/CNEB में अनुरंजन झा OUT.. हरीश गुप्ता IN..?

CNEB में अनुरंजन झा OUT.. हरीश गुप्ता IN..?

नोएडा से प्रसारित होने वाले कंप्लीट न्यूज़ एंड ब्रॉडकास्ट यानि सीएनईबी चैनल से खबर है कि उसके कार्यकारी मुखिया (सीओओ) अनुरंजन झा की विदाई तय हो गई है। बहुत मुमकिन है कि अब वहां चैनल का कार्यभार संभालने के लिए किसी बड़े ओहदे पर हरीश गुप्ता को बुलाया जाए।  सूत्रों के मुताबिक चैनल के मैनेजिंग डायरेक्टर अमनदीप सरान ने अनुरंजन का सालाना कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू करने से मना कर दिया है।

सीएनईबी के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि अनुरंजन ने अपना प्रोफाइल बनाने के चक्कर में चैनल को गर्त में पहुंचा दिया था। अनुरंजन ने चैनल की बागडोर तब संभाली थी जब इसके सीईओ राहुल देव ने ‘परेशान’ हो कर इस्तीफा दे दिया था। अपनी नई जिम्मेदारी संभालते समय अनुरंजन ने सरान पिता-पुत्र को कई सब्ज़बाग दिखाए थे, लेकिन उनमें से एक भी पूरा नहीं हो पाया। यहां तक कि तमाम गोरखधंधों ओर काल्पनिक दावों के बावजूद टीआरपी रसातल में पहुंच गई। इस सब से चैनल के मालिकान पहले ही ठगा हुआ महसूस कर रहे थे।

अनुरंजन झा ने अपने अक्खड़ स्वभाव के कारण चैनल के अंदर और बाहर दोनों जगह दर्ज़नों दुश्मन बना लिए थे। इधर पिछले कुछ महीनों से सरान के पास अनुरंजन के खिलाफ़ तकरीबन हर रोज़ एक शिक़ायत मिल रही थीं जो उनके विश्वासपात्रों ने किए थे। इन शिकायतों ने ताबूत में आखिरी कील ठोंक दी।

यह भी माना जा रहा है कि अनुरंजन के साथ-साथ उसके करीबी माने जाने वाले दो तीन लोग भी चैनल से विदा कर दिए जाएंगे। खबर है कि अनुरंजन ने भी अपना नया ठिकाना तलाश लिया है और वह हाल ही में बिना किसी हेड के लांच हुए चैनल जीएनएन में डेरा जमाने की तैयारी में है। उम्मीद है अब वहां से उस चैनल के मौजूदा मुखिया राघवेश अस्थाना की विदाई की कोशिशें शुरु हो जाएगी।

इधर सीएनईबी में नए मुखिया की तलाश जारी है और सूत्रों की मानें तो हरीश गुप्ता का नाम तय हो गया है। गौर तलब है कि हरीश गुप्ता ने  इससे पहले इंडिया न्यूज़ नाम के एक चैनल को सीईओ की हैसियत से लांच किया था और वहां अनुरंजन ने ही पहुंच कर इनके लिए भी परेशानी पैदा करने की कोशिशें की थी। हालांकि पहले ही अनुरंजन को एक झगड़े के कारण विदा किया जा रहा था, लेकिन तब हरीश गुप्ता ने बीच बचाव कर उसे कुछ दिन के लिए जमा दिया था।  हालांकि  इसके बाद लगभग 3-4 महीनों में ही उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया गया । इसके बाद उसे करीब डेढ़ साल बेरोजगार रहने के बाद ही दोबारा सीएनईबी में ठौर मिला।

बाद में हरीश गुप्ता ने इंडिया न्यूज के मालिकों के ढुलमुल रवैये से तंग आकर चैनल को गुडबाय कह दिया था।   अपने पुराने अखबार समूह (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मे पूरी तरह आने से पहले वे दैनिक भाष्कर के संपादक थे) भास्कर ग्रुप और ज़ी नेटवर्क के ज्वाइंट वेंचर डीएनए में बतौर नेशनल एडीटर चले गए थे।

गौरतलब है कि राहुल देव के जाने के बाद से सीएनईबी में कोई कद्दावर पत्रकार नहीं था जिसके कारण चैनल की छवि लगातार धूमिल हो रही थी।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.