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मुश्किल में फंसे हैं निर्मलजीत नरूला उर्फ़ निर्मल बाबा के सगे भाई

By   /  April 16, 2012  /  4 Comments

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लुधियाना [श्रीधर राजू]। विवादों के चलते एकाएक चर्चा में आए निर्मल बाबा के लुधियाना में रहने वाले बड़े भाई मंजीत सिंह नरूला और उनके परिजन धर्म संकट में हैं। दरअसल, निर्मल बाबा के खिलाफ उनके ही सगे जीजा एवं वरिष्ठ राजनेता इंदर सिंह नामधारी ने मोर्चा खोल रखा है। ऐसे में मंजीत सिंह नरूला और बाकी परिवार के सदस्यों के सामने अजीब धर्म संकट है कि वह निर्मल बाबा और इंदर सिंह में से आखिर किसका समर्थन करें। वहीं, मंजीत सिंह की बीमार माता [94] भी अपने छोटे बेटे निर्मल के इस प्रकरण से अंजान हैं।

शहर के मॉडल टाउन के नजदीक पॉश इलाके में रहने वाले उद्यमी मंजीत सिंह नरूला बातचीत को इसी शर्त पर राजी हुए कि उनके घर के पते का उल्लेख नहीं किया जाए। तस्वीरें भी नहीं खींचने का आग्रह करते हुए उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनका परिवार मानसिक रूप से प्रताड़ित नहीं होना चाहता। उन्होंने बताया कि आज भी ज्यादातर पड़ोसी, दोस्त आदि यह नहीं जानते कि निर्मल बाबा उनके सगे छोटे भाई हैं। उनको लेकर विवाद तो अब पैदा हुआ, पहले जब लोग उनसे मिलने को बेकरार रहते थे, तब भी परिवार ने कभी उनसे अपने रिश्ते जान-बूझकर जगजाहिर नहीं किए थे।

नरूला ने निर्मल बाबा से अपने रिश्तों को उजागर नहीं करने को लेकर तर्क दिया कि दरअसल उनके परिवार ने कभी निर्मल बाबा के नाम को भुनाने का लालच नहीं रखा। नरूला ने बताया कि लगभग पांच साल पहले एक पारिवारिक समारोह में निर्मल से मुलाकात हुई थी। खुद कभी बुजुर्ग माता का हाल जानने के मकसद से वही [निर्मल] फोन करते हैं। मां भी निर्मल से लगभग दस साल से नहीं मिली। इसकाएक कारण निर्मल का बाबा के रूप में व्यस्त हो जाना है।

नरूला परिवार के सभी सदस्यों ने भले ही बाबा बनाम नामधारी [जीजा-साले] में वैचारिक मतभेद के मद्देनजर खुलकर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन इतना जरूर कहा निर्मल बाबा के व्यक्तित्व में कुछ तो है, वर्ना इतने लोग उनके भक्त कैसे बन गए। नामधारी के विरोध के सवाल पर पूरे परिवार ने कोई टिप्पणी नहीं की। बताया जाता है कि निर्मल बाबा उर्फ निर्मलजीत सिंह नरूला का जन्म पटियाला के समाना में हुआ था। पिता की मौत के बाद वर्ष 1962 में पूरा परिवार लुधियाना शिफ्ट हो गया था। निर्मल बाबा ने लुधियाना के गवर्नमेंट कॉलेज से 1972 में बीए की डिग्री ली थी।

मंजीत सिंह ने बताया कि निर्मल पढ़ाई में काफी होशियार था और पढ़ाई करने के तत्काल बाद ही वह व्यवसाय करने के लिए लुधियाना छोड़ कर डाल्टनगंज [झारखंड] अपनी बहन के घर चले गए थे।

(जागरण)
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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

4 Comments

  1. Raj Kumar Mehatpuri says:

    जो काम Rationalist अपने तर्क ( Law of average , probability , random chance abd Placebo effect ) के ज़रिए लोगों को नहीं समझा सके वो काम निर्मल बाबा ने कर दिखाया . जो रिज़ल्ट लाल किताब के टोटकों , चमत्कारी अंगूठी , माला, यंत्र आदि व् ज्योतिष में ग्रहों की बुरी दशा आदि टालने के अन्य उपायों के ज़रिए प्राप्त किया जा सकता है , वही रिजल्ट या परिणाम निर्मल बाबा को टी वी पर घर बैठे ही सुनकर प्राप्त किये जा सकते हैं बिलकुल फ्री या फिर सिर्फ २००० रुपये में . कितने आसान है निर्मल बाबा के नुस्खे ……………………… ….कढ़ी चावल , समोसे ,टिक्की व् गोल गप्पे खाना और खिलाना . काला पर्स और दस रुपये के नोटों की गड्डी रखना और ब्रांडेड चीज़ें ही इस्तेमाल करना . मैं कितने ही लोगों को जानता हूँ जिन पर यह सब करने के बाद सचमुच निर्मल बाबा की किरपा हुई . इसे ही कहतें हैं Placebo effect .निर्मल बाबा जी ,कथित जंतर मंत्र तन्त्र , महंगे नग व अंगूठीओं द्वारा लोगों की लूट करने वाले ठगों को आपने सचमुच आइना दिखा दिया , इसी लिए वो इर्ष्या बस आप का विरोध करते हैं .

  2. amit says:

    ab बाबा का बिज़नस लगभग बंद, सायद कृपा की जरुरत इनको पड़े, लेकिन भगवन पैसे लेकर कृपा नहीं करता, तो , निर्मल नरूला क्या hoga

  3. yes i agree your coment ,,, but we are the gilty to grow up for as thsis BABA

  4. Sunil Arora says:

    निर्मल सिंह निरुला अपने तथाकथित भक्तों के सामने दावा करता है कि उसके किसी भी भक्त पर कोई बुरी नज़र डालेगा तो ये तथाकथित बाबा उसका निपटारा बैठे बैठे कर देगा और अपने भक्त पर कोई आंच नहीं आने देगा.मैं ते पूछता हूँ इस ढोंगी से कि जब तुम्हारे बैंक खाते से कोई फर्जी तरीके से रुपये निकल लिया तो क्यों गए पुलिस के पास ,कर देते निपटारा बैठे बैठे.
    तुम दावा करते हो कि तुम अपने हर भक्त के घर जाते हो ,जब भी कोई भक्त तुम्हारे सामने आता है तो तुम्हे उसका सारा इतिहास भूगोल उसका भूत भविष्य पता होता है तब तुम क्यों पूछते हो कि कौन कहाँ से आया है और क्या करता है किसने कब क्या खाया, क्या पहना,कब कहाँ गया.
    मीडिया दरबार ने तुम्हारे खिलाफ एक मुहीम छेड़ी तो तुमने कानूनी नोटिस भिजवा दी.कर देते इनका हिसाब किताब अपनी जगह से बैठे बैठे.मैं ये पूछता हूँ कि जब तुम अपने ऊपर आने वाले थपेड़ो से अपनी रक्षा स्वयं नहीं कर सकते हो,इसके लिए तुम पुलिस और कानून के पास जाते हो तो भक्तो से उनकी रक्षा करने का दावा कैसे करते हो?
    आधे घंटे के टीवी विज्ञापन में सिवाय पैसे के दूसरी कोई बात तुम नहीं करते हो तो मैं ये पूछता हूँ कि बाबा और पैसे का क्या मेल?
    तुम दावा करते हो कि तुम्हारे लिए सब धर्म एक सामान है ,अच्छी बात है.तुम तो सिख थे फिर तुमने अपने केश क्यों कटवाए और सिख धर्म क्यों छोड़ा.क्योकि सिख धर्म में ऐसा पाखंड स्वीकार्य नहीं है इसलिए अपना लिया हिन्दू धर्म.तुम जैसे पाखंडियों ने हिन्दू धर्म को बहूत सस्ता बना दिया है. दोष तो हम लोगों का है जो अपने लालच के कारण तुम जैसे पाखंडियों को भगवान मान बैठते हैं और हम खुद ही ऐसे पाखंड के खिलाफ उठने वाली आवाज़ को इर्ष्या का नाम देते हैं.मैं दावा करता हूँ कि जिस दिन हिन्दू जाग गया उस दिन तुम जैसे पाखंडियों को मूह छिपाने कि जगह भी नहीं मिलेगी.
    गीता में साफ लिखा है कि हर इंसान को उसके कर्मों के अनुसार फल मिलता है लेकिन तुम तो भाई हर किसी पर कृपा करने का दावा करते हो पैसे ले कर.क्या तुम्हारी कृपा इतनी सस्ती है कि जो चाहे ले लो बस पैसे देते जाओ.क्योंकी तुम्हारे एक विज्ञापन में मैंने सुना था कि एक इंसान ने जब ये कहा कि उसने दश्वंद के लिए निकला हुआ पैसा खर्च कर दिया तब तुमने उसके ऊपर भगवान की कृपा रोक देने का दावा किया था.तुम क्या भगवान के रिकवरी एजेंट समझते तो अपने आप को.

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