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सरकार और सेना में कोई फूट नहीं, सब मीडिया का किया-धरा है :जनरल सिंह

By   /  March 30, 2012  /  1 Comment

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आखिरकार जनरल वी के सिंह ने सरकार के आगे घुटने टोक ही दिए। शुक्रवार को रक्षामंत्री  कहा कि सेना और सरकार के बीच कोई फ़ूट नहीं है और कुछ शरारती तत्व ऐसा करने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने सीबीआई को ये बताया कि उन्हें घूस देने की पेशकश की गई, लेकिन कोई सुबूत या डिटेल नही दिया।

‘‘मैं देश की सेवा करने और सेना की सत्यनिष्ठा की सुरक्षा करने के कर्तव्य से आबद्ध हूं। प्रधानमंत्री को भेजे पत्र का लीक होना, चुनिंदा दस्तावेज के लीक होने का परिणाम है। तुच्छ और अनभिज्ञ टिप्पणी सैन्य पर नहीं की जानी चाहिए।’’ जनरल का कहना था।

पिछले कुछ दिनों के अपने कडे रूख से अचानक पटलते हुए सेना प्रमुख जनरल वी के सिंह ने कहा कि कुछ ‘शरारती तत्व’ उनके और रक्षा मंत्री ए के एंटनी के बीच ‘फ़ूट’  दिखाने का प्रयास कर रहे हैं और उन्होंने स्पष्ट किया कि वह देश सेवा के अपने कर्तव्य से बंधे हुए हैं। अपनी टिप्पणियों और कदमों को लेकर आलोचनाओं का शिकार होने और बर्खास्तगी की मांग का सामना कर रहे जनरल सिंह ने आज यहां एक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया और कहा कि उनके और एंटनी के बीच फ़ूट की खबर ‘असत्य’ है और उस पर ध्यान दिये जाने की जरूरत नहीं है।

जनरल सिंह ने कहा कि मीडिया की ओर से हर मुद्दे को सरकार और सेना प्रमुख के बीच संघर्ष के रूप में पेश करना ‘गुमराह करने वाली बात’ है. पिछले कुछ दिनों से गरमाये माहौल को और ठंडा करने की सेना प्रमुख की कोशिश ऐसे समय आयी है जब महज एक दिन पहले रक्षामंत्री ने तीनों अंगों के प्रमुखों पर सरकार का विश्वास व्यक्त किया था।

एंटनी ने उन लोगों को अधिकतम दंड दिलाने की प्रतिबद्धता भी जाहिर की जिनका प्रधानमंत्री को भेजी जनरल सिंह की चिट्ठी के लीक कराने के पीछे हाथ है। इस चिट्ठी में सेना प्रमुख ने रक्षा तैयारियों की कमियों का जिक्र किया था।

उधर सीबीआई के सूत्रों ने खबर दी है कि जनरल सिंह ने यो तो कहा कि उन्हें ट्रक खरीद में एक लॉबिस्ट ने घूस देने की पेशकश की, लेकिन फिलहाल उन्होंने किसी का नाम या पेशकश के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।

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  • Published: 6 years ago on March 30, 2012
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  • Last Modified: April 5, 2012 @ 11:46 pm
  • Filed Under: देश

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. Ratnesh Soni says:

    यह तो मिडिया की छबि खराब करने का प्रयास प्रतीत हो रहा है, पहले किसी मुद्दे को मिडिया का सहारा लेकर पूरी तरह सुर्खियों में आने के बाद, मिडिया पर आरोप लगाना तथा पीछे के रास्ते से जिस पर आरोप लगाया गया हो उसके साथ हो जाना लोगों का फैशन बन गया है। मिडिया को अब संभलने की आवश्यकता है, लोग इस्तेमाल करके मिडिया को ही कटघरे में खड़ा करने का काम करने लगे हैं।.

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