

By   /  February 2, 2012  /  1 Comment

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-शिवेष सिंह राना||
हिन्दी गजलों के ‘गजलराज’ रामनाथ सिंह उर्फ अदम गोंडवी का रविवार सुबह एसजीपीआईजी में निधन हो गया। 65 साल के गांेडवी लम्बे समय से लिवर संबंधी रोग (लिवर सिरोसिस) से पीड़ित थे। वह हमेशा दबे कुचले लोगों की ‘आवाज’ बने। 1998 में मध्य प्रदेश सरकार से दुष्यंत कुमार पुरस्कार पाने वाले गोंडवी के ‘धरती की सतह पर’ एवं ‘समय से मुठभेड़’ जैसे गजल संग्रहों को शायद ही कोई भूल पाए।
नेताओं के गैरजिम्मेदाराना रवैये पर उन्होंने ‘जो डलहौजी न कर पाया वो ए हुक्मरान कर देंगे, कमीशन दो तो हिन्दुस्तान नीलाम कर देंगे’ लिखते हुए नेताओं की खोखली राजनीति का पर्दाफाश किया। गोंडवी लगातार समाज की तल्ख सच्चाइयों को गजल के माध्यम से लोगों के सामने रखते रहे और कागजों पर चल रही व्यवस्थाओं की पोल खोलते रहे।
जब पड़ी सोर्स की जरूरत
आजीवन व्यवस्थाओ पर चोट करने वाले गोंडवी भी अव्यवस्था का शिकार हुए। राजधानी लखनऊ स्थित पीजीआई संस्थान ने धनाभाव के कारण उस जानी-पहचानी ‘शख्सियत’ को भर्ती करने से मना कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को जैसे ही अपने ‘करीबी’ की स्थिति का पता चला तो उन्होंने अपने निजी सचिव को ‘पैसे’ और अपने ‘सोर्स’ के साथ एसपीजीआई भेजा। तब जाकर शुरू हो सका उनका इलाज।
नहीं दिखी संवेदनशीलता
गोंडवी ‘जनकवि’ थे, न कि किसी जाति विशेष के आईकॉन। जब गोंडवी जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे थे तब धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर्स भी यूं मुंह मोड़ लेंगे ऐसी उम्मीद नहीं थी। यदि उन्हें समय से इलाज मिल जाता तो हो सकता है हम ये ‘धुरंधर’ धरोहर न खोते।

सरकार ने नहीं ली सुधि
राजधानी के अखबार अदम गोण्डवी की बीमारी एवं आर्थिक स्थिति का हवाला देने वाली खबरें लगातार प्रकाशित करते रहे लेकिन ‘मदमस्त’ हुक्मरानों को अपनी जेब भरने से फुरसत मिलती तब तो वे इस उत्तर प्रदेश के ‘इतिहास’ की सुधि लेते। सत्ता की ‘मस्ती’ में चूर सरकार ने अपनी जिम्मेदारी नहीं समझी। हांलांकि बड़े नेताओं में के विपक्ष के मुखिया लगातार गोंडवी की मदद करते रहे।
सरकारी बयान हुए हवा-हवाई
वोट बैंक बढ़ाने और सत्ता पर राज करने के लिए सरकार के पिछले दिनों बयान आए कि सरकारी अस्पतालों में गरीबों को मुफ्त चिकित्सीय सुविधाएं दी जाएंगी, दवाओं का टोटा नहीं होगा, जांच भी मुफ्त होगी…..आदि। यदि इसमें डॉक्टरों ने कोई बंदरबांट की तो उन्हंे इसकी सख्त सजा मिलेगी। पर क्या इन ’कोरे’ बयानों का कोई औचित्य है?
ये गोंडवी थे जो बात मीडिया में आ गई , हो सकता है ‘कुछ’ पर गाज भी गिर जाए, लेकिन आम गरीब जाए तो जाए कहां? उसके पास तो न सोर्स है न पैसा।
मरते दम तक खोली पोल
ताउम्र भ्रष्ट तंत्र की खामियों को उजागर करने वाले ‘सितारे’ गोंडवी मरते समय भी व्यवस्था की पोल खोल गए कि पहले पैसा फिर इलाज की ‘कारगुजारी’ अभी भी जारी है। यदि पैसा नहीं भी है तो सोर्स से ही काम चल जाएगा। गोंडवी ने सरकार पर चुटीले अंदाज में शेर लिखा था-
तुम्हारी फाइलों में गांवो का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है।
लगी है होड़ सी देखो अमीरी-औ-गरीबी में , ये गांधीवाद के ढ़ंाचे की बुनियादी खराबी है।
तुम्हारी मेज चांदी की, तुम्हारे जाम सोने के, यहां जुम्मन के घर में आज भी फूटी रकाबी है।

आदरणीय गोंडवी जी को सम्पूर्ण राष्ट्र की ओर से श्रद्धांजलि।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. atik vishal says:

    bhaiyon theek esi hi milti julti meri kahani hey swayam sukhi sampanna raha jansavak or imandari vali lekhni or samajsava ka khmiyaja bhugat rahan hun 01-06-98 sey shosan ka shikar hun ek-ek rupye ko mohtaj hun or natinol r.t.i award bi mil chuka hey shasan/prashasan men sujhav dene par sarahaniya prashasti patra bi mil chuka he or bi bhahut sey vishist viyaktiyon key sarahniya patra mujhe preshit kiye jate rahen hen p m dr manmohan singh sey lekar atal ji tak ki sarahniya chitti mujhe mil chukin hen swaya

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