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अभिनेता जाकिर हुसैन बने दारा शिकोह, दूरदर्शन पर उपनिषद गंगा में दिखा रहे हैं तेवर

By   /  April 5, 2012  /  No Comments

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इन दिनों दूरदर्शन पर हर रविवार सुबह 10 बजे प्रसारित हो रहा है धारावाहिक ‘उपनिषद गंगा’. चिन्मय मिशन द्वारा निर्मित व डॉ चन्द्रप्रकाश दिव्वेदी द्वारा निर्देशित इस धारावाहिक ‘उपनिषद गंगा’ में अलग — अलग कहानियाँ दिखाई जा रही हैं अगले रविवार यानि 8 अप्रैल को अभिनेता जाकिर हुसैन दारा शिकोह की भूमिका में दिखाई देंगे.

“अभी तक दारा शिकोह को बहुत सारे लोग सिर्फ औरंगजेब के बड़े भाई के रूप में ही जानते थे लेकिन इस धारावाहिक को देखने के बाद उन्हें पता चलेगा कि वो कितना गुणी था, कितना काबिल था. इसी ने अपने गुरु मिया मीर के कहने पर  ‘उपनिषद’ का संस्कृत से पर्शियन भाषा में अनुवाद किया था” कहते हैं अभिनेता जाकिर हुसैन.

जाकिर हुसैन ने यूं तो रत्नाकर, अघोरी बाबा अवदूत और यक्ष की भूमिका भी अभिनीत  की है ‘उपनिषद गंगा’ में, लेकिन उनका सबसे प्रिय चरित्र है दारा शिकोह. इस चरित्र को अभिनीत करते हुए उन्हें बहुत ही मज़ा आया. यह कहना है खुद जाकिर का. जो की कॉस्टयूम डिजायनर, थियेटर कलाकार, शास्त्रीय गायक, ताई कामांडो में ग्रीन बेल्ट धारक, एक कवि और भी बहुत कुछ हैं इन्होने एक हसीना थी, सरकार, अजब प्रेम की गज़ब कहानी, अल्लाह के बंदे, डरना जरुरी है, कांट्रेक्ट, दरवाज़ा बंद रखो, फूल एंड फायनल, जेम्स, जोनी गद्दार, शबरी, फूंक, शार्गिर्द व पान सिंह तोमर आदि अनेकों फिल्मों में काम किया है. (प्रेस-विज्ञप्ति)

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  • Published: 6 years ago on April 5, 2012
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  • Last Modified: April 5, 2012 @ 9:42 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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