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बाबा जी के दरबार में बटोरिए किसिम-किसिम के नुस्खों से, कहीं भाग न जाए ‘किरपा’

By   /  April 7, 2012  /  38 Comments

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-महेंद्र श्रीवास्तव।।

भाई साधु संतो से तो मैं भी डरता हूं, इसलिए मैं पहले ही बोल देता हूं निर्मल बाबा के चरणों में मेरा और मेरे परिवार का कोटि कोटि प्रणाम। वैसे मैं जानता हूं कि साधु संत अगर आपको आशीर्वाद दें तो उसका एक बार फायदा आपको हो सकता है, पर वो चाहें कि आपको शाप देकर नष्ट कर दें तो ईश्वर ने अभी उन्हें ऐसी ताकत नहीं दी है। इसलिए ऐसे लोगों से ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन मेरा उद्देश्य सिर्फ लोगों को आगाह भर करना है, मैं किसी की भावना को आहत नहीं करना चाहता। चलिए आपको एक वाकया सुनाता हूं शायद आपकी समझ में खुद ही आ जाए।

पिछले दिनों मुझे लगभग 11 घंटे ट्रेन का सफर करना था, इसके लिए मैं रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म के बुक स्टाल पर खड़ा देख रहा था कि कोई हल्की फुल्की किताब ले लूं, जिससे रास्ता थोड़ा आसान हो जाए। बहुत नजर दौड़ाई तो मेरी निगाह एक किताब पर जा कर टिक गई। किताब का नाम था धन कमाने के 300 तरीके। मैने सोचा इसी किताब को ले लेते हैं इससे कुछ ज्ञान की बातें पता चलेंगी, साथ ही बिजिनेस के तौर तरीके सीखने को मिलेगें और सबसे बड़ी बात कि ट्रेन का सफर आसानी से कट जाएगा। लेकिन दोस्तों सफर आसानी से भले ना कटा हो पर जेब जरूर कट गई । 280 रुपये की इस किताब में माचिस, टूथपेस्ट, पालीथीन पैक, जूते की पालिस, मोमबत्ती, आलू चिप्स, पापड, मसाले के पैकेट तैयार करने जैसी बातें शामिल थीं। पूरी किताब पढ़ने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंचा धन कमाने का सबसे कारगर तरीका तो इसमें शामिल है ही नहीं, यानि मेरी नजर में धन कमाने के 300 तरीके वाली किताब छाप कर जितनी कमाई की गई है, किताब में शामिल तरीकों को अपना कर उसका आधा भी नहीं कमाया जा सकता।

बस जी भूमिका समझा दिया ना आपको, क्योंकि आजकल कुछ ऐसा ही कहानी चल रही है निर्मल बाबा के समागम यानि टीवी के लाफ्टर शो में। निर्मल बाबा की खास बात ये है कि उनके भक्तों की किसी भी तरह की समस्या हो, ये बाबा हर समस्या का समाधान वो पलक झपकते बता देते हैं। अब देखिए ना हम बीमार होते हैं तो डाक्टर के पास जाते हैं, पढाई लिखाई में कामयाब होने के लिए कोचिंग करते हैं, नौकरी पाने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की गंभीरता से तैयारी करते हैं, किसी ने मकान या जमीन पर कब्जा कर लिया तो पुलिस की मदद लेते हैं, दुर्घटना हो जाने पर जल्दी से जल्दी अस्पताल जाने की कोशिश करते हैं, बेटी की शादी तय नहीं होने पर दोस्तों और रिश्तेदारों की मदद लेते हैं, नौकरी में प्रमोशन हो इसके लिए अपने काम को और मन लगाकर करते हैं, व्यापारियों का कहीं पेमेंट फंस जाए तो तगादा और ज्यादा करते हैं, बाल झड़ने लगे तो कुछ दवाएं लेते हैं, सुंदरता बनाए रखने के लिए ब्यूटिशियन की मदद लेते हैं, बुढापे में चलने फिरने में तकलीफ ना हो तो व्यायाम और सुबह टहलने जाते हैं, लेकिन अब आपको ये सब करने की जरूरत नहीं है, बल्कि आप बिना देर किए चले आएं निर्मल बाबा के दरबार में।

बाबा के पास तीसरी आंख है, वो सामने आने वाले भक्त को 100 मीटर दूर से जान जाते हैं कि इसे क्या तकलीफ है और उसका इलाज क्या है। बाबा का मानना कि जीवन में अगर कुछ गड़बड़ होता है तो ईश्वर की कृपा आनी बंद हो जाती है और बाबा तीसरी आंख के जरिए बता देते हैं कि कृपा के रास्ते में कहां रुकावट है और इस रुकावट का इलाज क्या है। हालांकि बाबा कब क्या बोल दें, कोई भरोसा नहीं है। एक ओर तो वो खुद ही लोगों को बताते हैं कि पाखंड से दूर रहें। साधु संतों के ड्रामें में नहीं फंसना चाहिए, खुद पूजा करो, क्योंकि ईश्वर भावना देखते हैं, सच्चे मन से भगवान को याद करें तो कृपा खुद आ जाएगी। ये बात मैं नहीं कह रहा हूं, खुद निर्मल बाबा कहते हैं, फिर मेरी समझ में नहीं आता कि ये बाबा पाखंडी किसे बता रहे हैं। पाखंड की सारी बाते तो उनके समागम में होती हैं और ये ज्ञान की बाते किसे समझा रहे हैं।

अब देखिए दो दिन पहले निर्मल बाबा एक नवजवान भक्त से पूछ रहे थे – तुम अपनी कमीज़ की बटन कैसे खोलते हो जल्दी जल्दी या देर से। सकपकाया भक्त बोला कभी जल्दी तो कभी देर से भी। बाबा बोले आराम आराम से खोला करो। कृपा आनी शुरू हो जाएगी। अब भला ये भी कोई प्रश्न है? एक भक्त से उन्होंने पूछा बाल कहां कटवाते हो, भक्त बोला नाई से कटवा लेता हूं। बाबा बोले कभी पारर्लर जाने का मन नहीं होता, भक्त संकोच करते हुए बोला होता तो है, तो जाओ पारर्लर में एक बार बाल कटवा लो, कृपा आनी शुरू हो जाएगी। एक गरीब महिला कुछ गंभीर समस्याओं से घिरी हुई थी, उनके सामने आई, वो बाबा से कुछ कहती, उसके पहले बाबा ही बोल पड़े, अरे भाई तुम्हारे सामने से मुझे कढी चावल क्यों दिखाई दे रहा है। वो बोली मैने कल कढी चावल ही खाया था, बाबा क्या बोलते, कहा अकेले ही खाया तुमने। वो बोली नहीं पूरे परिवार ने खाया। हां यही तो गल्ती है तुमने किसी बाहर के लोगों को नहीं खिलाया, जाओ चार दूसरे लोगों को कढी चावल खिला देना, कृपा आनी शुरू हो जाएगी।

कुछ और वाकये का जिक्र करना जरूरी समझ रहा हूं। बाबा कहते हैं कि पूजा में भावना होनी चाहिए, लेकिन जब बिहार की एक महिला को देखते ही उन्होंने कहाकि तुम छठ पूजा करती हो। वो बोली हां बाबा करती हूं, बाबा ने कहा कितने रुपये का सूप इस्तेमाल करती हो, वो बोली दस बारह रुपये का। बाबा ने कहा बताओ दस बारह रुपये के सूप से भला कृपा कैसे आएगी, तुम 30 रुपये का सूप इस्तेमाल करो। कृपा आनी शुरू हो जाएगी। बात यहीं खत्म नही हुई। एक महिला भक्त को उन्होंने पहले समागम में बताया था कि शिव मंदर में दर्शन करना और कुछ चढावा जरूर चढाना। अब दोबारा समागम में आई उस महिला ने कहा कि मैं मंदिर कई और चढावा भी चढाया, लेकिन मेरी दिक्कत दूर नहीं हुई। बाबा बोले कितना पैसा चढ़ाया, उसने कहा कि 10 रुपये, बाबा ने फिर हंसते हुए कहा कि दस रुपये में कृपा कहां मिलती है, अब की 40 रुपये चढाना देखना कृपा आनी शुरू हो जाएगी।

अब देखिए इस महिला को बाबा ने ज्यादा पैसे चढाने का ज्ञान दिया, जबकि एक दूसरी महिला दिल्ली से उनके पास पहुंची, बाबा उसे देखते ही पहचान गए और पूछा शिव मंदिर में चढ़ावा चढ़ाया या नहीं। बोली हां बाबा चढा दिया। बाबा ने पूछा कितना चढ़ाया, वो बोली आपने 50 रुपये कहा था वो मैने चढ़ा दिया, और मंदिर परिसर में ही जो छोटे छोटे मंदिर थे, वहां दस पांच रुपये मैने चढ़ा दिया। बस बाबा को मौका मिल गया, बोले फिर कैसे कृपा आनी शुरू होगी, 50 कहा तो 50 ही चढ़ाना था ना, दूसरे मंदिर में क्यों चली गई। बस फिर जाओ.. और 50 ही चढ़ाना। क्या मुश्किल है, ज्यादा चढ़ा दो तो भी कृपा रुक जाती है, कम चढ़ाओ तो कृपा शुरू ही नहीं होती है। निर्मल बाबा ऐसा आप ही कर सकते हो, आपके चरणों में पूरे परिवार का कोटि कोटि प्रणाम।

एक भक्त को बाबा ने भैरो बाबा का दर्शन करने को कहा। वो भक्त माता वैष्णों देवी पहुंचा और वहां देवी के दर्शन के बाद और ऊपर चढ़ाई करके बाबा भैरोनाथ का दर्शन कर आया। बाद में फिर बाबा के पास पहुंचा और बताया कि मैने भैरो बाबा के दर्शन कर लिए, लेकिन कृपा तो फिर भी शुरू नहीं हुई। बाबा ने पूछा कहां दर्शन किए, वो बोला माता वैष्णों देवी वाले भैरो बाबा का। बाबा ने कहा कि यही गड़बड़ है, तुम्हें तो दिल्ली वाले भैरो बाबा का दर्शन करना था। अब बताओ जिस बाबा ने कृपा रोक रखी है, उनके दर्शन ना करके, इधर उधर भटकते रहोगे तो कृपा कैसे चालू होगी। भक्त बेचारा खामोश हो गया।

यहां मुझे एक कहानी याद आ रही है। एक आदमी बीबी से हर बात पर झगड़ा करता था। उसकी बीबी ने नाश्ते में एक दिन उबला अंडा दे दिया, तो पति ने बीबी को खूब गाली दी और कहा कि आमलेट खाने का मन था, और तुमने अंडे को उबाल दिया। अगले दिन बेचारी पत्नी ने अंडे का आमलेट बना दिया, तो फिर गाली सुनी। पति ने कहा आज तो उबला अंडा खाने का मन था। तुमने आमलेट बना दिया। तीसरे दिन बीबी ने सोचा एक अंडे को उबाल देती हूं और एक का आमलेट बना देती हू, इससे वो खुश हो जाएंगे। लेकिन नाश्ते के टेबिल पर बैठी पत्नी को उस दिन भी गाली सुननी पड़ी। पति बोला तुमसे कोई काम नहीं हो सकता, क्योंकि जिस अंडे को उबालना था, उसका तुमने आमलेट बना दिया और जिसका आमलेट बनाना था, उसे उबाल दिया। कहने का मतलब मैं नहीं समझाऊंगा। आप मुझे इतना बेवकूफ समझ रहे हैं क्या, कि निर्मल बाबा से सारे पंगे मैं ही लूंगा, कुछ चीजें आप अपने से भी तो समझ लो।

बहरहाल दोस्तों तीसरी आंखे क्या क्या चीजें देखतीं है, मैं तो ज्यादा नहीं जानता। पर परेशान हाल आदमी से ये पूछा जाए कि आपने मटके का पानी कब पिया, भक्त कहे कि मटका तो बाबा मैने कब देखा याद ही नहीं, फिर बाबा बोले कि याद करो, भक्त कहता है कि हां कुछ याद आ रहा है कहीं प्याऊ पर रखा देखा था। बाबा कहते है कि हां यही बात मैं याद दिलाना चाहता था, आप प्याऊ पर एक मटका दान दे आओ और उस मटके पानी खुद भी पियो और दूसरों को भी पिलाओ। एक दूसरे भक्त को बाबा कहते हैं कि आप के सामने मुझे सांप क्यो दिखाई दे रहा है। भक्त घबरा गया, बोला बाबा सांप से तो मैं बहुत डरता हूं। बाबा बोले तुमने सांप कब देखा, भक्त ने कहा मुझे याद नहीं कब देखा। बाबा बोले याद करो, बहुत जोर डालने पर उसने कहा एक सपेरे के पास कुछ दिन पहले देखा था। बस बाबा को मिल गया हथियार, बोले कुछ पैसे दिए थे सपेरे को, भक्त ने कहा नहीं पैसे तो नहीं दिए। बस वहीं से कृपा रुक रही है। अगली बार सपेरे को देखो तो पैसे चढ़ा देना, कृपा आनी शुरू हो जाएगी।

वैसे तो बाबा के किस्से खत्म होने वाले ही नहीं है, पर एक आखिरी किस्सा बताता हूं। एक भक्त को उन्होंने कहाकि आपके मन में बड़ी बड़ी इच्छाएं क्यों पैदा होती हैं ? बेचारा भक्त खामोश रहा। बाबा बोले आप कैसे चलते हो, साईकिल, बाइक या कार से। वो बोला बाइक से। इच्छा होती है ना बडी गाड़ी पर चलने की, उसने कहा हां, बस बाबा ने तपाक से कह दिया कि यही गलत इच्छा से कृपा रुकी है। आप बड़ी गाड़ी रास्ते पर देखना ही बंद कर दें। अब बताओ भाई कोई आदमी रास्ते पर है, अब बड़ी गाड़ी आ जाए तो बेचारा क्या करेगा। आंख तो बंद नहीं करेगा ना। इसीलिए कहता हूं कि मुझे तो लगता है कि बाबा के सामने मूर्खो की जमात लगती है । आप अगर उनके प्रश्न और सलाह सुन लें तो हँस-हँस कर लोटपोट हो जाएँ। जय हो इस निर्मूल बाबा की !

चलिए बात खत्म करें, इसके पहले मैं आपको बता दूं कि कुछ लोगों ने अपने निर्मल बाबा की कृपा को ही रोक लिया और उन्हें सवा करोड़ रुपये का चूना लगा दिया। बात लुधियाना की है। बाबा को बैंक ने जो चेक बुक दी है, उसकी हूबहू कापी तैयार करके एक व्यक्ति ने सवा करोड़ रुपये बाबा के एकाउंट से निकाल लिया । हालाकि इस मामले में रिपोर्ट दर्ज हो गई है, पुलिस को फर्जीवाड़ा करने वालों की तलाश है। पर मेरा सवाल है कि जब बाबा के खुद के एंकाउंट में सेंधमारी हो गई और बाबा बेचारे कुछ नहीं कर पा रहे तो वो दूसरों के एकाउंट की रक्षा कैसे कर पाएंगे।

वैसे भी निर्मल बाबा के जीवन या उनकी पृष्ठभूमि के बारे में बहुत कम लोगों को पता है। उनकी आधिकारिक वेबसाइट nirmalbaba.com पर कोई जानकारी नहीं दी गई है। इस वेबसाइट पर उनके कार्यक्रमों, उनके समागम में हिस्सा लेने के तरीकों के बारे में बताया गया है और उनसे जुड़ी प्रचार प्रसार की सामग्री उपलब्ध है। झारखंड के एक अखबार के संपादक ने फेसबुक पर निर्मल बाबा की तस्वीर के साथ यह टिप्पणी की है, ‘ये निर्मल बाबा हैं। पहली बार टीवी पर उन्हें देखा। भक्तों की बात भी सुनी। पता चला..यह विज्ञापन है. आखिर बाबाओं को विज्ञापन देने की जरूरत क्यों पड़ती है? सुनने में आया है…ये बाबा पहले डाल्टनगंज (झारखंड) में ठेकेदारी करते थे?’। मित्रों आप बाबा पर भरोसा करें, मुझे कोई दिक्कत नहीं, पर जरा संभल कर और हां बाबा जी आपकी कृपा बनी रहनी चाहिए, देखिए ज्यादा लंबी लंबी मत छोड़िएगा, क्योंकि ये पब्लिक है, सब जानती है।

(सच तो ये है कि लोगों के बारे में लिखते-लिखते खुद को भूल गया हूं। वैसे मैं पत्रकार हूं। करीब 15 साल तक हिंदी के तमाम राष्ट्रीय समाचार पत्रों में काम करने करने के बाद अब दिल्ली पहुंच चुका हूं। यहां मैं न्यूज चैनल से पिछले छह साल से जुड़ा हूं। मैं यूपी के मिर्जापुर का निवासी हूं, लिहाजा मेरी शुरुआती पढ़ाई यहीं हुई, बाद में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री और कानून की पढाई पूरी की। इसके बाद पूर्वांचल विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिग्री हासिल करने के बाद मीडिया से जुड़ गया। मीडिया से जुडे़ होने के कारण मुझे सत्ता के नुमाइंदों को काफी करीब से देखने का मौका मिलता है। यहां देखता हूं कि हमाम में सब……यानि एक से हैं। इसी सच को मैं शब्दों में ढालने की कोशिश करता हूं।)

 

(आधा सच से साभार)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

38 Comments

  1. hemant rajoriya says:

    Sabhi ne sahi kaha he. Jaldi hi sach samne aa jaye or jhoth pakda jaye.

  2. निर्मल बाबा तो बहाना है: पिछले लगभग पॉच छह वर्षों से पूरे भारत में अंधविश्वास फैला कर लोगों को लूट रहे निर्मल नरूला उर्फ निर्मल बाबा सरेआम अधिकॉश न्यूज चैनलों और अन्य मनोरंजक चैनलों पर रोज आकर अपनी ठगी का धंधा चला रहा था और उसके इस ठगी और लूट के धंधे में ये टीवी चैनल बाराबर के हिस्सेदार बने हुऐ थे तथा चुपचाप माल बटोर रहे थे लेकिन अचानक क्या हुआ कि ये सारे के सारे चैनल जो उसका नमक खा रहे थे अचानक नमक हरामी पर उतर आऐ है यह बड़ा रहस्य है?
    दरअसल यह सब अचानक नहीं हुआ है इसके पीछे बड़ा गहरा षड़यंत्र प्रतीत हो रहा है क्योंकि तीन जून से बाबा रामदेव का भारत स्वाभिमान के तहत कालेधन और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर व्यवस्था परिवर्तन का महाऑदोलन प्रारंभ हो रहा है जिससे सरकार के हाथ पॉव अभी से फूल रहे है क्योंकि सरकार के पास उनकी मॉगों/मुद्दों का कोई भी काट नहीं है इसलिये सरकार न्यूज चैनलों के माध्यम से निर्मल बाबा को शिकार करने के बहाने बाबाओं के बदनाम कर तथा बाबा रामदेव पर निशाना लगाने का बहाना ढॅूढ रही है जिससे उनको और उनके व्यवस्था परिवर्तन की महाक्रॉति को बदनाम किया जा सके। आजकल सरकार के षड़यंत्र की प्रथम कड़ी में टीवी पर बहस में बैठे तथाकथित बुद्धिजीवी (परजीवी) अपनी बहस में बाबा रामदेव का नाम भी इस निर्मल बाबा के साथ शामिल करने की कोशिश करते देखे जा रहे है तथा तीन जून से आते आते ये सरकार देश में ऐसा वातावरण तैयार करना चाहती है जिससे बाबा रामदेव को बदनाम कर उनके ऑदोलन को दबाया जा सके। इसीलिये भॉड न्यूज चैनल और बिकी हुई मीडिया अभी से इस कोशिश में लग गयी है। लेकिन देश की जनता जाग चुकी है तथा हमें इन षड़यंत्रों की तरफ सबका ध्यान खींचते हुऐ महाक्रॉति के पक्ष में वातावरण बनाना होगा।.

  3. amit says:

    अब बाबा को शक्तियों की इसी कृपा प्राप्त होगी की सीधा जेल की हवा खायेगा, फिर वहां उसकी तीसरी आँख भी कम नहीं आएगी,

  4. amit says:

    इस बात मै कोई शक नहीं है की. निर्मल बाबा सिर्फ लोगो ko मुर्ख बनाकर पैसा कम रहा है,

  5. Nirmal babaji ke charano may koti koti ranam babaji kirpa karna babaji aap aapna ashirwad hamari pariwar ko dijiye babaji babaji humko aapki kirpa ki bahut jaruwat hai nirmal babaji ko mera aur mere pariwar ki taraf say koti koti pranam babaji hum paas ho jaye aur babaji mere ko hindi typing may spirt bad jaye babaji humko dimag dijiye aur humko har kam aa jaye jo bhi kam sikhe wo aa jaye babaji aap chamtkar kar dijiye nirmal babaji ko namaskar

  6. प्रवीण कुमार says:

    Iska jabab jarur puchhiye apne aas pass ke logon se jo N.Baba ke bhakt hai.
    ——————————————————————————————

    *Samagam bade bade hotalon me kyun hote hai jahan ki seat simit hoti hai?
    *Samagam kisi play ground me kyun nahi hoti? jahnan 50,000 se adhik *logon ko ek baar me hi kripa mil jati?
    *Kya ulte- pulte nukse pura karne se hi kripa aayegi?
    *jinke pass black purse nahi hai o log nahi kamate hai, aur unpe laxmi ki kripa nahi aati?
    * kripa lene ka adhikar sirf unhe hi hai jo 2000 rupee de sakte hai, baki logon pe baba ki kripa kab aayegi?

  7. रवि says:

    बढ़िया, विस्तृत भंडाफोड़ू लेख.
    अपने ऊपर बाबा की कृपा अब बरसने वाली ही समझें. 🙂

  8. Umesh Sharma says:

    वैरी गुड भाई निर्मल बाबा की पोल खोल कर आपने बहुत अचा किया.वैसे भी निर्मल बाबा पैसे दे कर अपनी विज्ञापन देते है टीवी पर.दोस्तों अभी भी वक़्त है ऐसे बाबा से बच कर निकल जाओ नहीं तो अपनी पैसे को वास्ते करोगे.अगर निर्मल बाबा में शक्ति होती तो अब तक वोह इस दुनिया के दुखो को दूर कर देते न की मेम्बर बन्नने के लिए २००० रूपी लेते.

  9. kalyani nagdeve says:

    हमारे भारत में ये एक ही निर्मल बाबा नहीं है जो लोगोनको बेवकूफ बना रहा है बल्कि ऐसे ढेर सारे बाबा पहले भी हो चुके है . में खास तोर पर नाम लेना चाहूंगी सत्य साईं बाबा का ये भी बहुत बड़ा पाखंडी था जो चमत्कार के नाम पर लोगोंको लुटता था,हमारे देश में ऐसे ढेर सारे बबओंकी पोल खुल चुकी है पर हमें इससे सबक लेना आता ही नहीं.वैस ऐसे बबओंको तो धर्म के दलालोंका सुप्पोर्ट और राजनीतिके ठेकेदारोंका सहारा मिलता है इसलिए अगर आप इनके खिलाफ अव्वाज़ उठाएंगे तो ये लोग आपको धर्म वरोधी और पागल करार देंगे.इस देश में हिन्दू धर्म के नाम पर कितनी बेवकूफी भरी बातें लोगोंको बताई जाती है जिसे सुनकर सिर्फ हसी स्वामी samarthती है.हिन्दू धर्म में सिर्फ अंधश्रद्धा और भगवांन के नाम पर लुट होती रहती है.इस देश में सिर्फ अभी ही ये बाबा नहीं पैदा हुए है बल्कि काफी समय पहले भी ऐसे अनेक बाबा थे जिन्होंने लोगोंको उल्लू बनाया है,साईं बाबा(दूसरा बाजीराव),गजानन महाराज(तात्या टोपे),स्वामी समर्थ(सदाशिव पेशवा) इनकी पोल इतिहासमे खुल चुकी है की ये लोग कौन थे और कैसे ये बाबा बन बैठे, लेकिन अब इनके खिलाफ आवाज़ उठाना तो दूर इनको कुछ गलत भी नहीं कह सकते क्यूंकि धर्म के ठेकेदार हमारे खिलाफ होकर लोगोंको भादकायेंगे और हमें धर्म विरोधी ठहराएंगे.अब इस देश में जो चलते आया है वोटो चलतेही रहेगा चाहे हम कुछ भी कर ले.अब तो इस देश को बाबा लोग ही बचाए.

  10. हम इस ढोंगी चोर बाबा की ईंट से ईंट बजा देंगे!

  11. I Hate Nirmal says:

    यह XXX XXXXX निर्मल बाबा ने टीवी वालों को घूस दे कर झूठ फ़ैलाने के लिए खरीद रखा है. मीडिया भी XXX XX है जो दो पैसे के लिए अपना सब कुछ बेच डाली है.

  12. monika mahajan says:

    महेंदर जी आपके लेख से लोग जागरूक हो रहे है….बहुत अच्छा लिखा अपने……२००० रुपए की एंट्री लेकर कृपा देने वाले बाबा …वो भी एक युग में …सोचो तो हंसी आती है…और लोगो पर भी जो इन पर यकीन करते है ….पैसे देकर कृपा भी मिलती है क्या? पर जनता तो भेड़ चाल जैसे चलती है जहाँ भीड़ देखी चल दिए.पर हम कोशिश तो कर सकते है न…इस निरमल बाबा के दिन भी अब कम रह गए है ……हमारे हिमाचल में कहावत है ” कौवा चाहे कितना भी चालक क्यूँ न हो खता वो “shit ” ही है….:) हर पाप का अंत होता है और इसका भी अंत होगा….जय हिंद …जय भारत …..

    • Dheeraj says:

      आप ने बिलकुल सही कहा मोनिका जी , हम ने गुह खाने वाले जानवर को सर पर चडा लिया है. खैर जो भी , हर पापी का पाप का घड़ा एक दिन भर ही जाता है. इस पाखंडी निर्मल का भी अब वक्त ख़त्म हो चुका है. बहुत जल्द हम इस ढोंगी को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा देंगे !!

  13. arun soni says:

    sach to bahut bade bade he india me…kya ham nhi jante ki bhart me kitne sare devta he…33 crore devtaon ke sath sath sabhi jagah ke local devta alag he , uske bad deviyan , babba , maharaj, …jane kya kya…to oviusly baba v kai sare hoge…ham bhartiy over sanskari and over bhavnatmak he…

  14. YOGESH says:

    क्यों पीछे पड़े हो भाई निर्मल बाबा के ..अगर पब्लिक को ही होश नहीं तो बाबा की क्या गलती है… बहुत स्सरे बाबा है जो इस तरह से माल बनाने में लगे हैं…. बनाने दो… जागरूक करना है तो जनता को करो… अगर किसी को इस बाबा गिरी के काम में जनता, सरकार और सबसे बड़ी बात मीडिया से सम्मान प्राप्त हो रहा तो … इसमें जलने की क्या बात है… अब जनता तो बेवकूफ है तो इसमें बाबा क्या करे?? हर किसी की तमन्ना है अधिक से अधिक पैसा कमाने की और इज्ज़त कमाने की… अगर किसी को मिल रही है तो इसमें जलने की क्या बात है… वैसे भी हिन्दुस्तान की बेवकूफ जनता से ऐसे ही पैसे बनाए जा सकते हैं…
    बाबा जी लगे रहो…. गधे हैं सब स्साले …. पहले मुस्लिम शासकों ने लूटा.. फिर अंग्रेजो ने लूटा …फिर नेताओं ने लूटा …अब तुम क्यों पीछे रहो इन बेवकूफ हिन्दुस्तानियों को लुटने में… लगे रहो…
    sab jal rahe hain baba se…..

  15. Jab aadmi ka man dukhi hota hai aur vo sukh ki talash me jata hai, aur jab yes dukh ke din salo me badal jate hai to log dukh door karne ke liye tatkal samadhan khojne lagte hai.Aise me baba ho ya devi devta log kisi se vair nahi rakhna chahte. Yes prateek hai ki manav kitna shantipriye hai. Isi shanti ko log kamjori ka naam de dete hai, isi ka fayeda aise sadhu log uthate hai. Sadgati to nahi milti gat ban jati hai. Manav jivan ka utar chadhav hi use dar dar ki thokar ko mazboor karta hai. Yes sab vo karta hai apne parivar ke liye, tab vo parivarik ho jaata hai, jab manav budha ho jata hai tab vo samanvay vadi ho jata hai tab vo in logo ke chakar me padta hai ek achi maut ke liye jivan ke saare papo ki mukti ke liye tab vo vastav me bhakt ho jaata hai. Pure jivan manav in sab adambaro se bach nahi pata.Isi liye inki dukan chal padti hai kyoki inhe manav jivan ke har pehlu ko lubhane ka tact pata hai. Yes log ache psychologist jo hote hai. Seekho sabse par aankh khol kar, viswas sab ka karo par andh viswas nao karo.Jivan me sukhi rehne ka yahi mantra ho sakta hai.

  16. आपकी कलम को सलाम !

  17. pankaj says:

    धीरज जी के पास किरपा (लीगल नोटिस) आ चूका है अब आपकी बारी है किरपा पाने की बधाई हो !

  18. Raman Devasar says:

    mohinder jee bahut badiya.

  19. govind verma says:

    वाह महेंद्र जी बहुत अच्छा लेख लिखा है आपने |

  20. Yatender Kumar says:

    aise baba logo ke ghar bhar bharte raho aur khud rote raho. sabse jyaja kripa to tab ayegi jab andhvishvasi log aise logo ke changul me nahi ayenge pehle socho aur khud ko parkho tab tumhara bhi bhala aur sabka bhi bhla. please yese baba logo ke show band karao.

  21. ArunRishi says:

    हमारे शास्त्रों में कहा गया है की यदि आपको नरक में नहीं जाना हो तो आपको तीन करम कभी नहीं करना है ,एक श्लोक है की परिव्राजकम धनं दत्वा,ताम्बूलं ब्रह्मचारिणं ,चोरात अभयं दत्वा दाता तू नरकं ब्रजेत अर्थात घुमक्कड़ साधू को धन देने वाला ब्रह्मचारी को पान खिलाने वाला तथा चोरो को अभय दान देने वाला नरक में जायेगा,परन्तु आज के समय में यही सब होरहा है और यही कलयुग के पतन का कारन है,कलयुगी ढोंगी पाखंडी बाबाओ ने इस सत्य को आम व्यक्तियों से छुपा रखा है .एक और दोहा है की संत भोगी वैद्य रोगी और शूर पीठी घाव तो जन इन्हें पतियाऊ अर्थात संत अगर भोगी हो, वैद्य अगर रोगी हो और शूर अर्थात वीर के पीठ पर घाव हो उसके सिने पर घाव होना चाहिए , तो जनता ने इन पैर भरोसा नहीं करना चाहिए .कबीर ने भी ठीक कहा है की संतो ये जग बोराना,साच कहो तो . मारन धावे झूठे पग पगराना अर्थात ये जग पागल हो गया है अगर उसे सच बताओ तो मारनेदोड़ता है और झूठो के पैर पड़ता है.

  22. मोहनीश says:

    इस पाखंडी बाबा को जेल में होना चाहिए……….चलिए इसको इसकी सही जगह पहुंचा देते है……सभी मिल कर प्रयास करें तो इसका पर्दाफास हो सकता है……..जय हिंद….

  23. सुन्दर लेख। अब आपके ऊपर बाबा की कृपा होनी पक्की! 🙂

  24. Rajesh Soni says:

    जागो भारत ,,,,जागो!

  25. Hira Bhatt says:

    JAI HO BABA NIRMAL KI….MUST READ….THANKS SIRJI

  26. tulsidas ji ke chandon ko ///ram charait manas ki chopaiyon ko mahamantra kaha aur mana jata hai…….baba bas unhi ka maja le rahe hain……….PARHIT SARAS DHARAM NAHI BHAI………….JA PAR KRIPA RAM KI HOYI…… MANAV EK PREM KAR NATA……..NIRMAL MAN JAN SO MOHI PAWA..MOHI KAPAT CHAL CHIDRA NA BHAVA….YE BATEN SIDHE NA BATAKAR GHUMA PHIRA KAR AAPNE ANUYAI BADA RAHE HAI…..ISWAR EK HAI SAMJHANE KE LIYE SHIRDI BHEJTE HAIN..PAR SIDHE BATANE KI AADAT NAHI HAI IN BABA KO………SIDHI BAATEN BATANA MATLAB BHAKTON KO SIDHA ISWAR SE JODNA…AUR YE GALTI NIRMAL BABA NAHI KAR SAKTE BHAIYA JI.DUKAN BAND HO JAYEGI…..JAI HIND JAI SIYARAM.

  27. महेंद्र जी मान गए……………

  28. Jagrat Sahu says:

    yes baba paisa kamane ki soch raha hai aur time pass.

  29. Raj Karwasra says:

    जय हो इस निर्मूल बाबा की!

  30. Suman Kumar Yadav says:

    सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा. अगर हम आँख मुंद कर किसी भरोसा करेंगे तो यही होगा.अपने माता पिता और बुजुर्ग का सम्मान तो करते नहीं और ऐसे बाबा जी के सामने नतमस्तक हो जाएगा.जिसके ऊपर उसके माता पिता की कृपा हो उन्हें किसी की कृपा की जरुरत नहीं.हिरन की तरह कस्तूरी की तलाश में ता उम्र ऐसे बाबाओं के पास जा के लुट जाने के सिवा और बचता क्या है. जिसके अंदर मानवता का मूल मंत्र मतलब अपने जन्मदाता का सम्मान करना नहीं आता वैसे ही ज्यादा लोग ऐसे बाबाओ के चक्कर में पड़ते है. स्वार्थी मानसिकता के कारन ऐसे बाबाओ को सम्मान देते हैं की हमे कुछ मिल जाएगा बाबा जी से.

  31. Kumar Ajay says:

    Yap I had seen some programme of THE NIRMAL BABA, and feel another one of Indian………… f……d

  32. sanjay nagia says:

    यह सिर्फ भारत में ही सम्भव है लोगो की भावनाओं से खेलने के अपराध में इसको जेल में होना था अभी तक ,किसी ने सच कहा जब तक बेवकूफ ज़िंदा है अकल्मन्द (निर्मल) मजा करता रहेगा

    • Mayank Sahu says:

      निर्मल बाबा एक ढोंगी बाबा है| आप ही जरा सोचिये की अगर निर्मल बाबा सच्चा होता तो फिर भारत में
      १. भ्रष्ट-नेता / घोटाला ये सब अभी भी क्यों है ?
      २. inflation दिन ब दिन बढ़ता ?
      ३. गरीबी होती ?

      सही वजह तो ये है की इन लोगो की वजह से ही भारत तरक्की नहीं कर पा रहा है | आज के इस ज़माने में ये सब पढ़ के दुःख होता है , एक तरफ विज्ञान कहा से कहा पहुच गया है | फिर भी लोग इतने बेवकूफ है की निर्मलजीत नरूला के इन नुस्खो में यकीं रखते है | 🙁

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