/गुलज़ार ने अपने अंदाज़ में पढ़ा ‘तेरा बयान गालिब’, डर्टी गर्ल ने लांच किया

गुलज़ार ने अपने अंदाज़ में पढ़ा ‘तेरा बयान गालिब’, डर्टी गर्ल ने लांच किया

पिछले दिनों मुंबई में एक समारोह में संगीत कम्पनी सारेगामा द्वारा रिलीज़ किये गए ऐलबम ‘तेरा बयान ग़ालिब’ को अभिनेत्री विद्या बालन ने लॉन्च किया. ‘तेरा बयान ग़ालिब’ में लोकप्रिय गीतकार व फिल्म निर्देशक गुलज़ार ने मिर्ज़ा ग़ालिब के खतों को अपनी गंभीर आवाज में पढ़ा है और लोकप्रिय ग़ज़ल गायक स्व जगजीत सिंह ने ग़ालिब की गज़लों को गाया भी है और इसमें संगीत भी दिया है. इस एलबम का संयोंजन एवं निर्देशन जाने-माने थियेटर निर्देशक सलीम आरिफ ने किया है.

गुलजार के साथ गजल संग्रह 'तेरा बयान गालिब' लांच करतीं विद्या बालन

ऐलबम लॉन्च के बाद गुलज़ार साहब ने “एक बौछार था” नाम की कविता पढ़ी, जिसे उन्होंने स्व. जगजीत सिंह को समर्पित किया और कहा, ”बहुत दिनों से इस ऐलबम की तैयारी चल रही थी. सोचा क्यूँ न कुछ मिर्ज़ा ग़ालिब के बारे में करें लेकिन धारावाहिक से अलग. सलीम आरिफ जो कि पीछे दस सालों से ‘ग़ालिबनामा’ को स्टेज पर प्रस्तुत करते रहे हैं, यह एलबम भी इनके ही प्रयास से आप सब तक पहुँच सका है.’’

जाने माने थियेटर निर्देशक सलीम आरिफ ने कहा “कभी नही सोचा था इस अवसर पर जगजीत भाई हमारे साथ नही होंगे. पहले हमने सोचा था कि 27 दिसंबर को दिल्ली में बल्लीमारान में जहाँ मिर्ज़ा ग़ालिब की हवेली है वहीँ इस एलबम को रिलीज़ करें लेकिन नहीं कर सके. आप सब जानते हैं क्यों? फिर सोचा कि 8 फरवरी को जगजीत भाई के जन्मदिन पर रिलीज़ करें. लेकिन नही संभव हो सका.”

उनसे यह पूछने पर कि कितना समय लगा इस ऐलबम को तैयार करने में उन्होंने बताया, “रिकॉर्डिंग में 3 महीने लगे लेकिन मैं तो पिछले दस सालों से इससे जुड़ा हूँ.” अब जबकि जगजीत जी हमारे बीच नहीं हैं तो कैसे उनका संगीत आपने इस एलबम में लिया तो उन्होंने कहा कि हमने जगजीत भाई द्वारा तैयार की हुई धुनों को कहीं-कहीं से लिया कुछ-कुछ उन्होंने कभी जो गुनगुना लिया था, वो सब खोज कर हमने यह एलबम का संगीत तैयार किया है.

इस अवसर पर सा-रेृ-गा-मा के एमडी अपूर्व नागपाल व आदर्श गुप्ता (बिजनेस हेड) गायिका रेखा भारद्वाज, रागेश्वरी, लेखक अतुल तिवारी, भूपेंद्र व मिताली, अभिनेत्री लुबना सलीम आदि उपस्थित थे. (प्रेस विज्ञप्ति)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.