/निर्मल बाबा के गुर्गों ने किया मीडिया दरबार पर साइबर हमला, 3 घंटे तक ट्रैफिक गड़बड़ाया

निर्मल बाबा के गुर्गों ने किया मीडिया दरबार पर साइबर हमला, 3 घंटे तक ट्रैफिक गड़बड़ाया

मीडिया दरबार शुरुआत से निर्मल बाबा के राज खोलने में जुटा है और इसीलिए उनके वकीलों ने हमें लीगल नोटिस भी भेजा। हमारे अभियान ने न सिर्फ़ देश भर के मीडिया चैनलों में एक नई बहस छेड़ दी बल्कि बाबा को पूरी तरह बेनकाब करके रख दिया है।

जब निर्मल बाबा की मीडिया दरबार पर चलाये गए पोल खोल अभियान ने निर्मल बाबा की जिंदगी में तूफ़ान ला दिया और इस ढोंगी बाबा ने कई तरीकों से मीडिया दरबार के इस अभियान को रोकने का हर संभव प्रयास किया मगर निर्मलजीत सिंह नरूला का दुर्भाग्य कि जिस किरपा को वह खुद दूसरों कि समस्याओं को सुलझाने के लिए टीवी के रिमोट के जरिए सारी दुनिया में बैठे उनके भ्रामक विज्ञापन के दर्शकों को बाँटने का दावा करता है, मीडिया दरबार के मामले में खुद उसपर ही किरपा बंद हो गयी।

आखिरकार वही हुआ जिसका अंदेशा था। इस फर्जी और ढोंगी बाबा ने तंग आकर मीडिया दरबार पर सायबर हमला करवा दिया जिसके चलते शुक्रवार शाम सात बजे से रात दस बज़ कर तीस मिनट तक मीडिया दरबार पर आने वाले विजिटर्स को वेब साईट खोलने में दिक्कत होती रही और विजिटर्स निराश हो कर हमें मेल करते रहे. ज्ञात हो कि मीडिया दरबार को होस्ट करने के लिए चार बड़े सर्वर्स को आपस में जोड़ा गया है, इसी कारण साईट तो डाउन नहीं हुई मगर कई जगह खुल भी नहीं पाई.

एक वक्त तो ऐसा आया कि मीडिया दरबार पर करीब पांच लाख आईपी से अटैक शुरू हो गया मगर हमारे सर्वर प्रबंधकों ने लगातार सर्वर अप रखने के लिए इन आई पी’ज को ब्लॉक करने में अपनी जी जान लगा दी और तीन घंटे के अथक प्रयासों से इस सायबर हमले को नाकाम कर दिया.

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.