/4 करोड़ तो कुछ भी नहीं, कल 16 करोड़ जमा हुए थे निर्मल बाबा के अकाउंट में

4 करोड़ तो कुछ भी नहीं, कल 16 करोड़ जमा हुए थे निर्मल बाबा के अकाउंट में

लोगों की हर परेशानी दूर करने का दावा करने वाले निर्मल बाबा के बारे में ‘प्रभात खबर’ ने सनसनीखेज खुलासा किया है। ‘प्रभात खबर’ ने निर्मल बाबा के दो खातों की जानकारी दी है। अखबार का है कि जनवरी 2012 से अप्रैल 2012 के पहले हफ्ते तक खाते में 109 करोड़ रूपए जमा हुए हैं। यानी हर रोज एक करोड़ 11 लाख रूपए जमा हुए। खाते में पैसे पूरे देश से जमा किए गए।

सिर्फ 12 अप्रैल यानी कल 14 करोड़ 93 लाख 50 हजार 913 रुपए 89 पैसे जमा किए गए हैं। वो भी सुबह साढ़े 9 बजे से दोपहर एक बजे तक। शाम तक कुल 16 करोड़ जमा किए गए। यह रकम निर्मल दरबार नामक खाते में जमा किए गए। एक और बैंक में बाबा के नाम पर 25 करोड़ की एफडी है।

अखबार के मुताबिक निर्मल बाबा खुद दो तरह के खातों का संचालन करते हैं। एक बैंक खाता अपने नाम निर्मलजीत सिंह नरूला और दूसरा खाता निर्मल दरबार के नाम से हैं। निर्मल दरबार के खातों में भक्तों के रुपया जमा कराये जाने के बाद बाबा उसे अपने खाते में ट्रांसफर कर देते हैं।

खातों में सुषमा नरूला नॉमिनी हैं। सुषमा निर्मल बाबा की पत्नी हैं। बाबा ने अपने इसी बैंक में जमा रुपयों में से मार्च के पहले हफ्ते में 53 करोड़ रुपये एक निजी बैंक में ट्रांसफर कर दिये। मार्च में ही नीलम कपूर के नाम से 1 करोड़ 60 लाख रुपये ट्रांसफर किये गये।

निर्मल बाबा के एक प्रमुख बैंक के एकाउंट नंबर पर जमशेदपुर से एक साल में गये हैं 3 करोड़ 89 लाख। हर दिन 30 से 40 लोग उनके एकाउंट में रुपये डालने के लिए आते हैं। कोई एक हजार रुपये डालता है, तो कोई 10 हजार। तो कोई पचास हजार रुपये तक डाल चुका है। बैंक ड्राफ्ट के जरिये भी लोग अपना दसवंद सीधे निर्मल बाबा को भेज रहे हैं।

(स्टार न्यूज़)

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.