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निर्मल बाबा के हाथों बिक गया जागरण या उनकी ‘किरपा’ रुकने से डर गए जस्टिस काटजू?

By   /  April 10, 2012  /  21 Comments

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-अनिल सिंह ।।

टीवी-अखबारों में हर रोज चमकने-छपने वाले, नेताओं-मंत्रियों की नैतिकता पर उंगली उठाने वाले, भ्रष्‍टाचार को लेकर चीखते-चिल्‍लाते-अपनी आवाज बुलंद करने वाले वरिष्‍ठ पत्रकार, जिनके चेहरों को देखकर-प्रवचन रूपी लेखनी को पढ़कर तमाम युवा इनको रोल मॉडल मानकर जर्नलिस्‍ट बनने का सपना पालते हैं, पर बाहर से चमकने वाले ये चेहरे अंदर से कहीं भयावह व डरावने हैं.

आम आदमी के हितों की बात करने तथा सरकार को आईना दिखाने का दंभ भरने वाले ये कथित वरिष्‍ठ पत्रकारों में हिम्‍मत से कस्‍बाई पत्रकारों से भी कम हैं. बाजार को पत्रकारिता के लिए अभिशाप मानने वाले वास्‍तव में बाजार के बहुत बड़े दलाल हैं. बाजार से इनको बहुत डर लगता हैं. इनमें पत्रकारिता के सिद्धांतों के एक किनारे पर भी खड़े रहने का आत्‍मबल नहीं है. मैं व्‍यक्तिगत तौर पर इनके नाम खुलासा नहीं करना चाहता ताकि लाखों युवाओं के मन में बनी इनकी छवि पर कालिख न पुत जाए.

गोष्ठियों और आयोजनों में लम्‍बे प्रवचन देने वाले, मीडिया को बराबर आईना दिखाने वाले काटजू पर भौंकने वाले पत्रकार ढोंगी निर्मल बाबा के बारे में एक शब्‍द भी कहने से घबरा जाते हैं. अगर इस मामले में इनका पक्ष जानने के लिए फोन किया जाता है तो कोई बाहर होता है, किसी को बात सुनाई ही नहीं देता है, तो कोई एक बार सवाल सुनने के बाद थोड़ी देर में बात करने की बात कहकर दुबारा फोन नहीं उठाता है, किसी को एंकरिंग की जल्‍दी होती है. यानी टीवी पर प्रवचन देने वाले चेहरों के पास तमाम तरह के काम निकल आते हैं, पर उनके चैनल पर ढोंगी निर्मल बाबा का विज्ञापन चलने के मामले में जवाब देने का समय नहीं है.

इन महान पत्रकारों के पास जवाब देने का समय इसलिए नहीं है कि इन्‍हें अपने मालिकों से डर लगता है. हर महीनों इन न्‍यूज चैनलों को करोड़ों का विज्ञापन और टीआरपी देने वाले निर्मल बाबा मालिकों के लिए दुधारू गाय हैं. इस दुधारू गाय के खिलाफ बयान दिए जाने से इनके आका लोग नाराज हो सकते हैं. इनकी नौकरियों पर बन सकती है, लिहाजा निर्मल बाबा के बारे में बोलने के लिए इनके पास टाइम नहीं है. शाम को न्‍यूज चैनलों पर होने वाले प्रवचनों में ये चेहरे जनप्रतिनिधियों पर, मंत्रियों पर नैतिकता और आम आदमी के हित को लेकर सवाल उठाते हैं. पर जब खुद जवाब देने की बारी आती है तो इनके पास समय नहीं होता है. फिर तो ये माना ही जा सकता है कि नैतिकता की दुहाई देने वाले इन पत्रकारों से नेता ही ज्‍यादा अच्‍छे हैं जो कम से कम किसी मुद्दे पर जवाब तो देते हैं. ये पत्रकार तो कथित तौर पर पतित कहे जाने वाले नेताओं से भी ज्‍यादा पतित हैं.

जस्टिस काटजू बार-बार दोहराते हैं कि देश इस समय बहुत बड़े बदलाव यानी ट्रांजीशन के फेज से गुजर रहा है, जहां एक तरफ पुरानी परम्‍पराएं-रूढि़यां हैं तो दूसरी तरफ मार्डन समाज की तरफ बढ़ते कदम यानी देश अपनी पुरानी केंचुल उतारने के दौर से गुजर रहा है और इसमें तकलीफें बढ़ जाती हैं. ऐसे हालात जब यूरोप में आए तो वहां बहुत उपद्रव हुए, भारत भी इसी दौर में है. इसमें मीडिया की भूमिका बढ़ जाती है, उसकी जिम्‍मेदारियां बढ़ जाती हैं. पर अपने देश का मीडिया है कि बाजार की गुलाम बन चुकी है और संपादक बाजार के बहुत बड़े दलाल. बाजार इन संपादकों को जिस तरीके से नचा रहा है वो उस तरीके कत्‍थक और भाड़ डांस कर रहे हैं. भूत-प्रेत से निकलकर बुलेट और एक्‍सप्रेस खबरें बनने के दौर में आम आदमी खबरों और मीडिया से दूर होता जा रहा है. निर्मल बाबा जैसे ढोंगी लोग, जिनका पोल खोलने का दायित्‍व इन संस्‍थानों और संपादकों पर है, चैनलों के हॉट केक बनते जा रहे हैं.

इतना ही नहीं बाबा के पोल खोलती खबरें भी बड़े-बड़े समाचार संस्‍थानों के पोर्टल से गायब चुकी हैं. कुछ ब्‍लॉग भी सस्‍पेंड कर दिए गए हैं. जागरण के ब्‍लॉग जागरणजंक्‍शन पर निर्मल बाबा का पोल खोलने वाले ब्‍लॉग को ही सस्‍पेंड कर दिया गया है. poghal.jagranjunction.com नामक ब्‍लॉग पर कई खबरें ‘निर्मल बाबा उर्फ ढोंगी बाबा का सच जानिए’, ‘निर्मल बाबा : मीडिया रूपी वैश्‍या की नाजायज..’, ‘निर्मल बाबा के गोरखधंधे पर लगाम लगाना ज़रूरी हो ..’ तथा ‘निर्मल बाबा का अस्तित्व यानि भारत का दुर्भाग्य …’ शीर्षक की खबरों को ना सिर्फ ब्‍लाक कर दिया गया है बल्कि इस ब्‍लॉग को ही सस्‍पेंड कर दिया गया है. खैर, जागरण जैसे संस्‍थान से इससे ज्‍यादा की उम्‍मीद भी नहीं की जा सकती है. पर एनडीटीवी के बारे में क्‍या कहें, जिसने अपने सोशल साइट पर र‍वीश कुमार की निर्मल बाबा पर लिखे कमेंट को भी ब्‍लॉक कर दिया है.

 

रवीश के ब्‍लॉग http://social.ndtv.com/ravishkumar/permalink/79144 पर जितना दिख रहा है उसमें उन्‍होंने लिखा है कि ‘निर्मल बाबा न्यूज़ चैनलों के टाप फ़ाइव में पहुँच गया है। निर्मल बाबा को ही संपादक बना देना चाहिए। निर्मल इज़ न्यूज़, निर्मल इज़ नार्मल।’ पर इस लिंक को खोलने पर लिख कर आ रहा है कि ‘उप्‍स देयर वाज ए प्रॉब्‍लम’. आज के मार्केटियर हो चुके पत्रकारिता के दौर में जब तमाम संपादक खाने के और दिखाने के और दांत रखते हैं, रवीश से थोड़ी उम्‍मीद जगाते दिखते हैं. लेकिन इसके उलट जिन जिन संपादकों में मुझे थोड़ी उम्‍मीद दिखती थी, उनको देखने समझने से लगता था कि आज के बाजारू पत्रकारिता के दौर में ये औरों से अलग हैं, पर इस घटना के बाद ये सारे प्रतिमान रेत के महल की तरह धराशायी हो चुके हैं.

अब ये लाख टीवी पर प्रवचन दें या फिर अखबारों में कलम घसीटे कम से कम उसमें सच्‍चाई तो बिल्‍कुल नहीं दिखेगी. हालांकि लाखों की सेलरी लेने वाले इन संपादकों पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. पर मुझे सकुन मिलेगा कि कम से कम छोटे शहरों और कस्‍बों के पत्रकार इनसे कहीं ज्‍यादा इमानदार और कर्तव्‍यनिष्‍ठ हैं.

(लेखक अनिल सिंह भड़ास4मीडिया के कंटेंट एडिटर हैं. वे दैनिक जागरण समेत कई अखबारों और चैनलों में काम कर चुके हैं.)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

21 Comments

  1. ज़रा इस वीडियो को गौर से देखिये! यहाँ आप को पता चल जायेगा कि कैसे यह ढोंगी बाबा अपने ही चमचों को छांट छांट कर बुलाता है… इन चमचो से पहले ही डायलोग रटाया जाता है. यह बाबा के मंझे हुए कलाकार होते हैं. फिर कार्यक्रम के वक्त यही कलाकार अपने दुखों का मार्मिक किस्से सुनते हैं और फिर यह बताते हैं कि बाबा जी कि कृपा से हमारे दुःख दूर हो गए. बाकि मूर्खों कि भीड़ इस से प्रभावित हो कर जय जय कार क…रने लगते हैं. बड़ा ही गज़ब का अभिनय होता है इस पाखंडी बाबा के दरबार में!
    मगर इस विडियो में सभी कलाकार मंझे हुए नहीं हैं. कईयों के डायलोग बोलते वक्त हंसी छूट रही है. अनाड़ी लग रहे हैं बेचारे.. अभी इन कलाकारों को रिहर्सल की ज़रूरत है.
    एक शख्स कहता है कि वह नागपुर से आया है और मेरा चौथा समागम है , इस के हाव भाव से ही पता चल रहा है कि यह अभिनय में अभी पक्का नहीं है. कहता है मुझे सीमेंट का डीलर भी आप ने बना दिया , मुझे पैसे भी बहुत दिए. इन सब लोगों के बयान लिए जाने चाहिए क्यों कि यह लोग भी इस षड्यंत्र के हिस्सेदार हैं. इन सब कलाकारों के वीडयो भी डाउन लोड कर के रखा जाए और बाद में इन पर भी जाँच की जाए!

  2. Kushal Pal says:

    Publicsiti hasil kr lo beta baba ji k naam pr.

  3. himmat yadav says:

    hum aap ke sath .

  4. देखो मूर्खो ..जो भी निर्मल बाबा के ठगी के जाल मे फंस जाता है .. ये दूसरे के मन की बात जानने का ढोंग करता है लेकिन इसके खाते से ठगों ने पैसे निकाल लिए और इस महाठग को पता नही चला ..
    क्या इसके पास कोई दैवीय शक्ति है ? जिसका ये दावा करता है ?

    http://www.bhaskar.com/article/PUN-LUD-nirmal-baba-accused-2935932.html

  5. क्या आप को ढोंगी निर्मल बाबा की कमाई का अन्दाज़ा है ???

    अगर आपको नही पता है तो फिर आप अच्छे से जान लीजिए..

    1. 19 विभिन्न चैनल्स, जिसमे सोनी, ज़ी, स्टार ऐसे नेटवर्क है,जिनके मिडल ईस्ट, आसिया पेसिफिक,भी शामिल कर रहा हूँ, पर दिन मे कुल 33 बार बार के प्रोग्राम चलते है. एक प्रोग्राम का औसतन खर्च चार लाख मासिक है (33 से गुना स्वयं कर लीजिए. यह राशि 1 करोड़ बत्तीस लाख रुपये मासिक बनती है.)

    2. इस पैसे को कवर करना पड़ेगा तो रोज़ प्रोग्राम करना ज़रूरी है अखिर प्रॉफिट भी तो चाहिए ना.

    3. बाबा के आने वाले माह अप्रेल मे कुल 17 जगह समागम है. औसतन एक जगह 2500 लोगो को एंट्री मिलती है. 2500 का 2000 प्रति व्यक्ति गुना करने पर 50 लाख की राशि सीधे सीधे टिकट से मिल जाती है. इसके बाद चढ़ावे और व्यक्तिगत मिलन की तो बात ही नही कर रहा. अब अगर 17 कार्यक्रम का 50लाख से गुना करूँगा तो…. साढ़े आठ करोड़ से उपर जाएगा. इसमे सवा – सवा करोड़ टीवी वालो को दे दिए तो भी कम से कम 7 करोड़ एक महीने के बचे. अब आप ही बताइए, इनमे से हाल बुकिंग, कर्मचारी वेतन निकालने के बाद बाबा कितना कमा रहा होगा… बाबा के दरबार मे दो साल के child का भी पूरा टिकट लगता है.

    4. बाबा को किसी भी प्रकार से दिया जाने वाला पैसा नों रिफंडेबल और नों ट्रांस्फ़ेरेबल है. ये सारी जानकारी मैने उनकी खुद की वेबसाइट ( निर्मल बाबा डॉट कॉम ) से ली है. आप खुद चेक कर सकते है.

    यह लेख श्री मनु आर्य जी द्वारा लिखा गया है और हमने सिर्फ सच आप के सामने रखा है !

    ये एक लिंक और :- टी वी चैनलों की ईजाद निर्मल बाबा सिर्फ एक दिन में चार करोड़ कमा कर अपने भक्तों का तो भला करें या न करें पर टी वी चैनलों का भला जरूर कर रहें हैं…

    http://www.mediadarbar.com/5391/nirmal-baba-earns-huge-money/

  6. में कुछ उल्टा पुल्टा न लिखते हुए बस कुछ प्रश्न आपके सामने रखना चाहूँगा …

    1. फिलहाल बाबा के भारत के 16 राष्ट्रीय चैनलों, और 3 विदेशी चैनलों पर विदेशों में कार्यक्रम चल रहे है. केवल आस्था पर बीस मिनट का मासिक व्यय सवा चार लाख+टेक्स है, तो अन्य राष्ट्रीय समाचार चैनलों पर कितना लगता होगा ?

    2. अगर बाबा के आशीर्वाद से सब कुछ हो सकता है तो इतने चैनल्स पर आने की क्या ज़रूरत?

    3. समाचार चैनल्स को विज्ञापन रूपी कार्यक्रम (पेड प्रोग्राम) के रूप मिलने से वे अपने "क्लाइंट" नहीं खोना चाहते, इस से निर्मल बाबा के खिलाफ कोई खबर नहीं चलती…. क्या ये सच है? (बताते चलें, बाबा का हर प्रमुख न्यूज़ चैनल पर सुबह प्रोग्राम आता है)

    4. अपने आरंभिक दिनों में नॉएडा के फिल्मसिटी में स्थित एक स्टूडियो में शूटिंग करते वक़्त बाबा के सामने जो लोग अपनी समस्या के हल होने का दावा करते थे, वे असली लोग न होकर "जुनियर आर्टिस्ट" हुआ करते थे ?

    5. आज भी ये "आर्टिस्ट" बदस्तूर जारी है..??

    6. बाबा के समाधान का एक उदहारण देखिये : आपके घर में गणेश जी की मूर्ती है ? अकेली है? नहीं..तो अकेली लगाओ.. हाँ तो लक्ष्मी जी के साथ लगाओ, इस से समृद्धि आएगी… दक्षिण में है तो उत्तर में लगाओ, उत्तर में है तो दक्षिण में लगाओ… खड़े है तो बैठे हुए गणेशजी लगाओ… बैठे है तो खड़े गणेश जी लाओ… क्या आपने इस स्थिति को महसूस नहीं किया ?

    माने आपकी हर बात का कोई न कोई जवाब… और फिर हर जगह लक्ज़री की बात !!!

    7. बाबा के किसी शहर में जाने से पूर्व वह एक टीम पहले जाकर "मार्केटिंग" का काम संभालती है. और मार्केटिंग भी ऐसी वैसी नहीं… भारी वाली ? क्यों,जबकि बाबा तो अंतर्यामी है..आपके घर की हर चीज़ आँखे बंद करके देख सकते है ??

    8. युवराज के घरवालों के आरोप तो आपको पता होंगे नहीं पता तो इस विडियो को देखें http://youtu.be/q8r-tRariBQ ??

  7. निर्मल बाबा के खिलाफ ब्लाग पर प्रकाशित सारी पोस्ट डिलीट.
    ==================================

    जी हाँ दैनिक जागरण वालों ने जागरण जंक्शन डाट काम नाम से एक ब्लाग पोर्टल बनाया है जिस पर कोई भी जाकर अपना ब्लाग बनाकर अपने मन की बात लिख सकता है. लेकिन यहां अगर आपने वाकई अपने मन की बात लिख दी तो आपका ब्लाग और आपकी पोस्ट बिना आपके बताए डिलीट की जा सकती है. पिंकी खन्ना नामक ब्लाग लेखिका ने जागरण वालों के ब्लाग मंच जागरण जंक्शन पर poghal नाम से अपना ब्लाग बनाया था और निर्मल बाबा के खिलाफ हाल में उन्होंने कई पोस्टें लिखकर प्रकाशित की. इन पोस्ट के शीर्षक कुछ इस प्रकार हैं :-

    1 निर्मल बाबा के पाप का घड़ा भर चुका है. अब उलटी गिनती शुरू!

    2 निर्मल बाबा के गोरखधंधे पर लगाम लगाना ज़रूरी हो गयी है!

    3 निर्मल बाबा उर्फ़ ढोंगी मदारी कैसे करता है चमत्कार?

    4 निर्मल बाबा का मीडिया द्वारा प्रचार करना एक राष्ट्रीय अपराध!

    5 निर्मल बाबा उर्फ़ ढोंगी बाबा का संक्षिप्त परिचय.

    6 निर्मल बाबा : मीडिया रूपी वैश्या की नाजायज़ औलाद!

    7 निर्मल बाबा का अस्तित्व यानि भारत का दुर्भाग्य!

    8 निर्मल बाबा की अब गुंडागर्दी भी शुरू हो चुकी है!

    9 निर्मल बाबा देश की मूर्ख जनता को लॉलीपॉप खिला कर ऐश कर रहे हैं.

    10 निर्मल (क्रिमिनल) बाबा का लूट तंत्र बदस्तूर जारी है!

    11 निर्मल बाबा बनाम माफिया डान (दोनों में फर्क कितना?)

  8. Manmohan Singh Negi says:

    welldone अनिल तुम अच्छा काम कर रहे हो हम तुन्हारे साथ hai

  9. good article on truth of media and journalists…….

  10. Arti says:

    बाबा तेरी माँ की आगे नहीं बोले रही हु, अपने से समझ जाना

  11. Arti says:

    यह काला बाबा है इसको मारने का मन कर रहा है

  12. अनिल जी लेख बहुत प्रभावी है…..

  13. अगस्त तक सभी समागमों की बुकिंग फुल, फिर भी विज्ञापन जारी, इन निर्मल बाबाओं ने टैक्स में छूट लेकर कालाबाजार को संगठित सुनयोजित रूप से सफेद्पोस जामा पहनाया है. जय हो….

  14. Ahfaz Rashid says:

    aaj maine bhi ek badhiya post likhkar baba ko chhattisgarh aamantrit kiya hai.

  15. In Internet You can never suspend anything.

    Here are the copies of everything from poghal.jagranjunction.com.
    http://nirmalbabatruth.co.cc/viewforum.php?f=3&sid=33e7044a550a9e0ebb0384bc9bb7a8e8
    and I am sure it cannot be deleted from here.

  16. Annonymous says:

    In Internet You can never suspend anything

    Here are the copies of everything from poghal.jagranjunction.com
    http://nirmalbabatruth.co.cc/viewforum.php?f=3&sid=33e7044a550a9e0ebb0384bc9bb7a8e8
    and I am sure it cannot be deleted from here.

  17. Shivnath Jha says:

    जागरण का मालिक "बनियाँ" है, समाचार पत्र के नाम की प्रतिष्ठा का भी "बलात्कार" कर रहे हैं.जहाँ तक जस्टिस काटजू का सवाल है, काहे को "जस्टिस", जब तो न्यायालय में हैं नहीं, और जहाँ है वहां "जस्टिस" उपनाम लगाने की आवश्यकता नहीं है – प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया में वैसे व्यक्ति की जरुरत है जो "भयभीत"नहीं हों, यह बुड्ढा तो "सठिया" गया है – निर्मल बाबा के तप से इतना भय तो मेरे मंत्र से तो पता नहीं क्या हों जायेगा.

  18. sanjay nagia says:

    लगे रहो कामयाबी मिलेर्गी

  19. बहुत उम्दा जानकारी दी है भड़ास4मीडिया के अनिल सिंह ने…

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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