/ट्रक से शिक़ायत नहीं, लेकिन ‘दलाल’ के खिलाफ़ मुकद्दमा: कहीं खुंदक मिटाने का खेल तो नही?

ट्रक से शिक़ायत नहीं, लेकिन ‘दलाल’ के खिलाफ़ मुकद्दमा: कहीं खुंदक मिटाने का खेल तो नही?

सेना के स्वर्णिम इतिहास में शायद अबतक के सबसे विवादास्पद प्रमुख वीके सिंह ने जाते-जाते भी एक मिसाइल छोड़ ही दिया। पिछले कई मौकों की तरह इस बार भी उन्होंने ये मिसाइल किसी लॉन्चर की बजाय मीडिया के टीवी कैमरों के जरिए अखबारों के इंधन से छोड़ा है। रक्षा प्रमुख ने इस बार भी निशाना सीधा नहीं साधा है। उनकी मिसाइल के निशाने पर बेशक एक पूर्व सेना अधिकारी रहे हों, लेकिन उसकी ज़द में सेना के कई अधिकारी, एक नामी-गिरामी विदेशी कंपनी और उसके तौर-तरीके भी आ गए हैं।

पुरानी शिकायत: तेजेंद्र सिंह और सेनाध्यक्ष वीके सिंह

दरअसल जिस रक्षा सौदे में दलाली के खेल की तरफ वी के सिंह इशारा कर रहे हैं उसमें सेना के मौजूदा और रिटायर्ड अधिकारी भी शामिल हैं। सेनाध्यक्ष के निशाने पर सबसे पहले हैं रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल तेजिन्दर सिंह। हाल ही में सेना ने एक प्रेस रिलीज़ में कहा था कि सिंह कुछ रिटायर्ड और सेवारत अधिकारियों के साथ मिल कर मीडिया के जरिए रक्षा मंत्रालय और सेना में अस्थिरता फैलाना चाहते हैं। हालांकि उस रिलीज़ में इस घूस के मामले का भी जिक्र था, लेकिन तब मीडिया ने इसे तवज्ज़ो नहीं दी थी क्योंकि यह साफ नहीं एक संकेत के तौर पर कहा गया था। ये रिलीज इसी महीने की 5 तारीख को जारी हुई थी जब सेना पर रक्षा मंत्री सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की जासूसी का आरोप लगा था।

सेना की प्रेस रिलीज में लिखा है कि जासूसी से जुडी़ ये कहानी रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल तेजिन्दर सिंह ने फैलाई है जो डिफेंस इंटेलिजेंस के महानिदेशक थे और जिनसे ऑफ द एयर मॉनिटरिंग सिस्टम की खरीद के सिलसिले में पूछताछ हो चुकी है। उन्होंने ये खरीद बिना तकनीकी कमेटी की इजाजत के की थी। इस अफसर को आदर्श सोसायटी में भी फ्लैट मिला था और इसने टाटारा एंड वेक्ट्रा लिमिटेड की तरफ से घूस देने की भी कोशिश की थी। इनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी।

सेना की इस रिलीज़ से साफ है कि लेफ्टिनेंट जनरल तेजिंदर सिंह ने घूस देने की कोशिश की थी। सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर क्यों एक के बाद एक तीन मामलों में उनका नाम आ रहा है? आखिर क्या वजह है कि उनपर ये आरोप जनरल वी के सिंह के कार्यकाल में लग रहे हैं?
टाटारा एंड वेक्ट्रा चेक रिपब्लिक की एक कंपनी है जिसका प्लांट कर्नाटक के होसुर में है। ये कंपनी भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड यानी बीईएमएल के लिए ट्रक बनाती है। इन ट्रकों का इस्तेमाल सेना में होता है। सेना प्रमुख ने कहा है कि उन्हें घूस की पेशकश ट्रकों की सप्लाई अप्रूव करने के लिए ही की गई थी और सेना की ही प्रेस रिलीज इस मामले में डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के पूर्व महानिदेशक तेजिंदर सिंह को कठघरे में खड़ा करती है यानि दोनों के तार जुड़ रहे हैं।

वैसे यहां ये भी जानना जरूरी है कि डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी का महानिदेशक सीधे रक्षा मंत्री के तहत काम करता है और सेना प्रमुख को रिपोर्ट नहीं करता। यही वजह है कि सेना की तरफ से लगाए गए आरोपों को लेफ्टिनेंट जनरल तेजिंदर सिंह सिरे से खारिज कर रहे हैं। तेजिंदर सिंह का कहना है कि वो अपने ऊपर लगे आरोपों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।

वैसे सेना प्रमुख जनरल वी. के. सिंह के आरोप के बीच सरकार ने इस वक्त सेना द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे टाटारा ट्रक की गुणवत्ता को लेकर किसी तरह की शिकायत से इनकार किया है। रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव रश्मि वर्मा ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि हमें टाटारा ट्रक की गुणवत्ता को लेकर कोई शिकायत नहीं मिली

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.