/पूर्वांचल भोजपुरी महासभा ने किया मनोज भावुक को सम्मानित

पूर्वांचल भोजपुरी महासभा ने किया मनोज भावुक को सम्मानित

भोजपुरी साहित्यकार मनोज भावुक को पूर्वांचल भोजपुरी महासभा , गाज़ियाबाद द्वारा 10 मार्च, 2012 को संस्था के सबसे प्रतिष्ठित अवार्ड पूर्वांचल गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गार्डेनिया ग्रुप के चेयरमैन मनोज राय ने। मनोज को यह सम्मान भोजपुरी की तमाम संस्थाओं के साथ साहित्यिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में किए गए प्रयास और उल्लेखनीय सेवा के लिए दिया गया है।

 

 

इससे पहले पिछले दिनों विश्व पुस्तक मेला, दिल्ली में अन्तर्राष्ट्रीय किसान परिषद और नारायणी साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भी मनोज भावुक को विश्व हिन्दी समिति के अध्यक्ष श्री दाउजी गुप्त के हाथों सम्मानित किया गया था।

 

 

मनोज विश्व की सबसे बड़ी भोजपुरी संस्था विश्व भोजपुरी सम्मलेन की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष हैं व इसके पहले इसी संस्था के ग्रेट ब्रिटेन और अफ्रीका इकाई के अध्यक्ष रह चुके हैं । मनोज पूर्वी अफ्रीका के युगांडा में भोजपुरी एसोसियेशन ऑफ़ युगांडा (BAU) की स्थापना कर चुके हैं और यूके में भोजपुरी समाज को संगठित कर लन्दन के हाइड पार्क में भोजपुरी कार्यक्रमों का आयोजन कर खासी शोहरत हासिल कर चुके हैं। तस्वीर जिंदगी के (ग़ज़ल-संग्रह) एवं चलनी में पानी (गीत- संग्रह) मनोज की चर्चित पुस्तकें हैं। मनोज भोजपुरी के जाने-माने फिल्म समीक्षक हैं और एक टीवी चैनल से भी जुड़े हुए हैं।

भोजपुरी जगत में अपने विशिष्ट योगदान के लिए मनोज भावुक भोजपुरी की राष्ट्रीय – अन्तराष्ट्रीय लगभग सभी संस्थाओं द्वारा नवाजे जा चुके है। एक रचनाकार के रूप में प्रतिष्ठित भाऊराव देवरस सेवा न्‍यास,लखनऊ द्वारा पंडित प्रताप नारायण मिश्र स्‍मृति-युवा साहित्‍यकार सम्‍मान और देश को गौरवान्वित करने वाली एक अजीम शख्सियत के तौर पर भारतीय भाषा परिषद सम्मान से भी भावुक विभूषित हैं।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.