/निर्मल बाबा के अंधभक्तों ने बैतूल में ताप्ती को किया प्रदूषित, मंदिरो में लगाया शिवलिंगो का अम्बार

निर्मल बाबा के अंधभक्तों ने बैतूल में ताप्ती को किया प्रदूषित, मंदिरो में लगाया शिवलिंगो का अम्बार

ताप्तीचंल में एक बार फिर अंधविश्वास एवं आस्था की तथाकथित बयार चलने से बैंको से दस रूपए की गड्ढी, दुकानो से काला पर्स का संकट इस तरह गहराया है कि जिले में काला पर्स या दस रूपए की गड्ढी मांगने वाला भी संदेह की नजर से देखा जाने लगा है। पूरे जिले में कुछ टीवी चैनलो पर हो रहे निर्मल बाबा के प्रतिदिन प्रवचन सुनने के बाद सबसे बड़ा सकंट नदियों के संरक्षण को लेकर आ खड़ा हुआ है। 

सूर्यपुत्री ताप्ती नदी से लेकर जिले की अन्य नदियों , पोखरो , तालाबों के पास इन दिनो देवी – देवताओं की भारी संख्या में फोटो , कलैण्डर तथा शिवलिंगो एवं मूर्तियों का ढेर सा संग्रह हो गया है। बरसात आने में अब काफर दिन है लेकिन ऐसे समय में पशु – पक्षियों तथा आत इंसान के लिए पीने योग्य नदियों के संग्रहित पानी में मूर्तियों एवं फोटो के विसर्जन से जल स्तर कम होने के साथ नदियों में गहरा प्रदूषण का खतरा उत्पन्न हो गया है।

राज्य शासन से पंजीकृत बैतूल जिला पर्यावरण संरक्षण समिति एवं मां ताप्ती जागृति मंच ने बैतूल जिले के आस्थावान एवं श्रद्धावान लोगो से निवेदन किया है कि वे भावना में बह कर नदियों के संग्रहित पानी में मूर्तिया एवं देवी – देवताओं की फोटो को विर्सजित न करे ऐसा करने से नदियों की मछलियों से लेकर आम जनमानस तक को प्रदुषण का खतरा काफी नुकसान देह साबित होगा। अभी कुछ दिनो से गायत्री परिवार ताप्ती के तटो पर स्वच्छता अभियान चला रहा है। ऐसे में ताप्ती एवं अन्य नदियों में बरसात के पूर्व फोटो एवं मुर्तियों का अम्बार संकट ला सकता है।

मंच ने ऐसे जागरूक को भी सामने आने का आग्रह किया है जो नदियों के समग्र विकास एवं जल संरक्षण की बाते करते है। पर्यावरण संरक्षण समिति के जिला संयोजक एवं पर्यावरण वाहिनी के पूर्व सदस्य रामकिशोर पंवार ने जिले की माचना, संपना, तवा , पूर्णा , बेल , सहित एक दर्जन से अधिक छोटी – बड़ी नदियों के घटते जल प्रवाह को ध्यान में रख कर ऐसा सामग्री का नदियों में बहाव पर रोक लगाने की जिला प्रशासन से भी मांग की है जो आने वाले समय में नदियों के लिए संकट साबित होगी।

इधर ताप्ती जागृति मंच ने भी पूरे मामले को लेकर कोई भी हिन्दुवादी संगठन एवं संस्थाओं के समाज में फैल रहे अंधश्रद्धा से उपजी मानसकिता से लोगो को न उबारने एवं नदियों के संरक्षण का दंभ भरने वाले संगठन इस समय फैली आस्था एवं अंघश्रद्धा की बयार से आए संकट से उबारने के लिए सामने नहीं आने पर भी दुख व्यक्त किया है। श्री पंवार ने निर्मल बाबा से भी आग्रह किया है कि उनकी कथित सीख से नदियों के निर्मल होने पर मंडराने वाले खतरे के प्रति अपने श्रद्धालु भक्तो को सचेत करने की अपील की है। श्री पंवार ने फेसबुक के माध्यम से निर्मल बाबा एवं उनके पूरे संगठन को भी अपनी चिंता से अवगत कराया है। (बैतूल से रामकिशोर पंवार की रिपोर्ट)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.