/काटजू के बयान पर बिहार विधानसभा में हंगामा, तीन सदस्‍यीय जांच कमेटी गठित

काटजू के बयान पर बिहार विधानसभा में हंगामा, तीन सदस्‍यीय जांच कमेटी गठित

पटना। भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष मार्कण्डेय काटजू के ‘बिहार में प्रेस की आजादी नहीं’ सम्बंधी बयान को लेकर सोमवार को बिहार विधानसभा के बाहर और भीतर विपक्षी दलों ने जमकर हंगामा किया और सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। विधानसभा की कार्यवाही प्रारंभ होने से पहले गेट के बाहर सभी विपक्षी सदस्यों ने प्रेस की आजादी को लेकर विभिन्न तरह के नारे लिखे तख्तियों को लेकर सरकार के विरोध में जमकर नारे लगाए। इसके बाद जब सदन प्रारंभ हुआ तब भी सदन के अंदर काटजू के बयान को लेकर हंगामा किया। इसके बाद विपक्ष ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया।

इस मसले पर विपक्ष ने कार्यस्थगन का प्रस्ताव भी दिया जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने अवैधानिक बताते हुए नामंजूर कर दिया। शून्यकाल में भी इस मसले पर जमकर शोर शराबा हुआ। नेता प्रतिपक्ष अब्दुल बारी सिद्दिकी ने कहा कि काटजू के वक्तव्य पर जिस तरह से उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने टिप्पणी की है वह अपमानजनक है। उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने इस पर कहा कि जिस तरह से प्रेस कांउसिल आफ इंडिया के अध्यक्ष श्री काटजू वक्तव्य दे रहे हैं, वैसी स्थिति में केंद्र सरकार को इस पर विचार करना चाहिए कि ऐसे लोगों को इस तरह के पद पर रखा जाना चाहिए या नहीं। विपक्ष ने इस मसले पर ध्यानाकर्षण के समय भी सदन का बहिष्कार किया।

शून्यकाल में इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष अब्दुल बारी सिद्दिकी ने जब उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के नाम के साथ अपनी बात कही तो उप मुख्यमंत्री श्री मोदी ने कहा कि-यह तो मीडिया को तय करना है कि वह स्वतंत्र है कि नहीं? चार आदमी ने श्री काटजू को ब्रीफ कर दिया तो क्या उसके आधार पर वह टिप्पणी कर देंगे। दरअसल श्री काटजू अलग-अलग राज्यों में पहुंचकर इस तरह की टिप्पणी करते रहे हैं। महाराष्ट्र में गये तो वहां कह दिया कि महाराष्ट्र की सरकार को बर्खास्त कर देना चाहिए। गया में उन्होंने यह कहा कि बिहार सरकार को सबक सीखा देंगे। ऐसी बात तो विपक्ष भी नहीं करता है। कौन लोग हैं जो उन्हें बरगला रहे हैं।

संसदीय कार्य मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि विपक्ष को इस मुद्दे को सदन में लाने से पहले से ठीक से पढ़ना चाहिए था। सरकार ने ऐसा कोई कानून तो बनाया नहीं है जो मीडिया पर बंदिश की बात करता हो। श्री काटजू ने खुद कहा है कि वह बिहार में मीडिया की स्वतंत्रता की जांच कराएंगे। पहले जांच रिपोर्ट तो आ जाये। श्री यादव ने कहा नेता प्रतिपक्ष संवैधानिक पद पर बैठे लोगों के बारे में मर्यादा के साथ टिप्पणी करने की बात कही है जबकि राज्यपाल के अभिभाषण के बाद विपक्ष के कुछ सदस्यों ने राज्यपाल को सत्ताधारी दल का एजेंट कहा। इस पर नेता प्रतिपक्ष अब्दुल बारी सिद्दिकी खड़े हो गये। उन्होंने कहा-आज जो लोग सत्ता में हैं उन्होंने तत्कालीन राज्यपाल एआर किदवई के बारे में क्या कहा था सबको मालूम है।

गौरतलब है कि पटना में शुक्रवार को एक समरोह में काटजू ने कहा था कि बिहार में प्रेस की स्थिति अच्छी नहीं है। अगर यहां कोई सरकार या सरकारी अधिकारी के खिलाफ लिख दे तो उसे परेशान किया जाता है। उन्होंने कहा था कि लालू के शासन काल से बिहार में विधि-व्यवस्था की स्थिति में सुधार जरूर हुआ है परंतु प्रेस की आजादी कम हो गई है। उन्होंने कहा कि बिहार में अगर कोई पत्रकार सरकार के खिलाफ लिख देता है तो उसके मालिकों पर दबाव बनाकर उस पत्रकार को नौकरी से निकालवा दिया जा रहा है या उसे तंग करने की नीयत से स्थानांतरण करवा दिया जा रहा है। दूसरी तरफ खबर है कि जस्टिस काटजू ने बिहार में मीडिया की स्‍वतंत्रता की जांच के लिए तीन सदस्‍यीय टीम गठित कर दी है।

 

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