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अखिलेश बने मुख्यमंत्री तो ‘ज्वलनशील’ बनी दूसरे युवा नेताओं की पत्नियां

By   /  March 14, 2012  /  2 Comments

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– शिवनाथ झा ।।

“तू मइके मत जइयो, मत जइयो मेरी जान…” आजकल दिल्ली के रायसीना हिल्स और नई दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के अधीन रियासी इलाकों में जोर शोर से सुनने को मिल रहा है। कारण: युवा सांसदों की पत्नियाँ जहाँ एक ओर जहाँ अखिलेश यादव को भारत के सबसे बड़े हिंदी प्रदेश – उत्तर प्रदेश – के मुख्य मंत्री पद पर आसीन होने के बाद दुआएं देते ठाक नहीं रहीं हैं, वहीँ अपने-अपने पतियों की “राजनितिक कम-दृष्टि और आवाम पर पकड़ को कमजोर बताते हुए” कोसने में बाज नहीं आ रही हैं।

सुनने में आया है कि कुछ युवा सांसदों की पत्नियाँ यहाँ तक धमकी दे दी है कि अगर अपने प्रदेश में मुख्य मंत्री नहीं बने तो “छोड़-कर मायके भी चली जाएंगी।” ऐसी स्थिति में “धमकी को साकार होने के आसार ज्यादा दिखते हैं। इनमे विशेष कर वे पत्नियाँ है जो “कांग्रेस दरबार और राहुल गाँधी के बहुत करीबी माने जाते हैं।

सूत्रों के मुताबिक, “अखिलेश यादव की पहाड़-नुमा विजयी पर बधाई देते हुए, मनमोहन सिंह के सरकार में एक राज्य मंत्री की पत्नी अपने पति से कुछ इस कदर कहीं: अखिलेश जी आपसे भी कम उम्र के है, आप से शिक्षा भी अधिक नहीं है, लेकिन एक खूबी जिसे उन्होंने अपने आप में समेटा, वह यह की उन्होंने भारतीय राजनीति के महान राजनीतिज्ञ “विदुर” और “चाणक्य” दोनों की नीतियों को अपने में समावेशित किया।

इतिहास गवाह है कि, चाणक्य, धनानंद को परास्त और मार कर मगध के राजा के रूप में चन्द्रगुप्त को पदस्थापित करने हेतु भी उसे उस योग्य बनाया, क्योकि परोक्ष रूप से चाणक्य, धनानंद के पिता द्वारा अपने पिता का अपमान और मृत्यु दोनों का प्रत्यक्षदर्शी थे।”  इन शब्दों से मोहतरमा की “सूझ और बुझ” की गहराई को भली-भांति आँका जा सकता है, आखिर क्या कह दिया अपने पति को!

अखिलेश यादव के विजय के उपरांत एक दूसरी मोहतरमा की सोच, अपने पति के लिए कुछ इस कदर सामने आया: “कहते हैं पानी अपना “बहाव” ढूंढ़ लेता है। लेकिन यह जितना सच है, उतना ही सच यह भी है कि अगर पानी के बहाव में दम हो तो बाँध भी धराशायी हो जाते हैं, अगर नहीं, तो हरेक बढ़ते कदम पर पानी अपने आपको मिटटी के हवाले समर्पित करते जाता है।” इन मोहतरमा के पति भी सांसद है और पिता के “सौजन्य” से भारतीय राजनीति पर अवतरित हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, इन मोहतरमा की सोच भी कुछ ऐसी है है जिससे वे अपने पति को अपने पैरों पर खड़ा होने की सबक सिखा रही हों।

सूत्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश के एक युवा सांसद की पत्नी, वैसे उनके पति बहुत ही धनाढ्य हैं, फिर भी, इस बात को “सोचने” और “कहने” में कोई कोताही नहीं की।  “हमलोगों के पास क्या नहीं है, सब-कुछ है। लेकिन सभी चीजें पुरुखों का है, अपना बनाया हुआ कुछ नहीं। अब देखिये ना, डिम्पल यादव (अखिलेश की पत्नी) मुख्य मंत्री की पत्नी हों गयीं! उत्तर प्रदेश के लोग कितना उन्हें पसंद करेंगे, देखने में भी बहुत सुन्दर है। सरकारी महकमे, खास कर पुलिस वाले कितना सलामी देंगे। कितना गर्व हो रहा होगा डौली जी को। लेकिन यहाँ तो अपने फ्लैट में ही केंद्रीय रिजर्व पुलिस फ़ोर्स या दिल्ली पुलिस के लोग सलामी नहीं देते।”

बहरहाल, इन युवा सांसदों को अपने पर “शर्म” आ रही होगी या नहीं, यह तो वक़्त ही बताएगा, लेकिन “यदि किसी भी महिला की मनोदशा, चाहे वे मंत्रियों की ही पत्नियाँ क्यों ना हों, को मनोवैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाये, तो इतना तय है कि सभी अपने-अपने पतियों की ‘काबिलियत’ को पहचानने में अखिलेश यादव की जीत और डौली जी की सामाजिक प्रतिष्टा को एक केस-स्टडी के रूप में देखेंगी।”

राजनितिक दृष्टि से भारत के पन्द्रहवें लोक सभा में युवा नेताओं का भरमार नहीं तो बोलबाला जरुर रहा भले ही उन्हें “पारिवारिक विरासत” में मिली हों चाहे स्वर्गीय फ़िरोज़ गाँधी के पोते राहुल गाँधी और वरुण गाँधी हों, या स्वर्गीय राजेश पायलट के पुत्र सचिन पायलट हों या स्वर्गीय माधवराव सिंधिया के पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया हों या दिल्ली की मुख्य मंत्री शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित हों या महाराष्ट्र के मुरली देवड़ा के पुत्र मिलिंद देवड़ा हों या राजस्थान के पूर्व मुख्य मंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के पुत्र दुष्यंत सिंह हों या जिंदल समूह के अध्यक्ष नवीन जिंदल हों या अंत में समाजवादी पार्टी में अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव हों। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार 15वीं लोक सभा में कुल 79 ऐसे युवा सांसद है जिनकी आयु 27 और 40 वर्ष के बीच में है। जबकि 14वीं लोकसभा में ऐसे सांसदों की संख्या मात्र 34 थी।

यह भी उतना ही सच है की इन 79 युवा सांसदों में 50 सांसद “राजनीतिक घराने” से हैं जैसे “राजनीति उनकी बपौती” हों। और हों भी क्यों नहीं। इतना ही इनमे से 60 से अधिक फीसदी युवा सांसद अपने पैरों पर स्वयं भी खड़े होना नहीं जानते अगर “वंश” का सहारा नहीं हों।

एक नजर और देखिये: इन 79 युवा सांसदों में 33 ऐसे है जो “पिता की बदौलत” सांसद बने, छः ऐसे हैं जिन्हें “अपनी रानजीतिक माताओं का वरद-हस्त प्राप्त है”, इनता ही नहीं, यहाँ तक कि दो सांसद ऐसे भी हैं जो राजनेताओं के घराने में विवाह किये तो “सांसद का पद और राजनीति दोनों दहेज़ में मिला”।

एक और विडम्बना है: महाराष्ट्र, ओड़िसा, हरियाणा, पंजाब और लक्षद्वीप से जो भी युवा सांसद 15वीं लोक सभा में आए, उन सबों का कोई ना कोई राजनितिक गॉडफादर, चाहे जैविक पिता ही क्यों ना हो, लेकिन झारखण्ड या फिर केरल से जो युवा सांसद आये उनका कोई भी “राजनितिक परिवार” का इतिहास नहीं है।

इस संसद में कांग्रेस के सबसे अधिक 25 युवा सांसद है, जिसमे 22 को “भारत की राजनीति में वंश चल रहा है। जबकि भारतीय जनता पार्टी में औसतन यह “रुख” नहीं है। सत्रह युवा सांसदों में मात्र सात को ही “वंश की राजनीति” धरोहर में मिली जबकि शेष या तो छात्र राजनीति के माध्यम से आए हैं या फिर पार्टी के “भीष्म पितामह” – राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के रास्ते से आए हैं।

बहरहाल, सूत्रों का मानना है कि अखिलेश यादव मुख्य मंत्री के पद के रूप में शपथ और अपने मंत्रिमंडल के निर्माण के समय अपने सभी युवा सांसदों को (पत्नियों समेत) आमंत्रित करने जा रहे हैं, ताकि बड़े-बुजुर्गों का “आशीर्वाद” तो मिले ही, साथ ही, दोस्तों, शुभ-चिंतकों की “शुमकामनाएँ” भी मिले।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. Pawan kumar singh says:

    Lekin yahi to indian politics hai ki wo aate hai to aap sare bhale hi wo media ho ya janta sare log support karte hai lekin ek kam karne wala aata hai to aur simple faimily se ho to koi usko value nahi deta hai…..samaj ke log yahi kahte hai ki ye kya karega lekin history gawah hai ki ek aam admi ka beta hi khas parivartan laya hai chahe wo abraham linckon, lenin ho ya lalu, nitish, ya hamare ex p.m lal bahadur shastri ji rahe ho…….is par hamesha mai ek baat bolta hu ki agar unke (name na likhna chahunga lekin) ghar me ek apang baccha bhi paida hoga to wo nahi kuchh banega to ek m.p jaroor banega aur hamaare yahan kitna bhi tej ho to ek i.a.s, aur i.p.s ban kar unki sewa karega……….agar mujhse kuchh galat kaha gaya ho to mujhe plz maaf kar dijiyega………..
    -pawan

  2. बहुत बढ़िया…!!!

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