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महिला पुलिस ट्रेनियों ने लगाये पुलिस अधिकारियों पर ज्यादती के आरोप…

By   /  April 28, 2012  /  2 Comments

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जोधपुर में ट्रेनिंग ले रहीं विभिन्न जिलों की महिला सिपाहियों ने पुलिस के आला अफसरों से अपने साथ ज्यादती और मानसिक प्रताड़ना की शिकायत की है। एक गुमनाम   प्रशिक्षु लड़कियों ने डीजीपी हरीश मीणा को  कहा है कि लाइन ऑफिसर (एलओ), इंडोर इंजार्च, हवलदार और सिपाहियों के बीच उनकी अस्मत खतरे में है। उन्होंने इस वर्ष होली के दूसरे दिन की रात का जिक्र करते हुए शोषण की पूरी कहानी भी बताई है। यह भी लिखा गया है कि उन्हें इस कदर डराया गया कि वे खुलेआम किसी को अपनी पीड़ा भी नहीं बता सकतीं। 

डीजीपी ने शिकायत को गंभीर मानते हुए पुलिस कमिश्नर भूपेंद्र कुमार दक को जांच के निर्देश दिए हैं। कमिश्नर इस मामले की गोपनीय जांच करवा रहे हैं।

प्रशिक्षुओं ने कहा- होली के दूसरे दिन हॉस्टल में ज्यादती की

पत्र में प्रशिक्षु महिलाओं ने लिखा है कि होली के दूसरे दिन रात में रोल चैक के बहाने थानेदार शिवलाल, हवलदार शोभाराम व सिपाही शिवलाल दो-तीन जनों के साथ हॉस्टल में आए। यहां से वे तीन-चार लड़कियों को सामने वाले हॉस्टल में ले गए। उस हॉस्टल में कोई अधिकारी मौजूद नहीं था। वहां उन लड़कियों के साथ सभी ने ज्यादती की। इसके बाद चुप रहने के लिए यह कहकर डराया कि उन्होंने पहले भी क्वार्टर गार्ड में ज्यादती की थी। इसकी शिकायतें भी हुई, लेकिन हमारा कुछ नहीं बिगड़ा।

पत्र में यह भी कहा गया कि ये लोग हॉस्टल की लाइटें जानबूझ कर बंद कर देते हैं, फिर हवलदार शोभाराम आदि हॉस्टल में घुस कर लड़कियों को अपने साथ ले जाते हैं।

जांच हो रही है
यह बेहद संवेदनशील व गोपनीय मामला है, इसलिए कुछ बताया नहीं जा सकता। हां, शिकायती पत्र की कॉपी मेरे पास आई है। जांच की जा रही हैं।
-भूपेंद्र कुमार दक, पुलिस कमिश्नर

अफसरों को दूंगा जवाब 
जो भी आरोप लगाए गए हैं, मुझे उन पर कुछ नहीं कहना है। अफसर जांच कर रहे हैं, वे पूछेंगे तो जवाब दे दूंगा। फिलहाल मैं छुट्टी पर जा रहा हूं।
-शिवलाल, एलओ, पुलिस लाइन


‘एलओ व कुछ अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ बदतमीजी करने की शिकायत आई है। जो प्रारम्भिक जांच में झूठी प्रतीत हो रही है।’
-गजानन्द वर्मा, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) जोधपुर।
(भास्कर)
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  • Published: 6 years ago on April 28, 2012
  • By:
  • Last Modified: April 28, 2012 @ 8:21 am
  • Filed Under: अपराध

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. Maanav Sharma says:

    पुलिस के नाम पर कलंक है!

  2. Mohan Johari says:

    बहुत जरूरी है की दोषियों को दण्डित किया जाए……..पुलिस के नाम पर कलंक है!

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