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ये है दिल्ली मेरी जान – लिमटी खरे

By   /  June 27, 2011  /  No Comments

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अण्णा बाबा अगर मोहरा नहीं तो फिर . . .!

सियासी दल विशेषकर कांग्रेस का आरोप है कि बाबा रामदेव और अण्णा हजारे के आंदोलन के पीछे संघ, भाजपा और कुछ अन्य ताकतें हैं। सवाल यह है कि पर्दे के पीछे चाहे जो हो, पर मुद्दा सही है या गलत! अगर सही है तो फिर इस बात से क्या फर्क पड़ता है कि पर्दे के पीछे कौन है। वहीं दूसरी ओर अगर इन दोनों ही के आंदोलनों को करंट संघ या भाजपा की बेटरी से मिल रहा हो तो फिर भाजपा शासित सूबों में सूबाई लोकपाल बना देना चाहिए जो राज्य संवर्ग के अधिकारियों कर्मचारियों पर अपना डंडा चलाए। जिस तरह सूचना का अधिकार कानून भारत की संसद द्वारा 15 जून 2005 को पारित किया था, किन्तु इसी भारत गणराज्य की गोवा और तमिलनाडू सरकार द्वारा इसे इससे आठ वर्ष पूर्व अर्थात 1997 में ही अपने सूबों में लागू कर दिया था। कांग्रेस इसका विरोध करती है तो करती रहे, जिन सूबों में कांग्रेस से इतर सरकारें हैं, वहां तो राज्य स्तरीय लोकपाल बन जाएं, ताकि देश के नागरिकों को कांग्रेस रहित राजनैतिक दलों में पारदर्शिता का अनुभव हो सके।

 

फिर मिलेगा कुंवारा प्रधानमंत्री देश को!

कांग्रेस के चतुर सुजान महासचिव राजा दिग्विजय सिंह के वक्तव्यों से कांग्रेस की भविष्य की रणनीति के बारे में अंदाजा लगाने में आसानी हो जाती है राजनैतिक भविष्यवक्ताओं को। राजा के हाल ही के वक्तव्यों से साफ हो गया है कि राहुल पीएम भी बनेंगे और घर भी बसाएंगे। कांग्रेस के अंदर अब यह बहस छिड़ गई कि राहुल घर पहले बसाएंगे या फिर अटल बिहारी बाजपेयी के बाद दूसरे कुंवारे ही प्रधानमंत्री बनेंगे। गांधी सरनेम वाले दो अन्य लोगों में से राहुल के चचेरे भाई वरूण ने तो सात फेरे ले लिए और दूसरे कांग्रेस के पूर्वोत्तर का काम संभालने वाले अनीष गांधी जिनका राहुल से खून का रिश्ता तो नहीं है पर सरनेम समान है ने भी मायावती के तारणहार सतीश मिश्रा की रिश्तेदार से। अब बच गए हैं राहुल। राहुल की कोलंबियाई मित्र के चर्चे तो हर कांग्रेसी की जुबान पर हैं। कांग्रेसी कहते हैं कि जब उनके पिता राजीव  इटली की बहू लाये तो राहुल भला क्यों पीछे रहें। राहुल के करीबी सूत्रों का कहना है कि राहुल दबे पांव कोलंबिया जाते आते रहते हैं और इसकी भनक उनकी मां सोनिया तक को नहीं लग पाती है।

 

कमल नाथ को कोसा गौर ने!

कल तक केंद्रीय मंत्री कमल नाथ के साथ गलबहियां डालकर घूमने वाले मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान नगरीय प्रशासन मंत्री बाबू लाल गौर अब कमल नाथ को आंखें दिखाने लगे हैं, जिसकी चर्चा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में होने लगी है। एआईसीसी में गौर के हालिया बयान का हवाला देकर तरह तरह की चर्चाएं आकार लेने लगी हैं। गौर ने हाल ही में कहा है कि केंद्र सरकार भोपाल, रायपुर, चंडीगढ़ को तो विशेष पैकेज दे रही है, पर जब संस्कारधानी जबलपुर की बारी आती है तो कांग्रेसनीत केंद्र सरकार द्वारा सौतेला व्यवहार आरंभ कर दिया जाता है। गौरतलब है कि वर्तमान में केंद्र में शहरी विकास मंत्रालय का प्रभार कमल नाथ के पास है एवं उनका संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा भी जबलपुर संभाग में ही आता है। महाकौशल में कमल नाथ को सर्वमान्य नेता की हैसियत से पहचाना जाता है, इन परिस्थितियांे में वे अपने संभाग के साथ ही सौतेला व्यवहार कर रहे हैं। अब कांग्रेस और भाजपा में बाबू लाल गौर की इस बयान बाजी के मायने खोजे जा रहे हैं।

 

ठीक नहीं हैं दीदी और राजमाता के रिश्ते

कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी और त्रणमूल की सुप्रीमो सुश्री ममता बनर्जी के बीच सब कुछ ठीक ठाक नहीं है। संप्रग सरकार के दो साल पूरे होने पर आयोजित भोज का त्रणमूल ने अघोषित तौर पर बायकाट कर दिया। टीएमसी के सभी मत्री उस दिन राजधानी दिल्ली में थे, पर सुदीप बंदोपाध्याय को छोड़कर सभी ने इस भोज में जाना उचित नहीं समझा। माना जा रहा है कि जिस तरह सोनिया गांधी द्वारा ममता बनर्जी के शपथ ग्रहण का बहिष्कार किया था उसी तर्ज पर ममता ने कांग्रेस के गाल पर करारा तमाचा मारा है। यद्यपि मीडिया में इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं आया पर कांग्रेस के प्रबंधक इस बात को अच्छी तरह समझ चुके हैं। ममता का खौफ पार्टी पर भी इस कदर है कि रेल मंत्री का प्रभार पाने वाले मुकुल राय ने जब पदभार ग्रहण किया तब उन्हें ममता का कमरा ही मिला और ममता की कुर्सी पर जब बैठने की बारी आई तो उनके मंुह से बरबस ही निकल पड़ा -‘‘न बाबा न, आमी जोतो खुद दीदी आमा के बोलबे न आउरा आमी कैबिनेट पाबो न और उपेरे बोसबो न‘‘ अर्थात जब तक दीदी नहीं कहेंगी और कैबनेट मंत्री नहीं बनूंगा उस पर बैठूंगा नहीं।

 

कांग्रेस की बोलती बंद की अण्णा ने

काले धन, भ्रष्टाचार और लोकपाल को लेकर देश में तूफान मचा हुआ है। बाबा रामदेव ने एक सिरे पर मोर्चा संभाला था, तो दूसरे सिरे पर अण्णा हजारे बेटिंग को उतरे थे। कांग्रेस ने सधे कदमों से बाबा रामदेव को तो मीडिया की सुर्खियों से बाहर ही कर दिया। अब बाबा रामदेव खबरों से बाहर होकर बस अपने सहयोगी नेपाली मूल के आचार्य बाल किसन के स्वामित्व वाले आस्था चेनल पर ही दिख रहे हैं। रही बात अण्णा हजारे की तो अण्णा का पलड़ा बेहद भारी दिख रहा है। हाल ही में एक समाचार चेनल ने अपने स्टूडियो में अण्णा और केजरीवाल को बुलाया, साथ ही लाईव रखा कांग्रेस के नेताओ को। अण्णा ने अपनी सादगी के साथ कांग्रेस के नेताओं को धोकर रख दिया। समूचे देश ने देखा कि कांग्रेस के नेता किस कदर झूठ बोलने पर आमादा हो रहे थे। भाई दीपक चौरसिया ने बड़ी ही सफाई के साथ पूरा प्रोग्राम संचालित किया। अंत में हर किसी की जुबान पर आ गया था कि अण्णा ने आखिर बंद ही कर दी भ्रष्टाचार में आकण्ठ डूबी सवा सौ साल पुरानी और देश पर आधी सदी से ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस की बोलती।

 

च्यूईंग गम से मचा जबर्दस्त बवाल!

वित्त मंत्री के कार्यालय में डेढ़ दर्जन स्थानों पर गोंद जैसा चिपचिपा पदार्थ अर्थात च्यूईंग गम का मिलना देश के ताकतवर और महफूज वित्त मंत्रालय की सुरक्षा में सेंध के सवालिया निशान छोड़ गया है। सूत्रों की मानें तो उप प्रधानमंत्री बनने की तमन्ना मन में पालने वाले वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने पिछले साल सात सितम्बर को वजीरे आजम को पत्र लिखकर इसकी गोपनीय जांच करवाने का आग्रह किया था। इंटेलीजेंस ब्यूरो को जांच में कुछ नहीं मिला। जांच में ये च्यूईंग गम काफी पुराने पाए गए। इससे साफ है कि सरकारी कार्यालयों में साफ सफाई सतही तौर पर ही की जाती है। दूसरी बात यह कि आजकल तम्बाखू खाने और पीने (बिड़ी सिगरेट आदि) का विकल्प निकोटिन युक्त च्यूईंग गम आ गया है। लोग धूम्रपान करने के बजाए जेब में इन नशीली च्यूईंग गम को रखते हैं। सामान्य च्यूईंग गम की तरह कुछ देर में ही ये बेस्वाद हो जाती हैं तब इन्हें थूककर दूसरी चबाने का दिल करता है। कहा जा रहा है कि आला अफसरान ही इस तरह की च्यूईंग गम के बेस्वाद होने पर उसे टेबिल के नीचे चिपका दिया करते होंगे और फिर मच गया बवाल। वैसे कुछ मंत्रियों के मुंह सदा ही चलते दिखते हैं इस तरह की नशीली च्यूईंग गम के कारण!

 

मोम की तासीर परख रहीं हैं कोनिमोझी

द्रमुक सांसद कोनिमोझी तिहाड़ जेल में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में बंद हैं। जेल की सलाखों के पीछे वे अब तक का अपना समय साहित्य पढ़ने में बिता रहीं थीं। उनकी सुरक्षा के मद्देनजर उनसे मिलने आने वाले लोगों में से कुछ ही लोगों को तिहाड़ जेल प्रशासन द्वारा मिलने की अनुमति दी जा रही है। जेल की चारदीवारी अच्छे अच्छों के कस बल ढीले कर देती है यह बात हर कोई जानता है। इन दिनों कोनिमोझी जेल के अंदर खाली समय में अन्य महिला कैदियों की तरह मोमबत्ती बनाना सीख रहीं हैं। जेल के अंदर कैदियों को प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि रिहाई के बाद वे इस फन का उपयोग कर सम्मान के साथ जीवन यापन कर सकें। कोनिमोझी के पास आकूत दौलत होने की खबरें हैं, इस लिहाज से वे मोमबत्ती बनाने में तो कतई दिलचस्पी नहीं ले रही होंगी। यह हो सकता है कि वे मोम की तासीर को परख रही हों।

 

आदिवासी विरोधी कांग्रेस!

भले ही कांग्रेस द्वारा आदिवासियों के हितों को साधने के लाख दावे किए जाएं किन्तु जमीनी हकीकत कुछ और बयां करती है। मध्य प्रदेश के महाकौशल और सतपुड़ा क्षेत्र का नब्बे प्रतिशत हिस्सा आदिवासी बाहुल्य है। इस हिस्से में मण्डला को छिंदवाड़ा और जबलपुर को बालाघाट से रेल मार्ग से जोड़ने के लिए अमान परिवर्तन के काम को केंद्रीय रेल मंत्रालय ने हरी झंडी दे दी है। महाकौशल का नेतृत्व कांग्रेस के मंत्री कमल नाथ के सशक्त हाथों में है। 2000 से आरंभ हुई बालाघाट जबलपुर आमन परिवर्तन की योजना में फच्चर फंसा दिया गया है। मार्ग में बाघ आ गए हैं। यही स्थिति मण्डला से छिंदवाड़ा रेल परियोजना में होने वाला है। इसके पहले उत्तर दक्षिण फोरलेन गलियारे में धमाल मचा चुके हैं बाघ। मजे की बात तो यह है कि यह बाघ इतना होशियार है कि यह कमल नाथ की कर्मभूमि छिंदवाड़ा जिले को छूता भी नहीं है। कांग्रेसनीत केंद्र सरकार आदिवासियों को न तो सड़क से और न ही रेल मार्ग से जोड़ने की इच्छुक दिख रही है। मामले को अब राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के हवाले कर दिया गया है।

 

अब गैस घोटाले में फंसी कांग्रेस

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की कांग्रेसनीत सरकार की दूसरी पारी किसी अशुभ महूर्त में ही आरंभ हुई है, यही कारण है कि एक के बाद एक सरकार के घपले और घोटाले उजागर होते जा रहे हैं। टूजी, कामन वेल्थ जैसे बड़े घोटालों के सदमे से अभी कांग्रेस उबरी नहीं कि उस पर अब गैस घोटाले के छींटे पड़ गए हैं। कैग ने अपने प्रतिवेदन में तेल और गैस अनुबंधों में निजी कंपनियों को अनुचित फायदा पहुंचाकर राजकोष में सेंध लगाने का आरोप लगाया है। यह घोटाला अब तक के घोटालों में सबसे बड़ा बताया जा रहा है। मीडिया को संबोधित करने वाले मंत्री समूह ने भी इस मामले में चुप्पी साध ली है। चारों तरफ से घपलों घोटालों और भ्रष्टाचार से घिरे प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह बुरी तरह उलझकर रह गए हैं। कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी और युवराज राहुल गांधी ने इस मामले में अपना मुंह सिल कर रखा हुआ है। ‘कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ‘ वाला जुमला अब ‘कांग्रेस का हाथ आम आदमी की गर्दन पर‘ के मानिंद चरितार्थ होता दिख रहा है।

 

शिव ने ली राहत की सांस

भाजपा में वापसी के बाद पहली मर्तबा मध्य प्रदेश आईं उमा भारती के ढीले पड़े तेवरों को देखकर सूबे के निजाम शिवराज सिंह चौहान ने राहत की सांस ली हैै। मध्य प्रदेश आईं उमा भारती को लेकर भाजपा पूरी तरह चाक चौबंद रही। दिल्ली में बैठे उमा विरोधी भी उनके एक एक कदम और वक्तव्यों पर नजरंे गड़ाए थे। उमा ने बहुत ही नपे तुले शब्दों का प्रयोग कर यह जरूर कह दिया कि उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी थी, उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया था। कांग्रेस महासचिव राजा दिग्विजय सिंह के साथ उनके तल्ख रिश्ते जगजाहिर हैं। दिग्गी राजा को आड़े हाथों लेते हुए उमा ने कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी को वाहन तो दिग्गी को उनकी स्टेपनी करार दे दिया। कांग्रेस और भाजपाईयों द्वारा उमा के इस वक्तव्य के निहितार्थ ढूंढे जा रहे हैं कि उमा की नजरों में राहुल गांधी की औकात किस गाड़ी की तरह है?

 

बुढ्ढा होगा तेरा बाप, मैं तो बेटे का दादा बनूंगा!

सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ जो भी घटता है वह खबर बन जाता है। चाहे मुंबई के आतंकी हमले के बाद उन्हें नींद का न आना हो या कुली फिल्म में पुनीत इस्सर के हाथों घायल होना। इन दिनों सोशल नेटवर्किंग वेब साईट पर उनका ट्वीट कि एशवर्या मां बनने वाली हैं, के चलते वे चर्चाओं में हैं। हाल ही में बुढ्ढा होगा तेरा बाप के प्रोमो में वे इसी बात को दोहराते दिखते हैं, फिर अचानक ही अभिषेक के पिता बनने की खबर। बिग बी के प्रशंसकों के पांव तो जमीन पर ही नहीं पड़ रहे हैं। चेनल्स पर बिग बी भी इस बात की पुष्टि करते दिखते हैं। किसी का ध्यान इस ओर नहीं गया कि बिग बी चाहते हैं कि उनका वंश आगे बढ़े सो वे कहते दिखते हैं कि हमने एश्वर्य से कहा कि बेटा पैदा करो। हजारों लाखों लोगों के चहेते और पयोनियर अमिताभ बच्चन खुद ही जब बेटा और बेटी में फर्क जतलाकर बेटा पैदा करने की अपील सार्वजनिक तौर पर करेंगे तो भला फिर सरकार के बेटी बचाओ अभियान पर पलीता तो लगना ही है।

 

अण्णा और रामदेव मामले में गांधी परिवार की चुप्पी आश्चर्यजनक!

पिछले दो माहों से हाट टापिक है अण्णा हजारे और बाबा रामदेव का आंदोलन। पुलिस ने बर्बरता के साथ दिल्ली के रामलीला मैदान में बाबा रामदेव के समर्थकों को खदेड़ा। कमोबेश हर समाचार चेनल ने इसे लाईव दिखाया। सुबह होते ही इलेक्ट्रानिक मीडिया के सुर बदल गए थे। रात की कहानी के बाद बाबा रामदेव का स्त्रीवेश धारण कर भागना ही प्रमुखता पा रहा था। इस मामले में भाजपा ने भी रामदेव के सुर में सुर मिलाया पर कंधे से कंधा नहीं मिला सकी भाजपा। इसलिए भाजपानीत उत्तराखण्ड सरकार के राज में बाबा रामदेव का अनशन तुड़वाकर उन्हें हाशिए पर ढकेल दिया गया। समूचे मामले में कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी और युवराज राहुल गांधी की चुप्पी संदिग्ध ही लग रही है। अगर राहुल को कल देश की बागडोर संभालना है (जैसा कांग्रेस को लग रहा है) तो निश्चित तौर पर इतने संगीन मामले में उन्हें संज्ञान अवश्य ही लेना था, पर क्या किया जा सकता है, दोनों ही के बारे में जगजाहिर है -‘‘जितनी चाबी भरी राम ने, उतना चले खिलौना . . . ।‘‘

 

प्राचार्य मांग रहे भीख!

झारखण्ड में एंग्लो इंडियन बाहुल्य गांव है मैक्लुस्कीगंज। इस गांव में ब्रितानी और ऑस्ट्रेलियन लोगों की खासी तादाद है जो आजादी के बाद वापस अपने देश जाने के बजाए हिन्दुस्तान की संस्कृति में ही रच बस गए। रांची जिले के इस गांव में आस्ट्रेलिया मूल के एक व्यक्ति डी.आर.कैमरून ने अपनी संपत्ति में शामिल गेस्ट हाउस और बंग्ला एक पूंजीपति जगदीश पांडेय को इस शर्त पर बेचा था कि पाण्डेय द्वारा कैमरून को एक कमरा आजीवन निशुल्क रहने के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। बाद में संपत्ति के लालच में जगदीश पाण्डेय ने एक बाथरूम में उनका आशियाना बना दिया। बाद में वे वहां से बेदखल कर दिए गए। भटकते भटकते कैमरून कोलकता जा पहुंचे। लोगों के आश्चर्य का तब ठिकाना नहीं रहा जब लोगों ने उन्हें सैंट थामस स्कूल के सामने भीख मांगते देखा। दरअसल किसी जमाने में कैमरून इस स्कूल के प्राचार्य हुआ करते थे। वक्त का फेर और मुकद्दर किसे कब कहां किस हाल में पहुंचा दे कहा नहीं जा सकता है।

 

पुच्छल तारा

कांग्रेस के महासचिव राजा दिग्विजय सिंह सदा ही सुर्खियों में बने रहते हैं अपनी बयानबाजी के लिए। कांग्रेस के इन महासचिव के बारे में मजाक से युक्त एक पर्चा डाक से प्राप्त हुआ है। फेकिंग न्यूज डॉट काम से साभार बताने वाला यह पर्चा लिखता है कि वोडा फोन कंपनी ने दिग्विजय सिंह के परफारमेंस से प्रभावित होकर उन्हे अपना ‘ब्रांड एम्बेसेडर‘ और ‘कस्टमर केयर हेड‘ बनाने का निर्णय लिया है। कंपनी के सीईओ ने एक पत्रकार वार्ता में इसके तीन कारण गिनाए हैं। पहला तो यह दिग्विजय सिंह अपनी ‘क्षमताओं‘ से हमारे शिकायती ग्राहकों और प्रतिद्वंदी कंपनी को ‘ठग‘ घोषित कर देंगे। दूसरा दिग्विजय सिंह की हरकतें हमारे वर्तमान और पूर्व आईकान की हरकतों से काफी मेल खाती हैं। कंपनी का ‘पब‘ मालिक के पीछे पीछे चलता है, उसी तरह दिग्विजय सिंह भी राहुल गांधी के पीछे पीछे हर जगह चले जाते हैं। जिस तरह नया ब्राण्ड आईकान अण्डाकार चेहरे वाले ‘जूजू‘ की तरह दिग्विजय क्या बोलते हैं किसी को समझ में नहीं आता है। तीसरा फोन से दिग्विजय सिंह का पवित्र रिश्ता है। दिग्विजय सिंह को लगातार ही फोन आते रहते हैं, कभी हेमन्त करकरे का तो कभी किसी और का. . .। सीईओ ने दावा किया है कि एसे में राजा दिग्विजय सिंह वोडाफोन कंपनी को नई उचाईयों तक अवश्य ले जाएंगे।

 

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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