/स्टार न्यूज़ ने विज्ञापन के बावज़ूद अपने चैनल पर खोला निर्मल बाबा का कच्चा चिट्ठा

स्टार न्यूज़ ने विज्ञापन के बावज़ूद अपने चैनल पर खोला निर्मल बाबा का कच्चा चिट्ठा

भक्तों पर कृपा करते-करते निर्मल बाबा बने करोड़पति

निर्मल बाबा आजकल काफी चर्चा में हैं. निर्मल बाबा देश के अलग-अलग शहरों में समागम करते हैं. इन समागमों में वे अपने भक्तों के दुख दूर करने का दावा करते हैं. इस समागम में बाबा लोगों को चौंकाने वाले उपाय बताते हैं लेकिन निर्मल बाबा की इन बातों पर उठ रहे हैं सवाल. हर कोई जानना चाहता है निर्मल बाबा उर्फ निर्मल सिंह नरूला का पूरा सच. स्टार न्यूज़ ने पड़ताल की और पता की निर्मल बाबा की हकीकत.

निर्मल बाबा की कमाई

तमाम टीवी चैनल पर दिखने वाला ‘थर्ड आई ऑफ निर्मल बाबा’ कार्यक्रम जैसे जैसे लोकप्रिय हो रहा है वैसे-वैसे उनके समागम कार्यक्रम की शोहरत भी बढ़ रही है. निर्मल बाबा के किसी भी समागम कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भक्तों को दो हजार रुपये की फीस चुकानी पड़ती है और वो भी महीनों पहले. जिसे जरूरत हो और यकीन भी, वो कीमत चुकाए और निर्मल बाबा के दरबार में पहुंच जाए.

निर्मल बाबा की आधिकारिक वेबसाइट nirmalbaba.com खोलते ही आपको बाईं ओर नजर आ जाएगी समागम कार्यक्रमों की ये सूची, जिसमें दर्ज है समागम की जगह और तारीख. इसी सूची के आगे लिखा रहता है ओपेन या क्लोज्ड और स्टेटस यानी बुकिंग चालू है या बंद हो चुकी है. आने वाले महीनों के सभी समागम कार्यक्रमों की एडवांस बुकिंग फिलहाल बंद दिखाई दे रही है. वेबसाइट के पहले ही पन्ने पर इसकी फीस और इसे जमा कराने का तरीका भी दर्ज है.

समागम कार्यक्रम के लिए 2000 रुपये प्रतिव्यक्ति जमा कराने होते हैं. समागम में आने वाले दो साल की उम्र से बड़े बच्चों से भी इतनी ही रकम ली जाती है. ये फीस निर्मल दरबार के नाम पर ली जाती है. फीस जमा कराने के लिए वेबसाइट पर निर्मल दरबार के दो एकाउंट नंबर भी दिए गए हैं. ये एकाउंट नंबर टीवी के थर्ड आई ऑफ निर्मल दरबार कार्यक्रम के दौरान भी प्रचारित किए जाते हैं.

इन एकाउंट्स में नगद, डिमांड ड्राफ्ट या फिर निर्मल दरबार के विशेष चालान से फीस जमा की जा सकती है, लेकिन समागम की फीस के लिए चेक नहीं लिए जाते हैं. अब ऐसे समागम कार्यक्रम से निर्मल बाबा की संस्था निर्मल दरबार को होने वाली कमाई का अनुमान भी लगा लीजिए. निर्मल बाबा के एक समागम में करीब पांच हजार भक्त शामिल होते हैं. 2000 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से एक समागम से कमाई हुई करीब एक करोड़ रुपए. हर महीने औसतन सात से दस समागम कार्यक्रम होते हैं. वेबसाइट की सूची पर नजर डालें तो अप्रैल महीने में ही सात समागम कार्यक्रम हो रहे हैं.

इस हिसाब से सात समागमों की कमाई हुई सात करोड़ रुपये. अनुमान है कि साल भर में 84 करोड़ रुपये की कमाई हो रही है.हालांकि इस बारे में कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है.

दसवंद कार्यक्रम से कमाई

आप अगर ये अनुमान देखकर चौंक गए हों तो आपको बता दें कि निर्मल दरबार सिर्फ समागम ही आयोजित नहीं करता. निर्मल दरबार दसवंद नाम से एक और कार्यक्रम भी आयोजित करता है. निर्मल बाबा की कृपा से किसी समस्या के समाधान हो जाने पर भक्त को अपनी कमाई का दसवां हिस्सा दसवंद के तौर पर देना होता है लेकिन इसके लिए कोई दबाव नहीं डाला जाता. निर्मल बाबा के लिए आस्था रखनेवाले लोग अपनी कमाई या लाभ का दसवां हिस्सा हर महीने पूर्णिमा से पहले जमा करवा देते हैं.

इसके अलावा अगर आप निर्मल दरबार की वेबसाइट पर मौजूद निर्मल दरबार का बैंक चालान देखेंगे तो पाएंगे कि भक्तों को निर्मल बाबा की कृपा पाने के लिए हर मौके पर जेब ढीली करनी पड़ती है.

निर्मल दरबार का खर्च

समागम कार्यक्रम किसी बड़े हॉल या इंडोर स्टेडियम में आयोजित किए जाते हैं. इनका किराया और कार्यक्रम के पूरे आयोजन पर पैसे खर्च होते हैं. इसके अलावा निर्मल दरबार परिवार ‘थर्ड आई ऑफ निर्मल बाबा’ के नाम से विज्ञापन बनवाता है जिसमें समागम कार्यक्रमों की झलकियां होती हैं.

विज्ञापनों के प्रसारण के लिए उसे पैसे खर्च करने पड़ते हैं. इसके अलावा निर्मल बाबा की संस्था निर्मल दरबार के दफ्तर और वेबसाइट जैसी गतिविधियों को चलाने का खर्च भी है. लेकिन किस मद में कितना खर्च हो रहा है और भक्तों से हुई बाकी कमाई का लेखा-जोखा क्या है इसका कोई खुलासा निर्मल बाबा की वेबसाइट पर नहीं है, हांलाकि निर्मल बाबा के करीबी रिश्तेदार और चातरा से निर्दलीय सांसद इंदर सिंह नामधारी के मुताबिक निर्मल बाबा अपनी कमाई पर टैक्स चुका रहे हैं.

स्टार न्यूज ने निर्मल बाबा की संस्था से साल भर में होने वाले समागम कार्यक्रमों, उनमें आने वाले भक्तों के साथ-साथ सालाना कमाई के बारे में जानकारी भी मांगी लेकिन फिलहाल निर्मल बाबा या निर्मल दरबार के किसी प्रतिनिधि ने स्टार न्यूज से बात नहीं की है.

(स्टार न्यूज़ की वेबसाइट से साभार)

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.