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निर्मल बाबा का ‘विज्ञापन’ भी कार्यक्रमों की गिनती में शामिल.. क्या TAM भी बिका?

By   /  April 10, 2012  /  25 Comments

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-शगुन त्यागी ।।

इस बात का कोई सुबूत तो नहीं है लेकिन शत-प्रतिशत ऐसा ही है कि टैम भी निर्मल बाबा के हाथों बिक चुका है, क्योंकि तीसरी आंख वाले बाबा का ढोंग बकौल न्यूज़ चैनल्स एक विज्ञापन के तौर पर प्रसारित किया जा रहा है, लेकिन सवाल ये है कि आखिर एक विज्ञापन को टीआरपी में क्यों गिना जा रहा है। हर हफ्ते टैम की ओर से जारी होने वाली रिपोर्ट में वो आधे घंटे टीआरपी में क्यों गिने जा रहे हैं। न्यूज़ चैनलों के संपादक शायद अपने साथियों की मेहनत को मिट्टी में मिलाने में तुले हैं लेकिन क्या टैम वालों पर भी तीसरी आंख की कृपा हो गई है? क्या टैम वालों ने भी घर में कढ़ी चावल बनाने शुरू कर दिये हैं? सवाल लाख टके का ये भी है।

देशभर के जिन शहरों में टीआरपी सैंटर हैं उन शहरों में ऐसा तो है नहीं कि 100 फीसदी अनपढ़ लोग ही बसे हैं। वहां एक पढ़ा लिखा और जागरूक तबका भी मौजूद है और ऐसा भी नहीं है कि टामियों की टीआरपी के मापदंड तय करने वाली मशीनें समाज के ऐसे तबके के घरों में लगे हैं जिन्हें आस्था और अंधविश्वास के बीच का फर्क नहीं मालूम। इसलिए आखिर तीसरी आंख वाले बाबा के इस कार्यक्रम की टीआरपी ऐसे उछाल पर क्यों है, इससे ज्यादा बेहतर और कहीं ना कहीं मनोरंजन करने वाले विज्ञापन भी करीब करीब हर न्यूज़ चैनल पर प्रसारित किये जा रहे हैं लेकिन उनकी टीआरपी क्यों नहीं आ रही?

खास बात ये है कि अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले इस तरह के कई विज्ञापन पहले भी कई न्यूज़ चैनलों पर प्रसारित किये जाते रहे हैं लेकिन आज से पहले कभी उन विज्ञापनों को टीआरपी में नहीं गिना गया, इससे तो यही ज़ाहिर होता है कि तीसरी आंख वाले बाबा जी के दरबार में पड़ने वाली लाखों रुपयों की बारिश की कुछ छींटे टैम के ऊपर भी पड़ी हैं जिसकी बदौलत बाबा जी रातों रात शोहरत बटोरने में कामयाब हो गये हैं, और अगर ये बात कहीं ना कहीं सच साबित होती है तो वाकई उन तमाम मीडियाकर्मियों के लिए सोचने का विषय है जो 20-20 हज़ार रुपये या फिर उससे भी कम मानदेय पर न्यूज़ चैनलों के तमाम स्पेशल प्रोग्राम बनाते हैं और उनके बदले की टीआरपी ले जाती है तीसरी आंख।

हैरानी की बात तो ये है कि आखिर इस तरह की बकवास पर कोई इस कदर आंख मूंद कर भरोसा कैसे कर सकता है। सवाल तो न्यूज़ चैनल चला रहे संपादकों और मालिकों से भी है कि अगर तीसरी आंख की कृपा से ही टीआरपी आ रही है तो फिर तमाम कार्यक्रम बनाने की क्या ज़रूरत है? इस बारे में वक्त रहते अगर न्यूज़ चैनलों में काम कर रहे पत्रकारों की आंखें नहीं खुली और एकजुट होकर उन्होंने थर्ड आई ऑफ निर्मल बाबा नामक भ्रांति का विरोध नहीं किया तो वो दिन दूर नहीं जब न्यूज़ चैनलों के मालिकों के लिए सोने की मुर्गी साबित हो रहे निर्मल बाबा जैसे लोग ही न्यूज़ चैनलों पर प्रसारित किये जाएंगे और वहां काम करने वाले लोगों की न्यूज़ चैनलों के मालिकों को रत्तीभर भी ज़रूरत नहीं रहेगी।

एक और बात ये कि दुनिया टैलेंट के मामले में हिंदुस्तान का लोहा मानती है यानी हमारे देश में जिस तरीके से नकल होती है उसी तरीके से लोगों के पास अपने भी आईडिया मौजूद है इसलिए आने वाले दिनों में कुछ लोग तीसरी आंख वाले बाबा जी की नकल तो कर ही सकते हैं साथ ही अपनी प्रतिभा दिखाकर कुछ इसी तरीके के अंधविश्वास और फर्जी चमत्कारों से लबरेज़ नये कार्यक्रम भी न्यूज़ चैनलों की झोली में डाल सकते हैं। इसलिए सावधान हो जाओ मेरे साथी मीडियाकर्मियों। अगर ऐसे ही चलता रहा तो पत्रकार जैसे शब्दों का कोई मतलब इस देश में नहीं रह जाएगा।

पत्रकार भी आज़ाद हिंद सेना के सिपाहियों की तरह बनकर रह जाएंगे, जिनके बारे में कुछ खास जानकारी इस दुनिया में मौजूद नहीं है। ये बात सिर्फ गरीब पत्रकारों के लिए ही चिंता का विषय नहीं है बल्कि उन संपादकों के लिए भी सोचने की बात है जो फिलहाल तो निर्मल बाबा जैसी सोने की मुर्गी अपने मालिकों को भेंट कर उन्हें खुश करने में लगे हैं लेकिन ये मुर्गी जब सोने के अंडे देने लगेगी तो उनकी भी कोई खास ज़रूरत मालिकों की नज़रों में नहीं रह जाएगी…..ज़रा सोचिये.

( शगुन त्‍यागी सहारा समय चैनल के साथ लम्‍बे समय तक जुड़े रहे हैं. वे इन दिनों नॉर्थ ईस्‍ट बिजनेस रिपोर्टर मैग्‍जीन के दिल्‍ली-एनसीआर ब्‍यूरोचीफ के तौर पर जुड़े हुए हैं. शगुन से संपर्क मोबाइल नम्‍बर 07838246333 के जरिए किया जा सकता है।)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

25 Comments

  1. पाखंडियों के पोषक देश में एक और पाखंडी का पदार्पण हुआ है. वे है ***निर्मल बाबा? जो आजकल टी.वी. पर खूब छाए हुए है. लोग उनके दरबार में लाचार , हीनभावना से ग्रस्थ , रोते – गिडगिडाते नजर आते है , इन लोगो को देखकर लगता है की उनमे आत्म विश्वास की कमी है और बिना कुछ किये सबकुछ मिलाने की कामना लिए हुए आते है……. निर्मल बाबा लोगो को अपना पर्श खुला रखने कहते है और हाथ ऊपर उठाकर आशीर्वाद देते हुए कहते की " ये शक्ति आपको सब परेशानी से मुक्त कर देगी " उनके हाथ उठाने से ही दरबार में बैठे लोगो तक शक्ति का संचार होता है… कोई हादसे से बचाता है तो वह निर्माल बाबा ही है , कोई नौकरी मिलाती है तो वह निर्माल बाबा के कारन , कोई बिमारी से बचाता है तो वह निर्माल बाबा ही बचाते है , कोई परीक्षा में अच्छे नम्बर लाता है तो वह निर्मल बाबा की शक्ति का कमाल होता है…… लोग अपना अपना एक्सिपिरेंस इस तरह की बाते कहते हुए रो -रोकर बताते है.. आश्चर्य तो तब होता है की निर्मल बाबा जादू टोना ,टोटको , तंत्र मंत्र को तो पाखंड कहते रहते है कितु उनको अपना सबसे बड़ा पाखंड, पाखंड नही लगता है फिर निर्मल बाबा अपने अनेको बेंक खातों का एकाउंट नम्बर देते है और उसमे लोगो को अपनी आमदनी का 10% राशि को जमा करने के निर्देश देते है साथियों अपने आप पर विश्वास करे.. अपना प्रकाश स्वयं बने…. आत्मविश्वास ही इंसान को आगे बडने की प्रेरणा देता है…..आत्म विश्वास बनाए रखे…

  2. पाखंडियों के पोषक देश में एक और पाखंडी का पदार्पण हुआ है. वे है ***निर्मल बाबा? जो आजकल टी.वी. पर खूब छाए हुए है. लोग उनके दरबार में लाचार , हीनभावना से ग्रस्थ , रोते – गिडगिडाते नजर आते है , इन लोगो को देखकर लगता है की उनमे आत्म विश्वास की कमी है और बिना कुछ किये सबकुछ मिलाने की कामना लिए हुए आते है……. निर्मल बाबा लोगो को अपना पर्श खुला रखने कहते है और हाथ ऊपर उठाकर आशीर्वाद देते हुए कहते की " ये शक्ति आपको सब परेशानी से मुक्त कर देगी " उनके हाथ उठाने से ही दरबार में बैठे लोगो तक शक्ति का संचार होता है… कोई हादसे से बचाता है तो वह निर्माल बाबा ही है , कोई नौकरी मिलाती है तो वह निर्माल बाबा के कारन , कोई बिमारी से बचाता है तो वह निर्माल बाबा ही बचाते है , कोई परीक्षा में अच्छे नम्बर लाता है तो वह निर्मल बाबा की शक्ति का कमाल होता है…… लोग अपना अपना एक्सिपिरेंस इस तरह की बाते कहते हुए रो -रोकर बताते है.. आश्चर्य तो तब होता है की निर्मल बाबा जादू टोना ,टोटको , तंत्र मंत्र को तो पाखंड कहते रहते है कितु उनको अपना सबसे बड़ा पाखंड, पाखंड नही लगता है फिर निर्मल बाबा अपने अनेको बेंक खातों का एकाउंट नम्बर देते है और उसमे लोगो को अपनी आमदनी का 10% राशि को जमा करने के निर्देश देते है साथियों अपने आप पर विश्वास करे.. अपना प्रकाश स्वयं बने…. आत्मविश्वास ही इंसान को आगे बडने की प्रेरणा देता है…..आत्म विश्वास बनाए रखे…

  3. पाखंडियों के पोषक देश में एक और पाखंडी का पदार्पण हुआ है . वे है ***निर्मल बाबा ? जो आजकल टी.वी. पर खूब छाए हुए है . लोग उनके दरबार में लाचार , हीनभावना से ग्रस्थ , रोते – गिडगिडाते नजर आते है , इन लोगो को देखकर लगता है की उनमे आत्म विश्वास की कमी है और बिना कुछ किये सबकुछ मिलाने की कामना लिए हुए आते है ……. निर्मल बाबा लोगो को अपना पर्श खुला रखने कहते है और हाथ ऊपर उठाकर आशीर्वाद देते हुए कहते की " ये शक्ति आपको सब परेशानी से मुक्त कर देगी " उनके हाथ उठाने से ही दरबार में बैठे लोगो तक शक्ति का संचार होता है ….? कोई हादसे से बचाता है तो वह निर्माल बाबा ही है , कोई नौकरी मिलाती है तो वह निर्माल बाबा के कारन , कोई बिमारी से बचाता है तो वह निर्माल बाबा ही बचाते है , कोई परीक्षा में अच्छे नम्बर लाता है तो वह निर्मल बाबा की शक्ति का कमाल होता है …… लोग अपना अपना एक्सिपिरेंस इस तरह की बाते कहते हुए रो -रोकर बताते है . . आश्चर्य तो तब होता है की निर्मल बाबा जादू टोना ,टोटको , तंत्र मंत्र को तो पाखंड कहते रहते है कितु उनको अपना सबसे बड़ा पाखंड, पाखंड नही लगता है फिर निर्मल बाबा अपने अनेको बेंक खातों का एकाउंट नम्बर देते है और उसमे लोगो को अपनी आमदनी का 10% राशि को जमा करने के निर्देश देते है साथियों अपने आप पर विश्वास करे …!!! अपना प्रकाश स्वयं बने …. आत्मविश्वास ही इंसान को आगे बडने की प्रेरणा देता है …..आत्म विश्वास बनाए रखे …

  4. पाखंडियों के पोषक देश में एक और पाखंडी का पदार्पण हुआ है . वे है ***निर्मल बाबा ? जो आजकल टी.वी. पर खूब छाए हुए है . लोग उनके दरबार में लाचार , हीनभावना से ग्रस्थ , रोते – गिडगिडाते नजर आते है , इन लोगो को देखकर लगता है की उनमे आत्म विश्वास की कमी है और बिना कुछ किये सबकुछ मिलाने की कामना लिए हुए आते है ……. निर्मल बाबा लोगो को अपना पर्श खुला रखने कहते है और हाथ ऊपर उठाकर आशीर्वाद देते हुए कहते की " ये शक्ति आपको सब परेशानी से मुक्त कर देगी " उनके हाथ उठाने से ही दरबार में बैठे लोगो तक शक्ति का संचार होता है ….? कोई हादसे से बचाता है तो वह निर्माल बाबा ही है , कोई नौकरी मिलाती है तो वह निर्माल बाबा के कारन , कोई बिमारी से बचाता है तो वह निर्माल बाबा ही बचाते है , कोई परीक्षा में अच्छे नम्बर लाता है तो वह निर्मल बाबा की शक्ति का कमाल होता है …… लोग अपना अपना एक्सिपिरेंस इस तरह की बाते कहते हुए रो -रोकर बताते है . . आश्चर्य तो तब होता है की निर्मल बाबा जादू टोना ,टोटको , तंत्र मंत्र को तो पाखंड कहते रहते है कितु उनको अपना सबसे बड़ा पाखंड, पाखंड नही लगता है फिर निर्मल बाबा अपने अनेको बेंक खातों का एकाउंट नम्बर देते है और उसमे लोगो को अपनी आमदनी का 10% राशि को जमा करने के निर्देश देते है साथियों अपने आप पर विश्वास करे …!!! अपना प्रकाश स्वयं बने …. आत्मविश्वास ही इंसान को आगे बडने की प्रेरणा देता है …..आत्म विश्वास बनाए रखे …

  5. Abhay Singh Somvansi says:

    jai ho baba ki

  6. Abhay Singh Somvansi says:

    jai ho baba ki

  7. Abhay Singh Somvansi says:

    jai ho baba ki

  8. Abhay Singh Somvansi says:

    jai ho baba ki

  9. log itne andhvishvasi kaise hote he…unhe bi smjna chahie ki hme hmare karmo ka hi fal milta he…isly achcha karm karien ni to ye sadhu- mahatma ke nam pe hme aise hi chalte rahenge ….

  10. un logon ko iss lekh ko bi padha chahiye,jinohone taajmahal vale pe prashn khada kiya tha evm unko smj ane ki jarurat he ki aap muslim virodhi ni ho…qki nirmal baba to hindu he…jo galat karega usi pe prashn khada hoiega..???

  11. Esko baba ku khate hi . Ye baba hi to ; God kise khi

  12. Esko baba ku khate hi . Ye baba hi to ; God kise khi

  13. Abhay Singh Somvansi says:

    nirmal baba ki jai

  14. Mukesh Guru,bhopal says:

    किसी का भला हो न हो बाबाजी ने अपना भला तो कर लिया है आज के इस दौर में बाबाजी बनना और मासूम ,परेशान जनता को बेबकूफ बनाना बुत आसान है भाई में तो सिर्फ कर्म पर विश्वास करता हु,वो भी सत्कर्म इसका परिणाम तुरंत मिलाता है ,न्यूज चैनल वालों को भी इससे कमी ही हो रही है नुकसान तो सिर्फ जनता का ही हो रहा है सब कम छोड़ कर बाबाजी के नुस्खे अपना रहेस है जो पहले कृपा हो रही थी वो भी नहीं हो रहिओ है अतः में सबसे निवेदन करूंगा कि ये सब छोडो और मेहनत करो बिना मेहनत और परिश्रम के कोई कृपा नहीं होगी.

    जागो जनता जागो

  15. लोगों को प्रीपेड कृपा रूपी अदृश्य चीज़ बेचने वाले निर्मल बाबा पर अब चारों तरफ से हमले होने शुरू हो गए हैं. सब से ज्यादा हमले सोशल नेटवर्क के ज़रिये होने लगे हैं. देर आये दुरुस्त आये, लोगों की आँखें खुलनी शुरू हो गयी हैं. कई भुक्तभोगी जो अपनी आप बीती सुना चुके है कि किस तरह बाबा ने उन पर कृपा करने का वायदा कर के उन से पैसे ऐंठ लिए मगर ऐसा कुछ फर्क उन की जिंदगी में नहीं पड़ा अलबत्ता उन की माली हालत और बिगड़ ज़रूर गयी . अपने साथ हुए धोखे से क्रुद्ध लोगों ने अब बाबा के खिलाफ आवाज़ उठाने शुरू कर दिए हैं. जिस समागम में भाग लेने के लिए पीड़ित को प्रीपेड शुल्क दो हज़ार रूपी प्रति व्यक्ति के हिसाब से चुकाना पड़ता है जो कि महीने में करीब 17 बार आयोजित किये जाते हैं और हर बार कम से कम 2500 लोग भाग लेते हैं. समागम में बाबा एक विशाल AC वाले हाल में या स्टेडियम में लोगो के दुःख दूर करने का काम करने लगते हैं. वहां पर बाबा के मंझे हुए चेले उर्फ़ कलाकार बड़े ही मार्मिक ढंग से अपनी आपबीती सुनाना शुरू कर देते हैं , मसलन किसी की शादी नहीं हो रही है तो उसे बाबा जी लड्डू खाने का उपाय सुझाते हैं , किसी का बच्चा नहीं हो रहा तो उसे गोलगप्पे खाने की सलाह देते नज़र आते हैं. इस तरह कुछ ही घंटों का समागम का वक्त बाबा के ही चेले ड्रामा करते हुए बिता देते हैं और जो दो- दो हज़ार की पर्चियां काट कर दूर से सफ़र कर के आये हुए दुःख से पीड़ित लोगों को अपना दुखड़ा तक सुनाने का अवसर नहीं मिल पाता. दरअसल यह सब निश्चित प्लानिंग के तहत होता है ताकि कोई बाहरी भक्त फालतू के सवाल खड़ा न कर दे. ऐसे में बाबा के चरणों में अपना धन और समय अर्पित करने वाला भक्त अपने आप को ठगा सा महसूस करने लगता है. चलो देर से ही सही मगर ठोकर खाने के बाद असलियत समझ में आने लगता है. मैं ऐसे कई भक्तों को जानती हूँ जिन्हों ने अपना समय और धन खर्च कर के बाबा जी से कृपा लेने चल दिए थे मगर बाबा जी ने उन की तरफ ध्यान तक नहीं दिया….lolll

  16. निर्मल बाबा के भारत के १६ राष्ट्रीय चैनलों, और ३ विदेशी चैनलों पर विदेशों में कार्यक्रम चल रहे है. केवल आस्था पर बीस मिनट का मासिक व्यय सवा चार लाख+टेक्स है, तो अन्य राष्ट्रीय समाचार चैनलों पर कितना लगता होगा?

    समाचार चैनल्स को विज्ञापन रूपी कार्यक्रम (पेड प्रोग्राम) के रूप मिलने से वे अपने "क्लाइंट" नहीं खोना चाहते, इस से निर्मल बाबा के खिलाफ कोई खबर नहीं चलती…. क्या ये सच है? (बताते चलें, बाबा का हर प्रमुख न्यूज़ चैनल पर सुबह प्रोग्राम आता है.

    बाबा के समाधान का एक उदहारण देखिये : आपके घर में गणेश जी की मूर्ती है? अकेली है? नहीं..तो अकेली लगाओ.. हाँ तो लक्ष्मी जी के साथ लगाओ, इस से समृद्धि आएगी… दक्षिण में है तो उत्तर में लगाओ, उत्तर में है तो दक्षिण में लगाओ… खड़े है तो बैठे हुए गणेशजी लगाओ… बैठे है तो खड़े गणेश जी लाओ… क्या आपने इस स्थिति को महसूस नहीं किया?

    19 विभिन्न चैनल्स, जिसमे सोनी, ज़ी, स्टार ऐसे नेटवर्क है,जिनके मिडल ईस्ट, आसिया पेसिफिक,भी शामिल कर रहा हूँ, पर दिन मे कुल 33 बार बार के प्रोग्राम चलते है. एक प्रोग्राम का औसतन खर्च चार लाख मासिक है (33 से गुना स्वयं कर लीजिए. यह राशि 1 करोड़ बत्तीस लाख रुपये मासिक बनती है.

    बाबा के आने वाले माह अप्रेल मे कुल 17 जगह समागम है. औसतन एक जगह 2500 लोगो को एंट्री मिलती है. 2500 का 2000 प्रति व्यक्ति गुना करने पर 50 लाख की राशि सीधे सीधे टिकट से मिल जाती है. इसके बाद चढ़ावे और व्यक्तिगत मिलन की तो बात ही नही कर रहा. अब अगर 17 कार्यक्रम का 50लाख से गुना करूँगा तो…. साढ़े आठ करोड़ से उपर जाएगा. इसमे स��� सवा करोड़ टीवी वालो को दे दिए तो भी कम से कम 7 करोड़ एक महीने के बचे. अब आप ही बताइए, इनमे से हाल बुकिंग, कर्मचारी वेतन निकालने के बाद बाबा कितना कमा रहा होगा… बाबा के दरबार मे दो साल के child का भी पूरा टिकट लगता है.

    हिंदुत्व और सनातन धर्म को ऐसे नकली बाबाओ ने बहुत ही नुक्सान पहुचाया है, जिसके कारण से असली सन्यासियों पर से भी बहुत लोगो का विश्वाश उठ गया है!

  17. Kushal Pal says:

    is side ko koi nhi janta tha trp batorne ka fanda h.

  18. Shashi Dutt Sharma says:

    jo kuch bhi hai ,

    jo kuch bhi ho raha hai, jo kuch bhi hoga wo eshwar ki marji se hoga to phir es vedon , purano aur shastra vachan ko torne wala yes nirmal baba kaun hai.

  19. shagun ji aapke article se mai 100% sehmat hu mai news channel mai iss baba k dhong ko dekhkar bahut pareshan ho gaya tha mai sochne lagaa ki yes news channel bharmit karne ka kaam kyu kar rahe hai lekin aap jaise reporter b hai jo fact baat karte hai isliye patrkarita mai vishvaash banaa hua hai aage aapko yes b bataana chahunga ki ndtv india ek aisa channel hai jo koi b jyotish chamatkar grah nakhstra k programe nahi dikhata aap b kisi aise channel mai kaam kariye aap jaise reporter k liye ndtv india channel best hai.
    thanx
    Manmohan Singh Negi Ph.9811820146,8800622246.

  20. जो टीवी चैनल निर्मल बाबा की तीसरी आंख दिखा रहे हैं उनको हम सिर्फ़ देखना ही बन्द न करें बल्कि औरों को न देखने के लिए भी प्रेरित करें। उन चैनलों के फ़ोन और ई-मेल पते पर सन्देश भेजकर भी विरोध दर्ज कराने से ही बात बनेगी। इसके अलावा अखबारों में पाठकों के पत्र कॉलम में पोस्ट कार्ड या ई-मेल द्वारा भी अपनी बात लोगों तक पहंचाएं। उल्लेखनीय है कि निर्मल बाबा की धन कृपा टीवी चैनलों पर ही बरस रही है जो लोगों को जागरूक बनाने की बजाय अन्धविश्वासी या कहें बेवकूफ़ बना रहे हैं। सो व्यापक जनहित में आप इसका विरोध करें- यों ज्यादातर लोग यही कहते मिलेंगे कि दिखाने दो मेरे बाप का क्या जाता है…यदि आप सक्रिय होकर कुछ करेंगे तो कुछ तो होगा!

  21. B L TIWARI says:

    ye jo nirmal bataye jaay rahe hai sahi mayne mai kewal mal hi mal lagaye baithe hai ye pai se karide maneij kiye hooye kiraye ke t v orr rang manncha ke log hai jo baba ke samne khade ho kar likhe likhaye dialog boltee hai orr sidhe saadhe longo ko bebakuf banate hai ye choro ka giroh hai

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