Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

एम जे अकबर और शेखर गुप्ता के पाटों में पिस रहे हैं जनरल वीके सिंह?

By   /  April 6, 2012  /  1 Comment

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

16-17 जनवरी की रात कथित तौर पर सेना की दो टुकड़ियों के दिल्ली की ओर आने से केंद्र सरकार में मची खलबली की खबर के मास्टर माइंड कौन हैं इसपर बहस कितनी भी चले, लेकिन दो अखबारों की आपसी खुन्नस खुल के सामने आ गई है। एमजे अकबर के अंग्रेजी अखबार ‘द संडे गार्जियन’ ने सूत्रों के हवाले से यह दावा किया है कि ये खबर प्लांटेड है और इसे छपवाने में सरकार में ही शामिल एक मंत्री हैं। उधर इंडियन एक्सप्रेस ने कहा है कि रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति रक्षा सचिव की सफाई से संतुष्ट नहीं है। इस बीच, रक्षा मामलों की स्थायी समिति के दो सदस्यों-नरेश गुजराल और असादुद्दीन ओवेसी ने सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह को तलब करने की मांग की है।

संडे गार्जियन ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि मंत्री अपने करीबी रिश्तेदार के जरिए रक्षा से जुड़े सामानों की खरीद फरोख्त करने वाली लॉबी से जुड़े हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये लॉबी सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह को हटाने पर आमादा है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘बुधवार को छपी खबर के पीछे भी यही मंत्री है। मंत्री को उम्मीद थी कि खबर छपने के बाद राजनीतिक बिरादरी जनरल वीके सिंह के खिलाफ हो जाएगी। साथ ही खबर से यह उम्मीद भी थी कि राजनीतिक बिरादरी पाकिस्तान जैसे हालात बनने की आशंका को देखते हुए एकजुट हो जाएंगे।’

लेकिन अखबार ने आगे लिखा, ‘सवालों के घेरे में मौजूद मंत्री ने प्रधानमंत्री और मनमोहन सिंह और रक्षा मंत्री की तरफ से आए जवाब को लेकर गलत अनुमान लगा लिया। मंत्री को लगता था कि सेना प्रमुख से तनावपूर्ण रिश्ते को देखते हुए प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री खबर पर टिप्पणी करने से इनकार कर देंगे। लेकिन वास्तविकता में दोनों सामने आए और खबर का पुरजोर खंडन किया।’

दूसरी तरफ, इस खबर को छापने वाले अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने गुरुवार को प्रकाशित अपनी रिपोर्टमें कहा है कि रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति रक्षा सचिव की सफाई से संतुष्ट नहीं है। इस बीच, रक्षा मामलों की स्थायी समिति के दो सदस्यों-नरेश गुजराल और असादुद्दीन ओवेसी ने सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह को तलब करने की मांग की है।

नरेश गुजराल संसदीय समिति के अध्यक्ष सतपाल महाराज को चिट्ठी लिखने की तैयारी में हैं। इस चिट्ठी में गुजराल यह मांग कर सकते हैं कि जनरल सिंह से इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट पर सफाई मांगे जाने के अलावा देश की रक्षा तैयारियों पर प्रधानमंत्री को लिखी गई चिट्ठी के ‘लीक’ होने पर भी उनका पक्ष जाना चाहिए।

संसदीय समिति के सामने पेश हुए रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा ने उन आरोपों का खंडन किया है जिसमें कहा जा रहा है कि सेना की दो टुकड़ियों के दिल्ली की तरफ आने को लेकर सरकार ने उन्हें मलेशिया दौरे को बीच में छोड़कर वापस आने को कहा था। शर्मा ने सफाई दी कि वे इसलिए भारत लौटे थे कि अगले दिन सेना प्रमुख के उम्र विवाद का मामला सुप्रीम कोर्ट में सुना जाने वाला था।

लेकिन शशिकांत शर्मा बैठक के बाद संसदीय समिति के एक सदस्य ने कहा, ‘वह (रक्षा सचिव) वकील नहीं है। ऐसे वापस लौटने का क्या मतलब है?’ खबर में बताया गया है कि ओवेसी ने रक्षा सचिव और तीनों सेनाओं के उप प्रमुखों से पूछा कि अगर सेना की टुकड़ियों की मूवमेंट रूटीन थी तो उन्हें वापस क्यों भेजा गया? समिति में शामिल सदस्यों ने सेना और रक्षा मंत्रालय से संसदीय समिति की 9 अप्रैल की अगली बैठक में पूरे मामले पर सफाई मांगी है। समिति में शामिल एक कांग्रेसी सांसद ने कहा, ‘हमने कई सवाल पूछे। लेकिन रक्षा सचिव ने कहा कि वह किसी अख़बार की खबर प्रतिक्रिया नहीं दे सकते हैं, लेकिन यह जवाब नहीं है।’

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. Agar yes khabar satya hai to ati nindniya hai tatha patrkarita ke sindhanto ke khilaf bhi ha.Dono hi varisth patrkar hai patrkarita ki kaya maryada hoti hai unhe maloom hona chahiye. Desh ke prati jimmedari bhi. Es khabar ka DESH ki 120 karod janta par kaya asar hoga ve acche se jante honge.Netao par to ham aarop pratyarop aasani se laga lete hai.Es khabar se Desh ka mahol bigad jata to , kaun jimmedar hota? kaya yes patrkar jimmedari lete? Yes patrkarita nahi dhoka hai.Sidha sidha RASTRDROH hai , in par rastrdroh ka mukddma chalna chahiye.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

Manisa escort Tekirdağ escort Isparta escort Afyon escort Çanakkale escort Trabzon escort Van escort Yalova escort Kastamonu escort Kırklareli escort Burdur escort Aksaray escort Kars escort Manavgat escort Adıyaman escort Şanlıurfa escort Adana escort Adapazarı escort Afşin escort Adana mutlu son

You might also like...

सुजस प्रकाशन की आड़ में हेराफेरी..

Read More →
Eyyübiye escort Fatsa escort Kargı escort Karayazı escort Ereğli escort Şarkışla escort Gölyaka escort Pazar escort Kadirli escort Gediz escort Mazıdağı escort Erçiş escort Çınarcık escort Bornova escort Belek escort Ceyhan escort Kutahya mutlu son
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
WhatsApp chat
%d bloggers like this: