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स्टार न्यूज़ ने विज्ञापन के बावज़ूद अपने चैनल पर खोला निर्मल बाबा का कच्चा चिट्ठा

By   /  April 13, 2012  /  16 Comments

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भक्तों पर कृपा करते-करते निर्मल बाबा बने करोड़पति

निर्मल बाबा आजकल काफी चर्चा में हैं. निर्मल बाबा देश के अलग-अलग शहरों में समागम करते हैं. इन समागमों में वे अपने भक्तों के दुख दूर करने का दावा करते हैं. इस समागम में बाबा लोगों को चौंकाने वाले उपाय बताते हैं लेकिन निर्मल बाबा की इन बातों पर उठ रहे हैं सवाल. हर कोई जानना चाहता है निर्मल बाबा उर्फ निर्मल सिंह नरूला का पूरा सच. स्टार न्यूज़ ने पड़ताल की और पता की निर्मल बाबा की हकीकत.

निर्मल बाबा की कमाई

तमाम टीवी चैनल पर दिखने वाला ‘थर्ड आई ऑफ निर्मल बाबा’ कार्यक्रम जैसे जैसे लोकप्रिय हो रहा है वैसे-वैसे उनके समागम कार्यक्रम की शोहरत भी बढ़ रही है. निर्मल बाबा के किसी भी समागम कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भक्तों को दो हजार रुपये की फीस चुकानी पड़ती है और वो भी महीनों पहले. जिसे जरूरत हो और यकीन भी, वो कीमत चुकाए और निर्मल बाबा के दरबार में पहुंच जाए.

निर्मल बाबा की आधिकारिक वेबसाइट nirmalbaba.com खोलते ही आपको बाईं ओर नजर आ जाएगी समागम कार्यक्रमों की ये सूची, जिसमें दर्ज है समागम की जगह और तारीख. इसी सूची के आगे लिखा रहता है ओपेन या क्लोज्ड और स्टेटस यानी बुकिंग चालू है या बंद हो चुकी है. आने वाले महीनों के सभी समागम कार्यक्रमों की एडवांस बुकिंग फिलहाल बंद दिखाई दे रही है. वेबसाइट के पहले ही पन्ने पर इसकी फीस और इसे जमा कराने का तरीका भी दर्ज है.

समागम कार्यक्रम के लिए 2000 रुपये प्रतिव्यक्ति जमा कराने होते हैं. समागम में आने वाले दो साल की उम्र से बड़े बच्चों से भी इतनी ही रकम ली जाती है. ये फीस निर्मल दरबार के नाम पर ली जाती है. फीस जमा कराने के लिए वेबसाइट पर निर्मल दरबार के दो एकाउंट नंबर भी दिए गए हैं. ये एकाउंट नंबर टीवी के थर्ड आई ऑफ निर्मल दरबार कार्यक्रम के दौरान भी प्रचारित किए जाते हैं.

इन एकाउंट्स में नगद, डिमांड ड्राफ्ट या फिर निर्मल दरबार के विशेष चालान से फीस जमा की जा सकती है, लेकिन समागम की फीस के लिए चेक नहीं लिए जाते हैं. अब ऐसे समागम कार्यक्रम से निर्मल बाबा की संस्था निर्मल दरबार को होने वाली कमाई का अनुमान भी लगा लीजिए. निर्मल बाबा के एक समागम में करीब पांच हजार भक्त शामिल होते हैं. 2000 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से एक समागम से कमाई हुई करीब एक करोड़ रुपए. हर महीने औसतन सात से दस समागम कार्यक्रम होते हैं. वेबसाइट की सूची पर नजर डालें तो अप्रैल महीने में ही सात समागम कार्यक्रम हो रहे हैं.

इस हिसाब से सात समागमों की कमाई हुई सात करोड़ रुपये. अनुमान है कि साल भर में 84 करोड़ रुपये की कमाई हो रही है.हालांकि इस बारे में कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है.

दसवंद कार्यक्रम से कमाई

आप अगर ये अनुमान देखकर चौंक गए हों तो आपको बता दें कि निर्मल दरबार सिर्फ समागम ही आयोजित नहीं करता. निर्मल दरबार दसवंद नाम से एक और कार्यक्रम भी आयोजित करता है. निर्मल बाबा की कृपा से किसी समस्या के समाधान हो जाने पर भक्त को अपनी कमाई का दसवां हिस्सा दसवंद के तौर पर देना होता है लेकिन इसके लिए कोई दबाव नहीं डाला जाता. निर्मल बाबा के लिए आस्था रखनेवाले लोग अपनी कमाई या लाभ का दसवां हिस्सा हर महीने पूर्णिमा से पहले जमा करवा देते हैं.

इसके अलावा अगर आप निर्मल दरबार की वेबसाइट पर मौजूद निर्मल दरबार का बैंक चालान देखेंगे तो पाएंगे कि भक्तों को निर्मल बाबा की कृपा पाने के लिए हर मौके पर जेब ढीली करनी पड़ती है.

निर्मल दरबार का खर्च

समागम कार्यक्रम किसी बड़े हॉल या इंडोर स्टेडियम में आयोजित किए जाते हैं. इनका किराया और कार्यक्रम के पूरे आयोजन पर पैसे खर्च होते हैं. इसके अलावा निर्मल दरबार परिवार ‘थर्ड आई ऑफ निर्मल बाबा’ के नाम से विज्ञापन बनवाता है जिसमें समागम कार्यक्रमों की झलकियां होती हैं.

विज्ञापनों के प्रसारण के लिए उसे पैसे खर्च करने पड़ते हैं. इसके अलावा निर्मल बाबा की संस्था निर्मल दरबार के दफ्तर और वेबसाइट जैसी गतिविधियों को चलाने का खर्च भी है. लेकिन किस मद में कितना खर्च हो रहा है और भक्तों से हुई बाकी कमाई का लेखा-जोखा क्या है इसका कोई खुलासा निर्मल बाबा की वेबसाइट पर नहीं है, हांलाकि निर्मल बाबा के करीबी रिश्तेदार और चातरा से निर्दलीय सांसद इंदर सिंह नामधारी के मुताबिक निर्मल बाबा अपनी कमाई पर टैक्स चुका रहे हैं.

स्टार न्यूज ने निर्मल बाबा की संस्था से साल भर में होने वाले समागम कार्यक्रमों, उनमें आने वाले भक्तों के साथ-साथ सालाना कमाई के बारे में जानकारी भी मांगी लेकिन फिलहाल निर्मल बाबा या निर्मल दरबार के किसी प्रतिनिधि ने स्टार न्यूज से बात नहीं की है.

(स्टार न्यूज़ की वेबसाइट से साभार)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

16 Comments

  1. Fani Kumar says:

    Shabka malik ak

  2. Fani Kumar says:

    Shabka malik ak

  3. Fani Kumar says:

    Shabka milik ak

  4. Atul Agarwal says:

    निर्मल सिंह निरुला अपने तथाकथित भक्तों के सामने दावा करता है कि उसके किसी भी भक्त पर कोई बुरी नज़र डालेगा तो ये तथाकथित बाबा उसका निपटारा बैठे बैठे कर देगा और अपने भक्त पर कोई आंच नहीं आने देगा.मैं ते पूछता हूँ इस ढोंगी से कि जब तुम्हारे बैंक खाते से कोई फर्जी तरीके से रुपये निकल लिया तो क्यों गए पुलिस के पास ,कर देते निपटारा बैठे बैठे.
    तुम दावा करते हो कि तुम अपने हर भक्त के घर जाते हो ,जब भी कोई भक्त तुम्हारे सामने आता है तो तुम्हे उसका सारा इतिहास भूगोल उसका भूत भविष्य पता होता है तब तुम क्यों पूछते हो कि कौन कहाँ से आया है और क्या करता है किसने कब क्या खाया, क्या पहना,कब कहाँ गया.
    मीडिया दरबार ने तुम्हारे खिलाफ एक मुहीम छेड़ी तो तुमने कानूनी नोटिस भिजवा दी.कर देते इनका हिसाब किताब अपनी जगह से बैठे बैठे.मैं ये पूछता हूँ कि जब तुम अपने ऊपर आने वाले थपेड़ो से अपनी रक्षा स्वयं नहीं कर सकते हो,इसके लिए तुम पुलिस और कानून के पास जाते हो तो भक्तो से उनकी रक्षा करने का दावा कैसे करते हो?
    आधे घंटे के टीवी विज्ञापन में सिवाय पैसे के दूसरी कोई बात तुम नहीं करते हो तो मैं ये पूछता हूँ कि बाबा और पैसे का क्या मेल?
    तुम दावा करते हो कि तुम्हारे लिए सब धर्म एक सामान है ,अच्छी बात है.तुम तो सिख थे फिर तुमने अपने केश क्यों कटवाए और सिख धर्म क्यों छोड़ा.क्योकि सिख धर्म में ऐसा पाखंड स्वीकार्य नहीं है इसलिए अपना लिया हिन्दू धर्म.तुम जैसे पाखंडियों ने हिन्दू धर्म को बहूत सस्ता बना दिया है. दोष तो हम लोगों का है जो अपने लालच के कारण तुम जैसे पाखंडियों को भगवान मान बैठते हैं और हम खुद ही ऐसे पाखंड के खिलाफ उठने वाली आवाज़ को इर्ष्या का नाम देते हैं.मैं दावा करता हूँ कि जिस दिन हिन्दू जाग गया उस दिन तुम जैसे पाखंडियों को मूह छिपाने कि जगह भी नहीं मिलेगी.
    गीता में साफ लिखा है कि हर इंसान को उसके कर्मों के अनुसार फल मिलता है लेकिन तुम तो भाई हर किसी पर कृपा करने का दावा करते हो पैसे ले कर.क्या तुम्हारी कृपा इतनी सस्ती है कि जो चाहे ले लो बस पैसे देते जाओ.क्योंकी तुम्हारे एक विज्ञापन में मैंने सुना था कि एक इंसान ने जब ये कहा कि उसने दश्वंद के लिए निकला हुआ पैसा खर्च कर दिया तब तुमने उसके ऊपर भगवान की कृपा रोक देने का दावा किया था.तुम क्या भगवान के रिकवरी एजेंट समझते तो अपने आप को.

  5. Atul Agarwal says:

    निर्मल सिंह निरुला अपने तथाकथित भक्तों के सामने दावा करता है कि उसके किसी भी भक्त पर कोई बुरी नज़र डालेगा तो ये तथाकथित बाबा उसका निपटारा बैठे बैठे कर देगा और अपने भक्त पर कोई आंच नहीं आने देगा .मैं ते पूछता हूँ इस ढोंगी से कि जब तुम्हारे बैंक खाते से कोई फर्जी तरीके से रुपये निकल लिया तो क्यों गए पुलिस के पास ,कर देते निपटारा बैठे बैठे.
    तुम दावा करते हो कि तुम अपने हर भक्त के घर जाते हो ,जब भी कोई भक्त तुम्हारे सामने आता है तो तुम्हे उसका सारा इतिहास भूगोल उसका भूत भविष्य पता होता है तब तुम क्यों पूछते हो कि कौन कहाँ से आया है और क्या करता है किसने कब क्या खाया, क्या पहना,कब कहाँ गया .
    मीडिया दरबार ने तुम्हारे खिलाफ एक मुहीम छेड़ी तो तुमने कानूनी नोटिस भिजवा दी.कर देते इनका हिसाब किताब अपनी जगह से बैठे बैठे .मैं ये पूछता हूँ कि जब तुम अपने ऊपर आने वाले थपेड़ो से अपनी रक्षा स्वयं नहीं कर सकते हो,इसके लिए तुम पुलिस और कानून के पास जाते हो तो भक्तो से उनकी रक्षा करने का दावा कैसे करते हो?
    आधे घंटे के टीवी विज्ञापन में सिवाय पैसे के दूसरी कोई बात तुम नहीं करते हो तो मैं ये पूछता हूँ कि बाबा और पैसे का क्या मेल ?
    तुम दावा करते हो कि तुम्हारे लिए सब धर्म एक सामान है ,अच्छी बात है .तुम तो सिख थे फिर तुमने अपने केश क्यों कटवाए और सिख धर्म क्यों छोड़ा.क्योकि सिख धर्म में ऐसा पाखंड स्वीकार्य नहीं है इसलिए अपना लिया हिन्दू धर्म .तुम जैसे पाखंडियों ने हिन्दू धर्म को बहूत सस्ता बना दिया है. दोष तो हम लोगों का है जो अपने लालच के कारण तुम जैसे पाखंडियों को भगवान मान बैठते हैं और हम खुद ही ऐसे पाखंड के खिलाफ उठने वाली आवाज़ को इर्ष्या का नाम देते हैं .मैं दावा करता हूँ कि जिस दिन हिन्दू जाग गया उस दिन तुम जैसे पाखंडियों को मूह छिपाने कि जगह भी नहीं मिलेगी.
    गीता में साफ लिखा है कि हर इंसान को उसके कर्मों के अनुसार फल मिलता है लेकिन तुम तो भाई हर किसी पर कृपा करने का दावा करते हो पैसे ले कर .क्या तुम्हारी कृपा इतनी सस्ती है कि जो चाहे ले लो बस पैसे देते जाओ .क्योंकी तुम्हारे एक विज्ञापन में मैंने सुना था कि एक इंसान ने जब ये कहा कि उसने दश्वंद के लिए निकला हुआ पैसा खर्च कर दिया तब तुमने उसके ऊपर भगवान की कृपा रोक देने का दावा किया था .तुम क्या भगवान के रिकवरी एजेंट समझते तो अपने आप को .

  6. Atul Agarwal says:

    किसी भी मजबूरी के कारण ही सही चलो आँख तो खुली किसी मीडिया की.आज स्टार न्यूज़ को इस ढोंगी का ढोंग दिखाई देने लग गया.इतने महीनों तक तो इस पाखंडी के साथ मिलकर लोगों को लूटते रहे और आज साधू बनने की कोशिश कर रहे हैं.हो सकता है विज्ञापन के प्रसारण का रेट बढाने को कहा होगा और उस पाखंडी ने नहीं बढाया होगा.कौन सा इस स्टार न्यूज़ ने प्रसारण बंद कर दिया?पैसा किसी को काटता है क्या?सोचते होंगे जब तक इस ढोंगी की पोल पूरी तरह नहीं खुल जाती तब तक बहती गंगा में हाथ धोते रहो.
    रही बात इस पाखंडी की तो मुझे लगता है कि इसको राजनैतिक संरक्षण भी मिला हुआ लगता है.क्योंकि धोखाधडी का खुल्लमखुल्ला इतना बड़ा खेल बिना ऊंचे सहयोग के नहीं चल सकता.मुझे तो ये लगता है कि यदि इस पाखंडी की पोल खुली तो हो सकता है कि कई लोग बेनकाब हो सकते हैं.

  7. ..Indian.. says:

    कौन कहता है, कि- बुद्धिजीवी बनिया नहीं बन सकता ? निर्मल बाबा के बारे में न्यूज़ चैनल्स पर खुलासे देख रहा था ! अजीब मुश्किलों का सामना करना पड़ा – मेरे दिमाग को ! सुबह यही चैनल्स उनका समागम (पैसे लेकर) दिखाते थे और अब शाम को उनकी धज्जियां उड़ाते ! एहसानफ़रामोशी का इस से ताज़ा नमूना देखने को नहीं मिला-लिहाजा ताज्जुब हुआ ! सुबह और शाम की सोच में इतना बड़ा फर्क ? या फिर सुबह नींद की अंगडाई में अंतार्त्मा भूल गयी कुछ कहना- और शाम को भड़ासिए अंदाज़ में शुरू ! बाज़ार में चीज़ें बिकती हैं – पर रंग भी इतनी तेज़ी से बदलती हैं, गुमान तक ना था ! दिल्ली की वादियों में ही रहकर , दूर-दृष्टी रख, पूरे हिन्दुस्तान का हाल बयां करने वाले हमारे चमत्कारी पत्रकारों को निर्मल बाबा के चमत्कार में खोट नज़र आया- सुबह नहीं, शाम को ! निर्मल बाबा को भी समझ आया- कि – उनसे भी बड़े चमत्कारी बाबा न्यूज़ चैनल्स में बैठे हैं, ! ऐसे बाबा- जो सुबह किसी का मुंह चमचमाता हुआ दिखा दें और रात होते-होते मुंह पर कालिख पोत दें ! निर्मल बाबा ने कोई साधना नहीं की- पर स्वयंभू बन बैठे ! गुरु घंटाल पत्रकारों की शरण में जाते तो सिद्ध हो जाते कि किसको कैसे साधना है ! गुरु के बिना उपासना का परिणाम बुरा होता है ! चमत्कारी (गुरु) पत्रकारों के बिना साधना का परिणाम , आज निर्मल बाबा को भोगना पड़ रहा है !
    बुजुर्गों का कहना है
    हर बात बिकती है- हर नशा बिकता है
    वो “सच” है- जो दिखता है
    सुबह कुछ -तो-शाम को कुछ कहने वाला चाहिए
    तजुर्बा नहीं – सिर्फ “दूर-दृष्टी” चाहिए
    ज़बान चाहिए और अंदाजेबयां का हुनर चाहिए
    इस लफ्फाजी के लिए एक अदद न्यूज़ चैनल्स चाहिए
    चमत्कारी पत्रकारों ने दिखा दिया अपना चमत्कार
    चुप क्यों हैं निर्मल बाबा- कुछ तो कहिये
    अंत में निर्मल बाबा कह दिए——-
    हर खरीदार को बाज़ार में बिकता पाया
    हम क्या पायेंगे- किसी ने यहाँ क्या पाया

  8. Atul Agarwal says:

    किसी भी मजबूरी के कारण ही सही चलो आँख तो खुली किसी मीडिया की.आज स्टार न्यूज़ को इस ढोंगी का ढोंग दिखाई देने लग गया.इतने महीनों तक तो इस पाखंडी के साथ मिलकर लोगों को लूटते रहे और आज साधू बनने की कोशिश कर रहे हैं.हो सकता है विज्ञापन के प्रसारण का रेट बढाने को कहा होगा और उस पाखंडी ने नहीं बढाया होगा.कौन सा इस स्टार न्यूज़ ने प्रसारण बंद कर दिया?पैसा किसी को काटता है क्या?सोचते होंगे जब तक इस ढोंगी की पोल पूरी तरह नहीं खुल जाती तब तक बहती गंगा में हाथ धोते रहो.
    रही बात इस पाखंडी की तो मुझे लगता है कि इसको राजनैतिक संरक्षण भी मिला हुआ लगता है.क्योंकि धोखाधडी का खुल्लमखुल्ला इतना बड़ा खेल बिना ऊंचे सहयोग के नहीं चल सकता.मुझे तो ये लगता है कि यदि इस पाखंडी की पोल खुली तो हो सकता है कि कई लोग बेनकाब हो सकते हैं.

  9. hamare country mein webkoof bahut hain, ek dhudoge to hajzar mil jayenge isi ke fayeda uthaya, nirmal singh narula ne yeh to fraud copmany ka boss hai.

  10. media darbar ko aise dhongi babao ki pol kholne hetu hardik badhai…

  11. amit says:

    साहसिक कदम है लेकिन जरुरी भी tha

  12. harish chandra says:

    aaj kal toh charo taraf har koi loot hi raha hai…..chahe wo mahengai ho, corruption ho ya phir sarkar Jo tax le rahi hai…..har koi loot khasot mien laga hai……
    agar is daur mien baba thoda Paisa le bhi rahe hai toh burai kya hai…..aakhir wo supreme power bhagwan ke prati aastha bhi toh jaga rahe hain……aur Kahin na Kahin logo ka bhala bhi ho raha hai……chahe wo kisi bhi wajah se ho …..

  13. midia wale bakwas bolte hai.

  14. sach main agar aise koi sakti hain jo dusre kai kam ajaye to baba ji app jarur wo kaam kare , kyunki sach kai rah par chalne walo ko khatre ki fikr nhi karne chaiye!

  15. Sunil Arora says:

    Weldone

  16. desh ki garib janta ko gumrah karne wale dhongi babao ko bhagawan bhi maff nahi karega.

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