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पेटा के ऐड में भी मौका चूकीं दीया मिर्ज़ा, ढंके बदन में किया फैन्स को निराश

By   /  March 2, 2012  /  No Comments

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वैसे तो जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था ‘पीपल फॉर इथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स’ पेटा का हर विज्ञापन अभिनेत्रियों के बदन को कम से कम कपड़ों में (कई बार बिना कपड़ों के) दिखाने के लिए बदनाम रहा है, लेकिन खूबसूरत बदन की मलिका बॉलीवुड एक्ट्रेस दीया मिर्ज़ा को पता नहीं क्यों पूरा ढंक दिया गया है।

दीया ने जानवरों की खाल के व्यापार के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के लिए के लिए हाल ही में ये विज्ञापन किया है। इस विज्ञापन में दीया एक नागिन की तरह नजर आ रही हैं। इसका संदेश है ‘Face It: Exotic Skins Kill. Wildlife belong in the wild, Not in your wardrobe.’ (इसका सामना करें – आकर्षक त्वचाएं मारती हैं। जंगली जानवर जंगल की मलकियत हैं, आपकी अलमारी की नहीं।)

 

दीया का कहना है कि एक जोड़ी जूतों या पर्स के लिए जिंदा जानवरों की खाल उतारना या उन्हें मार डालना सही नहीं है। उन्होंने कहा, सांप और मगरमच्छ की नकली स्कीन का यूज कर आप उन्हे श्रद्धांजलि दे सकते हैं।

 

इसके लिए दीया के शरीर से खून निकलता दिख रहा है जिसे देखकर लगता है कि जैसे अभी अभी ही उनकी खाल निकाली गई है। प्रख्यात फोटोग्राफर जतिन कम्पानी ने इस विज्ञापन की शूटिंग की है। दरअसल दीया को अपनी फिल्म ‘लव, ब्रेकप्स, जिंदगी’ में बेघर कुत्तों को गोद लेने के लिए प्रोत्साहित करने की वजह से ही यह अवसर दिया गया था। खास बात ये है कि दीया काफी आकर्षक बदन की मालकिन हैं और उन्हें अंग प्रदर्शन से कोई परहेज़ भी नहीं है, लेकिन लगता है वे इसका पूरी तरह इस्तेमाल करने से चूक गईं।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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