Loading...
You are here:  Home  >  अपराध  >  Current Article

खुल चुकी है भक्तों की तीसरी आंख, 80 फीसदी लोग मानते हैं लुटेरा :न्यूज़ एक्सप्रेस, सी-वोटर सर्वे

By   /  April 23, 2012  /  8 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

 

पिछले एक पखवाड़े से पूरा हिंदुस्तान अंधविश्वास पर हाल के समय की सबसे बड़ी बहस कर रहा है। ये बहस भले ही इंटरनेट और न्यूज़ एक्सप्रेस की बदौलत शुरु हुई हो, मगर अब ये तमाम न्यूज़ चैनलों और अख़बारों से होती हुई गाँव-गाँव, शहर-शहर फैल चुकी है। इस बहस के केंद्र में है निर्मल जीत सिंह नरूला उर्फ निर्मल बाबा, जो दावा करता है कि उसके पास सिद्धियां हैं, शक्तियां हैं और उनके बल पर वो किसी भी समस्या को दूर कर सकता है।

यही नहीं इस कृपा के बदले वो भोले-भाले लोगों से मोटी धनराशि ऐंठकर अपनी तिजोड़ियाँ भर रहा है। लेकिन अब पोल खुल चुकी है… सच सामने आ चुका है। सवाल उठता है कि क्या लोगों की आँखें भी खुल रही हैं? क्या अब उन्हें निर्मल बाबा का सच नज़र आने लगा है? यही सब जानने के लिए न्यूज़ एक्सप्रेस टीवी ने जनमत सर्वेक्षण करवाया है।  देश के दस सबसे बड़े और मझोले शहरों में करवाए गए इस जनमत सर्वेक्षण को न्यूज़ एक्सप्रेस के लिया किया है टीम सी-वोटर ने। सर्वे के नतीजे इस प्रकार है।

1-क्या आप निर्मल बाबा को जानते/ सुनते हैं?

90%- हाँ

10%- नहीं

2- क्या आपने किसी चैनल पर ‘निर्मल दरबार’ देखा है?

48%- देखता हूँ, भरोसा नहीं

23%- देखता हूँ, भरोसा भी

15%- न देखता हूँ, न भरोसा है

14%- कभी नहीं देखा

3- क्या मीडिया में निर्मल बाबा पर उठ रहे सवालों का आपके भरोस पर असर पड़ा?

62%- कभी भरोसा नहीं

25%- भरोसा है अटल

13%- टूट गया भरोसा

4- निर्मल की कृपा के चमत्कार पर लोगों की राय

80%- ‘कृपा’ के बहाने लूट

20%- ‘कृपा’ से दुख दूर

5- क्या ‘निर्मल बाबा’ के दावे के मुताबिक टीवी पर कार्यक्रम देखने से कृपा हुई?

27%- हाँ

73%- नहीं

6- क्या चैनलों को निर्मल बाबा का प्रोग्राम दिखाना चाहिए?

32%- हां

68%- नहीं

7- क्या ‘निर्मल दरबार’ पर निशाना और उनका विज्ञापन दिखाना मीडिया का दोहरा चरित्र है?

79%- हाँ

21%- नहीं

8- क्या निर्मल बाबा के प्रोग्राम को टीआरपी लिस्ट से बाहर किया जाए?

67%- हाँ

33%- नहीं

9- क्या सरकार को ‘निर्मल दरबार’ पर रोक लगानी चाहिए?

71%- हाँ

29%- नहीं

10- क्या ‘निर्मल बाबा’ लोगों की ज़िंदगी और भावनाओं से जुड़ी असुरक्षा और भय से कारोबार करते हैं?

60%- हाँ

40%- नहीं

11- क्या कोई चमत्कार या स्वयंभू बाबा आपकी निजी समस्याओं को हल कर सकते हैं?

15%- हाँ

85%- नहीं

निर्मल बाबा पर किए गए न्यूज़ एक्सप्रेस-सी वोटर के सर्वे से जो तस्वीर साफ-तौर पर निकलकर सामने आती है, उससे स्पष्ट है कि देश की जनता का जनाधार अंधविश्वास के खिलाफ है… साथ ही वो इस तरह के कार्यक्रमों पर रोक लगाने की मांग भी करते हैं, ऐसे में कुछ लोग जो अभी भी अंधविश्वास पर विश्वास करते हैं, अब जरुरत इस बात की है, लोग इस अंधे कारोबार के सच को जाने और खुद ही फैसला करें, कि पर्दे के पीछे की सच्चाई क्या है…।
For the last fortnight, the whole of India continuing the great debate in superstition in recent times … The debate has even started, thanks to the Internet and News Express, but now the debate has spread from village to city onwards … for this time the ‘Nirmal’ baba is on the floor of the Media, News Express forbade people to believe the kind of cheeter babas … We showed reality of ‘the third eye of baba’ … Express News poll with C voter surveyed around the country against the kinds of myths … Country’s ten most large and medium cities have taken in this poll, We got the reality & Fake Baba is being exposed … Survey results are as follows …

1 – Do you know about Nirmal Baba / have you heard of him?
90% – Yes
10% – no

2 – have you seen nirmal darbar on any TV channel?
48% – see, dont trust
23% – see, trust
15% – nither do I see nor I rust
14% – never seen

3 – Media was flooded with news regarding nirmal baba … how have these stories affected you ? 62% – never be trusted
25% – the irrevocable trust
13% – broken trust

4- on one hand electronic media is targeting nirmal baba for spreading superstitions among people and on the other hand it is using his programme as advertisement … does it reflect the dual character of media ?
79% yes
21% no

5- do you watch the kind of programmes on tv for any such benefits ?
27% – Yes
73% – not

6- do you think that the kind of programmes should be telecasted on tv channels … ?
32% – Yes
68% – not

7- do you think that the kind of programmes should b removed from the TRP list ?
67% – Yes
33% – not

8- do you think that the ministry of information & broadcasting should completely banned programme like ‘Nirmal Darbar” ?
71% – Yes
29% – not

9- do you think that people like Nirmal Baba ” exploit the common men’s personal problems based on life and emotions like fear & insecurity ?
60% – Yes
40% – not

10- do you think to solve your personal problems of life you need the help of miraculous and self claimed people like nirmal baba ?
15% – Yes
85% – not

it is clear that the mass of the people against superstition … on the News Express-C Voter survey Nirmal Baba reviels … What is the truth behind the scenes … We continue follows …
(प्रेस विज्ञप्ति)

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

8 Comments

  1. Bhupendra says:

    ये तो अपनी अपनी shraddha की बात है. निर्मल बाबा को मानने वाले कई पढ़े लिखे log bhi है. Kyun ना हम इसे उनके विवेक पे chhod dein.

  2. rakesh verma says:

    The Hidden Secret behind BABA NIRMAL’s Mentally Exploitation Theory and Today’s wide spread other’s DHARAM Related GURU’S
    निर्मल बाबा की आध्यात्मिकता की आड़ में छिपी भौतिक कामयाबी के पीछे छिपे सत्य ——
    भारतीय 1674 के अध्यात्मिक ज्ञान का सनसनीखेज खुलासा ——-
    दोस्तों! अगर आप सोचते हैं कि निर्मल बाबा के पास कोई दैवीय शक्ति या वो कोई आलौकिक शक्ति से भरपूर है तो ये आपका केवल दिशा भ्रम हैं उसके ईलावा और कुछ भी नहीं, अगर हकीकत जानना चाहते हो इनकी शक्ति के पीछे छिपे रहस्य तो विस्तृत करता ये सनसनीखेज अध्यात्मिक खुलासा पढ़िए —————–कि कैसे इन्होने मानुषिक सोच का मानसिक शोषण किया और कैसे अपनी थ्योरी के विस्तार को अंजाम दिया l भारतीय दोस्तों ! निर्मल बाबा भारतीय समाज में रह रहे किसी भी धर्म विधान से सम्बंधित लोगो को उन्ही की बिखरी हुई आस्था को इक्कट्ठा करके उनकी इच्छा शक्ति को दिशा देने का प्रयास कर रहे है ताकि भौतिक दुखों से पीड़ित इंसान जो वाकई ईश्वरीय परीक्षा है जिनसे निजात पाने हेतु खुद अपनी -अपनी बौद्धिक क्षमता में छिपी क्षमताओं के सहारे वो प्रयास कर सके जिसके फल स्वरूप स्थितियों में एकाएक सुधार तो संभव हैं परन्तु छुटकारा नहीं जिसे बड़ी बखूबी से छिपा गए ताकि अनुयायियों की आस्था का विकेंद्रीकरण न हो जाए l
    इसे प्रत्येक स्वस्थ इंसान कर सकता है जो अपनी धर्म में आस्था की मजबूत इच्छा शक्ति और शरीर में छिपी रहस्यमयी में सामंजस्य स्थापित कर सके l ये भी वही कर रहे हैं लेकिन इस छिपे सत्य पर पर्दा डाले -डाले ताकि छिपा रहस्य इंसानी समझ से बाहर ही रहे ,इन्होने इसके लिए अलौकिक दैवीय शक्ति के अहसास को अपने अन्दर छिपे होने का सहारा लिया जोकि औसत इंसानी सोच के लिए एक विशेष उपलब्धि हैं जो औसत मानवीय सोच के अनुसार किसी को भी सहजता से प्राप्त नहीं हो सकती और यह वहीँ कारण हैं जिससे ये इस सत्य को समाज से छिपाने में कायम रहे l
    दोस्तों ! ये उत्प्रेरक (Motivator) का काम कर रहे हैं केवल, जो मनुष्य सभ्यता के लिए नैतिक दृष्टि से लाभप्रद हैं लेकिन इन्होने इसके लिए जो कीमत मांगी वो बिलकुल अनैतिक (धर्म विपरीत) हैं इसलिए इन्हें धर्म से जुड़े अध्यात्मिक क्षेत्र से सम्बंधित किसी भी दृष्टि से माना नहीं जा सकता l
    आप मनुष्य प्रजाति के प्रारंभ से लेकर आज तक के इतिहास का आंकलन करके खुद देख ले कि ईश्वरीय शक्ति की समझ रखने वाले किसी भी महान मानवीय स्वरूप ने किसी से ऐसी अनुचित मांग आजतक नहीं की बेशक चाहे स्थितियां कुछ भी रही हों l
    इन्हें धर्मगुरु कहना तो दूर की बात ,इन्हें सच्चा समाज सुधारक भी कहना उचित नहीं क्योंकि ये वास्तव में योगाचार्य श्रीराम देव की तरह हैं जिनकी व्यवसायिकता के दोष ने इन्हें इस पदवी के क्षेत्र से बाहर कर दिया l कुछ लोगो की विचार धारा में यह प्रशन जरुर हिचकोले मार रहा होगा कि जो लोग खुद यह स्वीकारते हैं कि उनके दर्शन और दया से उनके काम एकाएक आखिरकार कैसे बनते हैं…. तो दोस्तों ! गुमराह न हो उसके भी दो कारण हैं कि या तो ये तन्त्र-मन्त्र-यंत्र के साधक हैं जिन्होंने पाशविक आत्मिक नियंत्रण से ऐसी शक्ति को हांसिल किया जो अपनी शारीरिक जरूरतों कि पूर्ति के लिए इस रहस्यमयी शक्ति का बेधड़क दुरपयोग करते हैं l
    इतना तो दोस्तों कानो में मोटे-मोटे कुंडल को धारण किये अपने आप को श्रीगुरु गौरख नाथ जी के चेले मानने वाले भी कर दिखाने में सक्षम हैं जोकि अनैतिक रूप से चलते सट्टे के नंबर या आकस्मिक व्यक्तिगत भविष्यवानियों को भी सत्य साबित करके दिखा देते हैं l वैसे उलझाव में न फंसे तो इनमे इतनी क्षमता नहीं कि ये किसी शरीर में प्रवेश न की हुई बेसमय मृत्यु की शिकार विचरित आत्मा पर नियंत्रण कर सके और उनका अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए प्रयोग का सके l लेकिन अगर इन्होने इसी माध्यम को धन एकत्रितकरण की अपनी असीमित इच्छा की पूर्ति के लिए प्रयोग किया है ,तो दोस्तों ! ये मानवीय रूप में साधे स्वच्छ वस्त्रों को धारण किये एक सेवडे हैं जो सच पर से गिरा पर्दा इसलिए उठाना नहीं चाहते कहीं लोग उनमे पैदा की गयी अपनी आस्था को ही न भूल बैठे जिससे उनके पैसे एकत्रीकरण के व्यवसाय के विस्तार और अर्जित प्रतिष्ठा को हानि न पहुंचे l
    गुमराह न हो भारतीय दोस्तों:-
    वास्तव में ये न तो कोई धर्म से जुड़े संरक्षक हैं और न ही कोई पाशविक परवर्ती से जुड़े अपनी लैंगिक क्षमता को नियंत्रित किये हुए इंसान………. ये आम भिखारियों की तरह पैसे की मांग करते कुशाग्र व्यवसायिक बुद्धि रखने वाले कुशल भिखारी है ,जिन्होंने ईश्वरीय स्वरूप से सम्बंधित हमारे समाज में प्रचलित महान विभूतियों तथा उस परम असीम शक्ति के डर-दया का हवाला देकर सामजिक सोच का मानसिक शोषण किया ताकि उनके पैसे की भूख बरक़रार रहे और जो आजतक कायम है lधयान से देखिएगा आधे घंटे के प्रोग्राम में ४ बार बैंक अकाउंट का ब्यौरा दिया जाता है …. जबकि आध्यात्मिकता का जबकि पैसे से कोई लेना देना अर्थात सम्बन्ध नहीं
    दोस्तों वास्तव में इनकी सत्यता यहीं हैं ,कमजोर मजबूत शक्ति वाले लोगो को यह इसलिए नहीं समझ आ रही क्योंकि उनपर तो व्यक्तिगत स्वार्थों का बोझ छाया हुआ हैं और वास्तव में जिन्हें प्रतिकार करना चाहिए था उनके क्षेत्र में एक दुसरे का प्रतिरोध करना शामिल ही नहीं हैं जिसकी मुख्य वजह हैं कि इन सभी को अपनी-अपनी क्षमताये मालुम हैं कि अध्यात्मिक क्षत्र की पहली सीढ़ी को भी ये अभी पार नहीं कर सके हैं l और यह जानते भी है कि एक दुसरे कि क्षमता पर सवाल-जवाब उठाने पर भला किस का फायदा हो सकता हैं l जिसके लिए ये आम जनता को कोई मौका ही नहीं देते l
    इन्होने भी अन्य धर्म गुरुओं की तरह इस समाज की समाजिक सोच तथा जरूरतों का आंकलन किया और अपने संगठन से जुड़े प्रारंभिक अनुयायियों द्वारा मानसिक शोषण की तर्ज पर धर्म क्षेत्र की आड़ में वो कारोबार छेड़ दिया जिसमे शोषित इंसान की मानसिकता को पहले परिचय पर ही गुलाम बना लिया जाता हैं ध्यान दीजियेगा की ये भौतिकता से पीड़ित सदस्यों से ही पूछ लेते हैं कि आप कहाँ से आये हो और क्या समस्या है जैसे इनको मालुम ही ना हो l
    वैसे तो यह सभी तथ्य इस बात की मजबूत पुष्ठी करते हैं कि अध्यात्मिक क्षेत्र में इनके अल्ले-पल्ले कुछ भी नहीं हैं अगर फिर भी यकीन न हो तो इनसे जुड़े प्रारंभिक सदस्यों की आर्थिक स्थिति का आंकलन करके खुद देख लीजिये की जिस समय इन्होने इनके गुरुओं के साथ शुरुवात की थी उस समय इनकी आर्थिक हालत कैसी थी और आज कैसी हैं lअगर फिर भी यकीन ना हो तो पूछिए इनसे ये निम्नलिखित प्रशन इन सभी से अलग-अलग जिनके जवाब एक हैं लेकिन इनकी वाणियों में मिलेंगे अलग-अलग l
    1. मृत्यु अगर अटल सत्य हैं तो क्या इंसान कुछ और मोहलत या इच्छा मृत्यु के वरदान को प्राप्त कर सकता हैं ……?
    अगर हाँ तो कैसे और ना हैं तो क्यों ………?
    2. मृत्यु के बाद और प्रारंभ के बीच की परिक्रिया क्या है इसमें आत्मिक वायु प्राण सोच को किन-किन स्थितियों में से गुजरना पड़ता हैं l
    दोस्तों इन ब्रह्मज्ञानियों से जवाब की उम्मीद हैं अगर इन्हें पता है तो कि ये चक्र आखिरकार क्या हैं…?
    3. 84 लाख योनियों का हेर- फेर की प्रचलित मान्यता सत्य है तो पुन: जन्म इतनी जल्दी यदा -कदा कैसे हो जाता हैं ……? मनुष्य जीवन पुन: पाने के लिए हमें अर्थात मनुष्य को क्या करना चाहिए और कैसे आचरण अपनाना चाहिए या
    मोक्ष प्राप्त करने के लिए कैसे कर्म करने चाहिए ………?
    4. अगर ईश्वर साकार स्वरूप में हैं तो उनका स्वरूप क्या हैं और अगर
    वो निराकार शक्ति हैं तो कैसे …….? जबकि आधार के बिना रचना हैं ही नहीं जो सभी को मालुम हैं………?
    5. आप अध्यात्मिक ज्ञान दे ना कि किसी के भाग्य को बदलने का प्रयास करे, स्थितियां बदलने से लापरवाहिया फिर से स्वभाविक हैं तो बताइए कि मोक्ष से जुड़े रास्ते पर कैसी-कैसी दुश्वारियों का सामना इंसान को करना पड़ सकता हैं ….?
    उठाइए इस रहस्य पर से पर्दा दिखाइए अपनी अध्यात्मिक ज्ञान हांसिल कि हुई बौद्धिक क्षमता ताकि आप पर कोई संदेह उठाने पर से पहले सौ बार सोचे कि वाकई वो ब्रह्मज्ञानियों को चुनौती दे रहा हैं l
    6. उस असीम अतुलनीय समदर्शी के दरबार में कैसे दुष्कर्मो को कैसी सजा सुनाई जाती हैं क्या सभी मनुष्य आत्माओं को 84 लाख योनियों में से गुजरना अवश्य होता हैं या नहीं ….?
    7. भाग्य का निर्धारण और बदलाव करने में इन सक्षम हैं तो कैसे और अगर ….
    भाग्य पहले से निर्धारित हैं तो इंसान के कर्मो की क्या वैल्यू हैं …..?
    8. स्त्री प्रजाति और मर्द प्रजाति में से कौन सबसे मजबूत और उत्तरदायी हैं …?
    अगर स्त्री प्रजाति हैं तो इनकी ये दुर्दशा क्यों और कैसे ….? और मर्द प्रजाति है तो वह कुशल सरंक्षक क्यों नहीं साबित कर सकी इस स्त्री प्रजाति की..
    आपने इनके शोषण न अहोने के लिए आपने विशाल जन समूह और समर्थन के साथ समाज के आगे आकर प्रतिकार क्यों नहीं किया ……..?
    9. मानवीय हदों के अन्दर इस जीवन चक्र और प्रक्रति से जुड़े रहस्यों पर से पर्दा उठाये ताकि औसत इंसान प्रजाति को अर्थात आम इंसान और आप जैसे ब्रह्मज्ञानियों की क्षमताओं में भेद आसानी से हो सके ….?
    10. प्राक्रतिक आपदाओं से जुडी भविष्य में घटने वाली समस्याओं को विस्तार दीजिये ताकि ब्रह्म ज्ञान के आपके दावे की आप तथ्य पूर्ण पुष्ठी कर सके……?
    दोस्तों ! ना गुमराह हों और ना करे यहीं भारतीय 1674 का विशवास हैं और यहीं भारत वर्ष को अध्यात्मिक ज्ञान सन्देश हैं जिसने इनका प्रतिकार इसलिए किया क्योंकि इन्होने धर्म को आज पैसे कमाने की दूकान या व्यवसाय बना रखा हैं जो इस आवाज को कतई मंजूर नहीं l इसके लिए चाहे इसे इस समाज का प्रतिकार क्यों न करना पड़े बाकी जो मर्जी समझों दोस्तों यह वो आवाज हैं जिसकी पोटली में हिन्दुस्तान की खुशहाली का मूल मन्त्र विस्तार सहित हैं जो सभी को मान्य होगा बशर्ते रामदेव, अन्ना तथा राजनीतिज्ञ त्रिकोणीय समूह को छोड़कर इन्हें मंजूर इसलिए नहीं होगा क्योंकि दोस्तों दरअसल इनकी मानसिक मंशा ओर हैं और ये वास्तव में चाहते भी नहीं की भारत खुशहाल रास्ते पर कदम रखे इनकी मंशा और बताये गए समाधानों के पीछे छिपे सच के विस्तार को पढेंगे अगले ज्ञान संदेशों में जिन्होंने इस सोच को कोई तवज्जो इसलिए नहीं देनी चाही ताकि कहीं इनकी अभिलाषा को ऐसी आवाज का सामना ना करना पड़ जाए जिसके प्रतिकार हिन्दुस्तान की औसत सोच और मिडिया देख पड़ कर भी नहीं कर सकी l
    राजनीतिज्ञों को भनक लगी तो दैनिक जागरण की ब्लॉग साईट पर रखे गए आधारीय लेखों को Dlink कर दिया गया N.R.I. Indians से जिन्होंने एक दिन में ही वो प्यार दे दिया था जोकि सर्वश्रेष्ठ था की जद्दोजहद में उलझा ये समाज अभी तक नहीं दे पाया l दोस्तों यह वो आवाज हैं जिसने उस असीम अतुलनीय समदर्शी की कृपा से मानवीय हदों के अन्दर मानव जीवन चक्र के हर रहस्य तथा समाजिक बुराई की गहराई में उतर कर वो नैतिक समाधान और छिपे सच इक्कट्ठे किये जो दोष रहित है और रहेंगे भी ….
    JAI HIND
    *** अगर इन लिखी बातों पर समीक्षक या आम जन सहमत न हों तो मैं अपने विचारो के लिए समाज के प्रति पूर्ण उत्तरदायी हूँगा ,उसकी दी हुई असीम चेतना से प्रेरित में उस ईश्वरीय सोच के संदेशो को सभी तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हूँ, मानव कल्याण ही मेरा उद्दयेश है आपके समर्थन की तलाश में एक सर्वसाधारण इंसानी सोच …………
    The woods are lovely dark and deep, But I have promise to keep;
    Miles to go before I sleep, and miles to go before I sleep.
    These are the Inspirational Lines for me. Spread This Message As You can……………..
    Thanks to Robert Frost.
    राकेश वर्मा
    कोठी न. 144, हिलविउ एंक्लेव,
    जीरकपुर, मोहाली, पंजाब.
    Mobile No. 09780221522,7814102013,7307102001
    [email protected]

  3. b l tiwari says:

    hamare dehs ka aam aadmi behad eemandar orr sidha sasha hai ye farevi duniya ien devtayo ko thag hti ahi ye bichare bharosha karte hai apne jaisa midiya ki aabaj iektarfa hai midiya apni baat kahakar aage bad jata hai orr hum kewal sunkar rahjate hai hamari bhi suno to bhatt samjh mai aaj jaygi turant fiasla bhi ho jayega

  4. Bhai yes chor hai jise nirmalbaba kahte hai.

  5. बॉलीवुड की दुनिया बहुत रंगीन है कहते है पैसा है तो दुनिया की हर चीज खरीद सकते है । क्या यह सच पर मै नहीं मानता हु । पैसे हर चीज नहीं खरीदी और बेचीं जा सकती है । बॉलीवुड के नकली विडियो की असली कहानी क्या है । Read full Article http://www.bollywooddalal.com http://www.mediadalal.com http://www.sakshatkar.com.

  6. निर्मल बाबा ही नहीं और भी हैं…तमाम चमत्कारी दवाएं भी बिक रही हैं टीवी पर और चैनी तम्बाकू, शराब आदि के छद्म विज्ञापन भी धड़ल्ले से दिखाए जा रहे हैं जिनमें जानेमाने फ़िल्म-टीवी कलाकार (झूठ बोलते) दिखायी देते हैं। तमाम तान्त्रिक-ज्योतिषी लगभग हर चैनल पर बैठे दिखते हैं। चैनलों को कमाई से मतलब है, सरकार उदासीन। इनके बीच दर्शक मूर्ख बन लुट रहा है। मजे की बात यह है कि समाचार-कार्यक्रमों से ज्यादा विज्ञापन देखते हुए दर्शक तमाम खरीदारी भी कर रहा है और केबल वाले को या डिश प्रदाता कम्पनियों को नियमित धन भी दे रहा है। विज्ञान की इस देन का इससे घटिया दुरुपयोग और क्या हो सकता है! आप चाहें तो सपरिवार ऐसे विज्ञापनो और कार्यक्रमों की उपेक्षा आरम्भ कर सकते हैं- आज ही से।

  7. aap galat ho hum sahi hai nirmal baba chor hai.

  8. Pm Mishra says:

    aap ke srve se hm shmat nhi ha.aap ka srve glat hai.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

You might also like...

ये इमरजेन्सी नहीं, लोकतंत्र का मित्र बनकर लोकतंत्र की हत्या का खेल है..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: