/वंशवाद को नहीं, जनता के फैसले को तरज़ीह: चौथी बार भी मुलायम ही बनेंगे मुख्यमंत्री

वंशवाद को नहीं, जनता के फैसले को तरज़ीह: चौथी बार भी मुलायम ही बनेंगे मुख्यमंत्री

– शिवनाथ झा।।

वंशवाद से ऊपर उठें, उसके लिए सोचें जिसने आपके सर विजय का ‘सेहरा’ बांधा है”: मुलायम

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव अपने परिवार और सभी सगे सम्बन्धियों को स्पष्ट तौर पर आगाह किया है कि “वंशवाद” से ऊपर उठ कर उत्तर प्रदेश के आवाम के बारे में सोचें जो समाजवादी पार्टी में अपना विश्वास जताया है और आपको ‘सरकार बनाने लायक’ बनाया है। 

होली के अवसर पर जहाँ परिवार और सम्पूर्ण प्रदेश में ख़ुशी का माहौल है, मुलायम सिंह यादव अपने परिजनों को यह कहते सुने गए: “मुख्यमंत्री कौन बनेगा यह निर्णय जनता करेगी ना कि हम सभी सगे-सम्बन्धी घर में बैठकर अपना निर्णय उनपर थोपें।” समाजवादी पार्टी के संसदीय बोर्ड ने मुलायम सिंह यादव को आगामी 10 मार्च विधान मंडल का नेता चुनने का अधिकार दिया है। मुलायम सिंह के बहुत ही नजदीकी सूत्रों ने आज मीडिया दरबार को बताया कि “नेताजी किसी भी परिस्थिति में अखिलेश यादव को मुख्य मंत्री बनाने के पक्ष में नहीं है, क्योकि इससे पार्टी के साथ साथ परिवार में भी विघटन की सम्भावना है। वैसे अखिलेश भी “पिता की राजनीतिक सूझ-बूझ और कद के सामने खड़े नहीं होना चाहते हैं।”

सूत्रों के अनुसार, मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल सिंह यादव भी नहीं चाहते हैं की अखिलेश यादव को मुख्य मंत्री का कार्य-भार सौंपा जाये। सूत्रों ने बताया कि वैसे तो शिवपाल सिंह यादव मुलायम सिंह यादव के अनन्य भक्त हैं और उनके निर्णय को चुनौती नहीं देंगे, लेकिन पारिवारिक स्तर पर अखिलेश यादव को बनाने पारिवारिक के अस्थिरता का वातावरण आ सकता है। वैसे मुलायम और अखिलेश दोनों ही प्रदेश के राज्यपाल श्री बनवारी लाल जोशी को इस बात से आश्वस्त कर चुके हैं कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा यह 10 मार्च को तय होगा।

सूत्रों के अनुसार, वैसे इस चुनाव परिणाम में अखिलेश यादव की भूमिका को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है, लेकिन “अखिलेश यादव में उतनी राजनितिक सूझ-बूझ नहीं है जो आने वाले दिनों में कांग्रेस के अतिरिक बहुजन समाज पार्टी या भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश के साथ साथ राष्ट्रीय नेताओं की ‘गहरी चाल’ को समझ सकें। इसलिए इस बात की कोशिश जारी है कि समाजवादी पार्टी के संगठनात्मक स्वरुप को और अधिक मजबूत बनाने के साथ साथ प्रदेश के विकाश सम्बन्धी कार्यों का सम्पूर्ण भार अखिलेश और उनके कोर-ग्रुप के सभी सदस्यों को सौंपा जाय वह भी मत्रिमंडल में केबिनेट मंत्री के रूप में आसीन कर।”

यह पूछने पर कि ब्रह्म शंकर त्रिपाठी और मनपाल सिंह की क्या भूमिका होगी जो अखिलेश को मुख्य मंत्री बनाने के लिए आमादा हैं, एक आंतरिक सूत्र ने बताया, “ये सभी नेताजी (मुलायम सिंह) से बात किये हैं और अखिलेश यादव द्वारा चुनाब से पूर्व किये गए वादे को दुहराया है (जिसमे मुख्य मंत्री का पड़ भी एक है), लेकिन प्रदेश में आने वाली दिनों में जो उथल-पुथल होने का संकेत दिख रहा है, उसे मद्देनज़र रखते हुए सभी शांत हैं।”

यह पूछने पर कि आज़म खान की भूमिका क्या होगी? सूत्र के अनुसार, “आजम खान के अतिरिक्त पार्टी के कुछ अन्य लोगों के ‘इगो-वार’ के कारण पार्टी एक बार झटका खा चुकी है और इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि नेताजी (मुलायम सिंह) उस हादसे से अब तक बाहर नहीं आ पाए हैं, लेकिन इस बार ऐसी कोई अप्रिय घटना ना हो, इसके लिए नेताजी सबों पर विशेष ध्यान रखे हुए हैं।”

ग़ौरतलब है कि फरवरी 2010 में समाजवादी पार्टी से महासचिव अमर सिंह और सांसद जया प्रदा को पार्टी से निष्काषित कर दिया गया था। सूत्रों का मानना है कि आधिकारिक तौर पर जो भी वजह बताये गए हों, लेकिन वह वास्तविकता से परे है। पार्टी के कुछ लोग (जो आज भी सक्रिय सदस्य हैं) समाजवादी पार्टी में अमर सिंह को नहीं देखना चाहते थे। लेकिन, आज भी समाजवादी पार्टी के अस्तित्व को इतनी दूर तक लाने में नेताजी अमर सिंह की भूमिका को नहीं भूल पाए हैं”। इस विषय में अमर सिंह से संपर्क नहीं हों सका।

मुलायम सिंह यादव सबसे पहले 1989 में मुख्य मंत्री बने। लेकिन 1990 में विश्वनाथ प्रताप सिंह कि सरकार गिरने के बाद वे चन्द्र शेखर के जनता दल (समाजवादी) में चले गए और कांग्रेस के सहयोग से सरकार बनाये रखे। लेकिन अप्रील 1991 में कांग्रेस द्वारा समर्थन वापस ले लेने के कारण सरकार गिर गयी।

मुलायम सिंह यादव ने 7 अक्तूबर 1992 को समाजवादी पार्टी का गठन किया और बहुजन समाज पार्टी से साथ चुनाव लड़कर भारतीय जनता पार्टी को सरकार बने से रोका। इस समय फिर कांग्रेस ने साथ दिया। मुलायम सिंह यादव तीसरी बार मुख्य मंत्री सितम्बर 2003 में बने थे।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.