Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

फोन हैकिंग मामले में अखबार की संपादक गिरफ़्तार, पिछले साल भी हुई थी पूछताछ

By   /  March 14, 2012  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

फोन हैकिंग मामले में पुलिस ने मंगलवार को मीडिया मुगल रूपर्ट मडरेक के न्यूज इंटरनेशनल समूह की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी रेबेका ब्रुक्स, उनके पति सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया। हैकिंग मामले की जांच में न्याय की दिशा को गुमराह करने की साजिश के संदेह में इन लोगों को गिरफ्तार किया गया।

ब्रुक्स और उनके पति चार्ली को ऑक्सफोर्डशायर के चिपिंग नॉर्टन स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया गया। ब्रुक्स के पति रेस के घोड़ों के प्रशिक्षक हैं और समाचार पत्र ‘टेलीग्राफ’ में नियमित स्तंभ भी लिखते हैं।

मामले में समाचार पत्र ‘द सन’ की पूर्व सम्पादक ब्रुक्स जमानत पर थीं। पुलिस ने भ्रष्टाचार एवं फोन हैकिंग मामले में संदेह होने पर उनसे पिछले साल पूछताछ की थी।

अन्य लोगों को लंदन, ऑक्सफोर्डशायर, हैम्पशायर एवं हर्टफोर्डशायर से गिरफ्तार किया गया। ऑपरेशन वीटिंग के अधिकारियों ने तड़के पांच एवं सात बजे के बीच इन गिरफ्तारियों को अंजाम दिया। अधिकारियों ने गिरफ्तार लोगों की सम्पत्तियों की तलाशी भी ली।

ऑपरेशन वीटिंग के तहत गिरफ्तार होने वाले लोगों की संख्या मंगलवार को 23 पहुंच गई। मामले की जांच जनवरी 2011 में शुरू हुई थी।

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email
  • Published: 6 years ago on March 14, 2012
  • By:
  • Last Modified: March 14, 2012 @ 5:04 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

एक जज की मौत : The Caravan की सिहरा देने वाली वह स्‍टोरी जिस पर मीडिया चुप है..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: