/बढ़ सकती हैं निर्मल बाबा की मुश्किलें, नाराज भक्त पहुंचे पुलिस के दरबार में

बढ़ सकती हैं निर्मल बाबा की मुश्किलें, नाराज भक्त पहुंचे पुलिस के दरबार में

लगता है निर्मल बाबा की थर्ड आई के दायरे के साथ-साथ उनकी मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस फिलहाल वहां के एक नागरिक की शिक़ायत पर बाबा के ढकोसले की जांच करने में जुटी है। इस पुराने भक्त ने दावा किया है कि उसने टीवी पर बाबा द्वारा बताए गए नुस्खों पर अमल किया था तो उसे फ़ायदा होने की बजाय नुकसान ही हो गया। इतना ही नहीं, इस नाराज़ भक्त ने बाबा पर उसकी संवेदनाओं को ठेस पहुंचाने का भी आरोप लगाया है।

दरअसल छत्तीसगढ़ के सुन्दर नगर में रहने वाले योगेन्द्र शंकर शुक्ला खुद को निर्मल बाबा का कट्टर भक्त मानते थे। उन्होंने बाबा का शो टीवी पर पूरी श्रद्धा पूर्वक देखा और उसमें बताए गए नुस्खों को अमल में भी लाए। शुक्ला का कहना है कि उन्होंने बाबा जी के कहे अनुसार दस रुपए के नए नोटों की गड्डी भी अलमारी में रखी, लेकिन बजाय फ़ायदा होन के उन्हें नुकसान ही होने लगा।

शुक्ला ने रायपुर के डीडी नगर थाने में दी गई तहरीर में लिखा है कि थर्ड आई ऑफ निर्मल बाबा नाम के कार्यक्रम ने उन्हें खासा उद्वेलित किया है क्योंकि इसमें बाबा जी को भगवान के बराबर बताया गया है। उन्होंने बाबा जी के टीवी कार्यक्रमों को समागम में बुलाने के लिए ‘उकसाने वाला’ बताया है और सवाल पूछा है कि अगर वे खुद को भगवान बताते हैं तो दर्शनार्थियों से प्रवेश शुल्क क्यों वसूलते हैं? उन्होंने लिखा है, ‘ईश्वरीय शक्तियां कभी बेची नहीं जातीं। शक्तियां जनकल्याण के लिए होती हैं, न कि धनोपार्जन के लिए।”

शुक्ला ने निर्मल बाबा के उस आह्वान पर भी ऐतराज़ जताया है जिसमें घरों में शिवलिंग न रखने की बात कही गई है। उन्होंने खुद को शिवजी का उपासक बताया है और लिखा है कि बाबा जी के कथनों से उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। शुक्ला के मुताबिक निर्मल बाबा द्वारा बताए गए उपाय किसी शास्त्र, धर्म या संप्रदाय में उल्लेख नहीं है और वे दुखी जनों के साथ और धोखा कर रहे हैं।

योगेन्द्र शंकर शुक्ला ने पुलिस से अपील की है कि वे थर्ड आई ऑफ निर्मल बाबा को रोकें और बाबा के खिलाफ उचित कार्रवाई करें। जब मीडिया दरबार ने पुलिस अधीक्षक दीपांशु काबरा से संपर्क साधने की कोशिश की तो उन्होंने फोन नहीं उठाया, लेकिन थाना प्रभारी परमानंद शुक्ला ने बताया कि पुलिस ने तहरीर पर तफ्तीश शुरु कर दी है तथा साक्ष्य एकत्रित किए जा रहे हैं।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.