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गुणगान से ज्यादा लोकप्रिय है निर्मल बाबा का विरोध, स्टार न्यूज़ की TRP आसमान पर

By   /  April 18, 2012  /  8 Comments

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निर्मल बाबा की ‘किरपा’ उन्हें चाहने और उनका गुणगान करने वाले चैनलों को जितनी लोकप्रियता उनके प्रवचन वाले प्रोग्राम से मिल रही थी, उससे कहीं ज्यादा लोग उनके पोल-खोल को देख रहे हैं। पिछले हफ्ते की टीआरपी रिपोर्ट में स्टार न्यूज़ को जबर्दस्त उछाल मिला है। बाबा का कच्चा चिट्ठा खोलने वाले अखबार प्रभात खबर के पाठकों की संख्या में भी ऐतिहासिक बढ़ोत्तरी हुई है। इतना ही नहीं, मीडिया दरबार को भी इंटरनेट यूजरों का जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिला है।

टैम द्वारा 15वें सप्ताह में जारी की गई सू्ची में हालांकि आजतक अभी भी नंबर वन बना हुआ है, लेकिन स्टार न्यूज़ तीसरे स्थान से तकरीबन चार अंक उछल कर नंबर 2 पर आ गया है। स्टार न्यूज़ की ‘किरपा का कारोबार’ मुहिम की लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि इसके कारण चैनल की टीआरपी 12.6 से बढ़ कर 16.3 पहुंच गई। हालांकि स्टार न्यूज़ ने इस मुहिम को न्यूज़ एक्सप्रेस के बाद शुरु किया था, लेकिन डिस्ट्रीब्यूशन में आगे होने के कारण उसे फायदा मिल गया। पिछले हफ्ते जिन तीन चैनलों को बढ़त मिली उनमें आजतक, और स्टार न्यूज के साथ सिर्फ न्यूज एक्सप्रेस ही रहा।

हालांकि बाबा जी की आजतक को दी गई सफाई को कई हलकों में ‘स्पॉन्सर्ड’ करार दिया गया, लेकिन एक्सक्लूलिव होने के कारण उसे भी खासी लोकप्रियता मिली। बाबा के खोखले और बेहूदा तर्कों के साथ-साथ किरपा की रट भरा इंटरव्यू दिन भर चला कर आजतक ने 3.2 अंकों की टीआरपी बढ़ाई और चैनल की कुल टीआरपी 19.8 पहुंच गई। ग़ौरतलब है कि खबरिया चैनलों को ऐसी जबर्दस्त लोकप्रियता किसी बहुत बड़ी घटना के समय मिलती है।

हालांकि दोनों नावों में सवार रहने वाले या अपना रुख साफ न रखने वाले चैनलों को दर्शकों ने नकार दिया है। ज़ी न्यूज़ और इंडिया टीवी ने भी निर्मल बाबा की पिछली जिंदगी और उनके प्रवचनों से जुड़े कई कार्यक्रम पेश किए, लेकिन न तो उनका उद्देश्य स्पष्ट था और न ही उनमें कोई संदेश था। दोनों ही चैनलों को कोई फायदा नहीं हुआ, अलबत्ता उनकी लोकप्रियता 0.1 प्रतिशत गिर गई। न्यूज़ एक्सप्रेस, स्टार न्यूज़ और आजतक को छोड़ कर सभी समाचार चैनलों की टीआरपी गिरी है।

झारखंड के अखबार प्रभात ख़बर के सर्कुलेशन में भी जबर्दस्त इज़ाफा हुआ है। अखबार के संपादक हरिवंश ने मीडिया दरबार को बताया कि उन्होंने हमेशा जन सरोकार के मुद्दों को तरज़ीह दी है और इसका फायदा होता रहा है। निर्मल बाबा के पोल-खोल पर भी ऐसा ही हुआ। उनका कहना है कि उनके अखबार ने जब से पोल-खोल की रिपोर्ट छापनी शुरु की तब से हर सेंटर पर अधिक कॉपियों की मांग आने लगी और पाठक अभी तक इससे जुड़ना जारी रखे हुए हैं। प्रभात खबर की देखा-देखी  बाबा-विरोधी लहरों पर सवार होने के लिए दैनिक भाष्र्कर और जागरण जैसे अखबारों ने भी अपने अखबारों में निर्मलजीत नुरला की कहानियों को प्रकाशित किया, उन्हें भी थोड़ी-बहुत लोकप्रियता मिली, लेकिन प्रभात खबर जितनी नहीं।

वेब मीडिया पर तो बाबा के निंदकों की भारी किरपा रही। पिछले एक महीने में पहले से ही नंबर वन रहे मीडिया पोर्टल भड़ास4मीडिया.कॉम की लोकप्रियता में पिछले महीने 32 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। विष्फोट.कॉम की लोकप्रियता भी 70 प्रतिशत बढ़ गई। सबसे ज्यादा किरपा तो सबसे पहले नोटिस पाने वाले हमारे पोर्टल मीडिया दरबार को हुई। इसकी लोकप्रियता में पिछले एक महीने में औसतन 280 प्रतिशत की व़द्धि हुई है।

बाबा के अंधविश्वास भरे अभियान के साथ-साथ पोल-खोल भी ज़ारी है। उम्मीद की जाती है कि इस अभियान से निर्मल बाबा के अंधभक्तों की आंखे कुछ हद तक खुली जरूर होंगी।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

8 Comments

  1. Biggest news: Nirmal baba ko ab bhagon ki kripa ki jaroorat hai iske liye unhone bhagton se nba se news channels ki complain karne ko kaha is silsile me humne jab bhagton se poocha to unka kahna tha ki baba ne daswand nahi diya hai bhagton ko isliye kripa kahan se hogi. Baba ki salary jayada hone se baba itna paisa bhagton ko den eke liye ready nahi hain. shath hi bhgton ne baba ko kala purse rakhne or samoshe hari chatni or gay ka gobar khane ki salah di hai.

  2. apane des ki kya vidambana hai ham kitni jaldi pakhndiyo k chakar me aajate he.

  3. Atul Agarwal says:

    सौ चूहे खा कर बिल्ली चली हज को.इस हमाम में सब नंगे हैं.इस बाबा तंत्र का मतलब अब हो गया है धर्म का व्यापारी.हिन्दू धर्म को खतरा किसी बाहरी ताक़त से नहीं इन तथाकथित बाबाओं से ही है जो धर्म के नाम पर सिर्फ पैसा कमाना ही अपना मकसद समझते हैं.ये कहना भी गलत है कि सभी बाबा एक जैसे हैं.देखते हैं हम हिन्दुओं की नींद कब खुलती है. मजे की बात “बाबा इनकम टैक्स भरता है “.अपने आप को बाबा कहते हो और कमाई के धंधे में लगे हो.अरे भाई ,क्यों बाबा शब्द की बेइज्जती करते हो.बाबा माया के पीछे क्यों भाग रहा है? अन्धविश्वास फैला रहा है पैसों के लिए.
    हिन्दू धर्म का इतिहास कितने ही मुनियों,ऋषियों,सन्यासियों और बाबाओं की कहनियों से भरा पड़ा है जिन्होंने बिना किसी माया की चाहत किये समाज को उठाने का काम किया.महर्षि व्यास ने वेदों की रचना बाज़ार में बेच कर धन कमाने के लिए नहीं की थी.आचार्य कौटिल्य ने चन्द्रगुप्त को राजा बनाया लेकिन खुद शहर के बाहर एक कुटिया में ही रहते थे.ये तो कुछ उदहारण है.ऐसा है हमारा हिन्दू धर्म.लेकिन आज?कोई कृपा बेच रहा है कोई योग बेच रहा है ,कोई मानसिक शांति पाने का उपाय बेच रहा है, कोई राम कथा तो कोई गीता के श्लोक,कोई कुछ तो कोई और कुछ.वो भी मीडिया को पैसे दे कर प्रचार कर कर के.कितने गर्त में जा रहा है हमारा धर्म.जरा सोचिये.

    वैसे आज हमारे देवी देवताओं की कीमत भी तय कर दी गयी है.यदि मैं उज्जैन में रहता हूँ तो मेरे लिए महाकाल की कीमत ५० रुपये और माता वैष्णव देवी की कीमत ५०० रुपये उसी तरह यदि आप गौहाटी में रहते हैं तो माँ कामख्या देवी की कीमत ५० रुपये और गौहाटी से बाहर के लोगों के लिए ५०० रुपये.यदि मैं कलकत्ता में रहता हूँ तो खाटू में बैठे श्याम की कृपा के लिए मुझे ५०० रुपये चुकाने होंगे और घुसरी धाम में बैठे श्याम बाबा को ५० रुपये और इनकम टैक्स के रूप में आपकी कमाई का १० प्रतिशत भगवान के एजेंट के पास मासिक तौर पर जमा करवाने होंगे.कलयुग है तो भगवान का भी अपने भक्तों पर अब भरोसा नहीं है.अगर आपके पास पैसे नहीं है तो आपका किसी मंदिर में जान बेकार है क्योंकि हमारे देवी देवताओं ने अब अपनी कृपा की कीमत तय कर दी है और निर्मल सिंह नामक एक एजेंट नियुक्त कर दिया है और अपनी सारी कृपा उस एजेंट की मुट्ठी में बंद करवा दी है.पैसे चुकाओ तो मुट्ठी खुल जाएगी और आपको अपने भगवान की कृपा मिल जायेगी वरना तो मुट्ठी बंद.

    और हाँ उस एजेंट को तीसरी आँख की शक्ति भी प्रदान कर दी गयी है ताकि वो नज़र रख सके कि कोई भक्त मंदिरों में जा कर बेईमानी तो नहीं कर रहा है.

    धन्य हो प्रभु इतने कलयुगी मत बनो.अभी भी समाज में लोगों को बहुत तकलीफ और परेशानियाँ हैं बहुत से गरीब लोग हैं.प्रभु जरा सोचिये.

  4. Atul Agarwal says:

    सौ चूहे खा कर बिल्ली चली हज को.इस हमाम में सब नंगे हैं.इस बाबा तंत्र का मतलब अब हो गया है धर्म का व्यापारी.हिन्दू धर्म को खतरा किसी बाहरी ताक़त से नहीं इन तथाकथित बाबाओं से ही है जो धर्म के नाम पर सिर्फ पैसा कमाना ही अपना मकसद समझते हैं.ये कहना भी गलत है कि सभी बाबा एक जैसे हैं.देखते हैं हम हिन्दुओं की नींद कब खुलती है. मजे की बात "बाबा इनकम टैक्स भरता है ".अपने आप को बाबा कहते हो और कमाई के धंधे में लगे हो.अरे भाई ,क्यों बाबा शब्द की बेइज्जती करते हो.बाबा माया के पीछे क्यों भाग रहा है? अन्धविश्वास फैला रहा है पैसों के लिए.
    हिन्दू धर्म का इतिहास कितने ही मुनियों,ऋषियों,सन्यासियों और बाबाओं की कहनियों से भरा पड़ा है जिन्होंने बिना किसी माया की चाहत किये समाज को उठाने का काम किया.महर्षि व्यास ने वेदों की रचना बाज़ार में बेच कर धन कमाने के लिए नहीं की थी.आचार्य कौटिल्य ने चन्द्रगुप्त को राजा बनाया लेकिन खुद शहर के बाहर एक कुटिया में ही रहते थे.ये तो कुछ उदहारण है.ऐसा है हमारा हिन्दू धर्म.लेकिन आज?कोई कृपा बेच रहा है कोई योग बेच रहा है ,कोई मानसिक शांति पाने का उपाय बेच रहा है, कोई राम कथा तो कोई गीता के श्लोक,कोई कुछ तो कोई और कुछ.वो भी मीडिया को पैसे दे कर प्रचार कर कर के.कितने गर्त में जा रहा है हमारा धर्म.जरा सोचिये.

    वैसे आज हमारे देवी देवताओं की कीमत भी तय कर दी गयी है.यदि मैं उज्जैन में रहता हूँ तो मेरे लिए महाकाल की कीमत ५० रुपये और माता वैष्णव देवी की कीमत ५०० रुपये उसी तरह यदि आप गौहाटी में रहते हैं तो माँ कामख्या देवी की कीमत ५० रुपये और गौहाटी से बाहर के लोगों के लिए ५०० रुपये.यदि मैं कलकत्ता में रहता हूँ तो खाटू में बैठे श्याम की कृपा के लिए मुझे ५०० रुपये चुकाने होंगे और घुसरी धाम में बैठे श्याम बाबा को ५० रुपये और इनकम टैक्स के रूप में आपकी कमाई का १० प्रतिशत भगवान के एजेंट के पास मासिक तौर पर जमा करवाने होंगे.कलयुग है तो भगवान का भी अपने भक्तों पर अब भरोसा नहीं है.अगर आपके पास पैसे नहीं है तो आपका किसी मंदिर में जान बेकार है क्योंकि हमारे देवी देवताओं ने अब अपनी कृपा की कीमत तय कर दी है और निर्मल सिंह नामक एक एजेंट नियुक्त कर दिया है और अपनी सारी कृपा उस एजेंट की मुट्ठी में बंद करवा दी है.पैसे चुकाओ तो मुट्ठी खुल जाएगी और आपको अपने भगवान की कृपा मिल जायेगी वरना तो मुट्ठी बंद.

    और हाँ उस एजेंट को तीसरी आँख की शक्ति भी प्रदान कर दी गयी है ताकि वो नज़र रख सके कि कोई भक्त मंदिरों में जा कर बेईमानी तो नहीं कर रहा है.

    धन्य हो प्रभु इतने कलयुगी मत बनो.अभी भी समाज में लोगों को बहुत तकलीफ और परेशानियाँ हैं बहुत से गरीब लोग हैं.प्रभु जरा सोचिये.

  5. सटीक व्याख्या

  6. Sunil Arora says:

    निर्मल बाबा तो बहाना है: पिछले लगभग पॉच छह वर्षों से पूरे भारत में अंधविश्वास फैला कर लोगों को लूट रहे निर्मल नरूला उर्फ निर्मल बाबा सरेआम अधिकॉश न्यूज चैनलों और अन्य मनोरंजक चैनलों पर रोज आकर अपनी ठगी का धंधा चला रहा था और उसके इस ठगी और लूट के धंधे में ये टीवी चैनल बाराबर के हिस्सेदार बने हुऐ थे तथा चुपचाप माल बटोर रहे थे लेकिन अचानक क्या हुआ कि ये सारे के सारे चैनल जो उसका नमक खा रहे थे अचानक नमक हरामी पर उतर आऐ है यह बड़ा रहस्य है?
    दरअसल यह सब अचानक नहीं हुआ है इसके पीछे बड़ा गहरा षड़यंत्र प्रतीत हो रहा है क्योंकि तीन जून से बाबा रामदेव का भारत स्वाभिमान के तहत कालेधन और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर व्यवस्था परिवर्तन का महाऑदोलन प्रारंभ हो रहा है जिससे सरकार के हाथ पॉव अभी से फूल रहे है क्योंकि सरकार के पास उनकी मॉगों/मुद्दों का कोई भी काट नहीं है इसलिये सरकार न्यूज चैनलों के माध्यम से निर्मल बाबा को शिकार करने के बहाने बाबाओं के बदनाम कर तथा बाबा रामदेव पर निशाना लगाने का बहाना ढॅूढ रही है जिससे उनको और उनके व्यवस्था परिवर्तन की महाक्रॉति को बदनाम किया जा सके। आजकल सरकार के षड़यंत्र की प्रथम कड़ी में टीवी पर बहस में बैठे तथाकथित बुद्धिजीवी (परजीवी) अपनी बहस में बाबा रामदेव का नाम भी इस निर्मल बाबा के साथ शामिल करने की कोशिश करते देखे जा रहे है तथा तीन जून से आते आते ये सरकार देश में ऐसा वातावरण तैयार करना चाहती है जिससे बाबा रामदेव को बदनाम कर उनके ऑदोलन को दबाया जा सके। इसीलिये भॉड न्यूज चैनल और बिकी हुई मीडिया अभी से इस कोशिश में लग गयी है। लेकिन देश की जनता जाग चुकी है तथा हमें इन षड़यंत्रों की तरफ सबका ध्यान खींचते हुऐ महाक्रॉति के पक्ष में वातावरण बनाना होगा।.

  7. KRITIKA JAMUAR says:

    क्या न्यूज़ चंनेल्स को सिर्फ आपने trp से मतलब है? यहाँ बात लोगों को जागरूक करने की है न की आपने फायेदे की जब निर्मल बाबा के कार्यकर्म से ज्यादा फायेदा होने लगा तो मीडिया ने उनका कार्यकर्म दिखा कर लोगों को अन्धविश्वास करना सिखाया और अब जब लोग उनके विपरीत होने लगे तो मीडिया ने इसमें भी आपना फायेदा बना रही है.
    अगर लोग अन्धविश्वासी हैं तो मीडिया भी येही काम क्यों कर रही है मीडिया का काम लोगों को जागरूक करना है.
    आपना trp बढ़ाना नही

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