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मिलिए निर्मल बाबा के भी गुरु ‘महामंडलेश्वर स्वामी’ कुमारानन्द सरस्वती उर्फ ‘झोला छाप डॉक्टर’ से

By   /  May 13, 2012  /  20 Comments

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-धीरज श्रीवास्तव||

समागम के जरिए दुख दूर करने वाले निर्मल बाबा ने टीवी कलाकारों से अपना गुणगान करवाया था या नहीं ये तो अभी भी मीडिया और बाबा के बीच बहस का मुद्दा बना हुआ है, लेकिन आज हम आपको मिलवाने जा रहे हैं एक ऐसे स्वामी से जो इस फन का इस्तेमाल बरसों से अपने भक्तों को लुभाने और अपनी झोली भरने के लिए करते आ रहे हैं। बताया जाता है कि निर्मल बाबा ने इन स्वामी जी से काफी कुछ सीखा है और यहां तक कहा जाता है कि उनके किराए के भक्तों का प्रिय डायलॉग बाबा जी के ‘चरणों में कोटी-कोटी प्रणाम’ का भी ऑरिजनल कॉपीराइट इन्हीं का है।

निर्मल बाबा के इन कथित गुरु का असली नाम क्या है ये कम ही लोगों को पता है, लेकिन वे खुद को श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर ब्रह्मर्षि स्वामी कुमारानन्द सरस्वती जैसे भारी भरकम नाम से संबोधित करवाना पसंद करते हैं। इन कथित स्वामी जी के समागम का प्रसारण फिलहाल सोनी टीवी, ज़ी टीवी समेत ग्यारह चैनलों पर होता है।

कुछ ही साल पहले तक कुमारानन्द सरस्वती उर्फ़ कुमारस्वामी दिल्ली और एनसीआर में मोटापा कम करने की गोलियां बेचा करते थे। तब वे खुद को डॉक्टर के. कुमार के नाम से बुलाते थे और अपने तथाकथित आयुर्वेदिक क्लीनिक का नाम अरिहंता रखा था। यह अलग बात है कि डॉक्टर साहब ने कोई चिकित्सकीय डिग्री या डिप्लोमा भी नहीं हासिल किया है।

कुमार स्वामी का प्रिय शगल है बिना शब्दों का अर्थ जाने बार बार कुछ शब्दों को अपने भाषण में दोहराते रहना जैसे प्रारूप, महाप्रारूप, आलोक, महाआलोक, अनन्त अनन्त आदि। अगर इन महाशय जी का भाषण ध्यान से सुना जाए तो हिन्दी के बड़े-बड़े जानकारों तक को शब्दकोष की शरण लेनी पड़ जाएगी। अगर इन महाशय जी के द्वारा प्रयुक्त ‘अनन्त’ शब्द के अर्थ पर ही ध्यान दिया जाए तो शब्दकोष के रचयिता तक का सर चकरा जाए। कुमारस्वामी अपने परिचय में कहते हैं, ”मैं अनन्त अनन्त राष्ट्रों के अनन्त अनन्त राष्ट्राध्यक्षों, राष्ट्रपतियों, प्रधानमन्त्रियों का निजी चिकित्सक रहा हूँ।”

खास बात ये है कि खुद को अनन्त पीएम और प्रेसीडेंट के ‘प्राइवेट डॉक्टर’ बताने वाले इन महाशय को ‘प्रेसीडेंट ऑफ लायंस क्लब, भांडुप’ भी अपना चिकित्सक मानने को राजी नहीं हैं। इन महाराज से उनके सभी मौखिक दावों का प्रामाणिक सबूत कई बार ई-मेल और फोन के जरिए मांगा गया लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया।

निर्मल बाबा के विपरीत स्वामी जी ने कई संस्थाएं बना रखी हैं। उनके बारे में कुछ जानकारियां उनके आधिकारिक वेबसाइट www.cosmicgrace.org और www.bslnd.org पर मौजूद है। वेबसाइटों पर तरह तरह के दावे किए गए हैं। स्वामी जी ने अपने भक्तों की संख्या 500 मिलियन यानि 50 करोड़ से भी ज्यादा बताई है। उन्हीं वेबसाइटों पर कहीं 150 तो कहीं 170 देशों में भक्तों का मौजूद होना बताया गया है।

स्वामी जी अक्सर अपने भ्रामक विज्ञापन देश के प्रमुख अखबारों में भी प्रकाशित करवाते रहते हैं। इनमें से अधिकतर इस तरह प्रकाशित होते हैं मानों वे खबरें हों। कोई ‘समाचार’ नई दिल्ली ब्यूरो, कोई लंदन ब्यूरो तो कोई न्यूयॉर्क ब्यूरो से प्रकाशित होता है। कुछ अखबार तो विज्ञापन को प्रमोशनल फीचर जैसे भ्रामक नाम देकर स्वामी जी का काम आसान कर देते हैं, और कुछ अखबार तो ये भी नहीं लिखते। लोगों को यही लगता है कि कुमारस्वामी एक अंतर्राष्ट्रीय हस्ती हैं। उत्तर भारत के लगभग सभी प्रमुख अखबार में स्वामी जी का फुल पेज ऐड छप चुका है और कोई भी इनके खिलाफ़ लिखने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाता। (जारी..)

 

इस ढोंगी स्वामी के कुछ विज्ञापन यहां प्रदर्शित हैं। आप ही तय कीजिए कि ये विज्ञापन हैं या खबरें..?

कुमार स्वामी का एक और खबरनुमा विज्ञापन

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

20 Comments

  1. Vijay kant says:

    My comment…vk..main us khuda ka sukriya ada karta hoon.jis nai hum sub logo ko insan banaya aur jindgi di.aur khud bhi hamarai bich rahta hai.unka rup kaya hai ,kaisa hai,kahan rah tai hai,kuch pata nahi.lakin rab is dharti per rahata hai..yeh pata hai.aray rab ka kaya hai wo to kahi bhi kisi bhi samay,janam lai sak tai hai.wo bhagwan hai.kaya pata wo kisi ko hamarai bich bhaj dain.lakin aaj kal(jisai kalyug kahatai hai)is yug mai kuch bhi ho sakta hai.kyon ki agar koi acha marg dekhata hai to us marg per koi koi chalta hai.galt marg dekhai to sbhi chaltai hai.example/balmiki ji ramayan kai rachayta thai.lakin wo risi ban nai se pahlai ak daku thai aur bad mai wo ak risi banai aur ramayan rach dali.to kaya unko sapna aya tha ki wo risi ban jayan gai.to phir aj smaj mai kitnai guru ut pan huai hai . Samjh nahi aata kis ko dharn karyai ……is ka jabab bhi hai mairay pass

  2. Pankaj Garg says:

    helloooooooooo

  3. Pankaj Garg says:

    thank u

  4. Pankaj Garg says:

    hiii

  5. Pankaj Garg says:

    gd aftrenon

  6. Pankaj Garg says:

    hiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

  7. Paramjit Singh says:

    sahi kaha hai bhai sahib 100 % sach

  8. Vipin Mehrotra says:

    Inse bhi bade dhongi Dinakaran, aur uske hi padchinhon mein Baba nirmal hain.

  9. Thank you soooooo much Dhiraj ji. To inform us about this baba.

  10. Arvind Swami says:

    fhir bhi logon ki budhi nahi khulti…………………he mere parmattma aap hi kuch krippa karo……

  11. Arif Nisar says:

    इनका एक चेला है जिसने २००४ से इनके १ प्रोग्राम को बढाने में बहुत योगदान दिया…
    उस प्रोग्राम का नाम था आयुर्विज्ञान के रहस्य.. उस व्यक्ति का नाम हा सुशील कुमार वर्मा… तब ये सिर्फ डॉ. के कुमार ही थे और फोटो देख के लोगों का हाल बताया करते थे…
    फिर छत्तरपुर मंदिर से पहला समागम शुरू हु… बाद में ये श्री १००८ हो गए …..
    बहुत बातें है… फिर कभी फुर्सत में …

  12. Rahul Luhtra says:

    साफ़ सी बात है की आज के टाइम में जो आदमी कानून को थोडा सा भी जानता है वह उस से खेलने लग जाता है और तरह तरह के गैर क़ानूनी धंधे करने लगता है फिर वह चाहे कोई भी हो लोगो को उल्लू बना कर उनसे पैसे ठगना या फिर कोई गुंडा बनकर लोगो को डरा धमका कर और थोडा सा हिस्सा पुलिस को देकर बेखोफ घुमते हैं. यह है मेरा भारत. क्या करे, यह बात हर किसी की बहस का मुद्दा तो है पर करता कोई कुछ नही जो करने की हिम्मत करता है वो या तो मार दिया जाता है या उसे भी अपनी तरह बना लिया जाता है.

  13. ये देश सड़ गया है, यहां केवल एक बात लोग जानते है, पैसा,…जो उन्‍हें जन्‍म घुट्टी मे पिलाई जाती है, चाहे वह जन्‍म दिन, शादी, मंदिर…गूरूद्धार या दफर क्‍यों न हो हर जगह पैसा चढ़ाया जाता है…..ये सड़े गले लोग इसी बात का फायदा उठा कर लोगो का शोषण कर रहे है…..ओर इस देश का कानून….कूछ नही कर सकता। क्‍योंकि ये तीन चीजे आज भी गुलाम है, शिक्षा, पूलिस, ओर नायपालिका।.

  14. Sagar Athwal says:

    sr ma to phale he in dhogi babo ke bare me janta tha par aap ne acha kiy ke is ke pure ditela dal di is ke liye thanks.

  15. Gulchi Khara says:

    like this

  16. Naresh Bohra says:

    Jub tak jantaa nahi jaagegi…….nirmal baba jis ehajaaro baaba jantaa ko yuhi lootte rahenge…..

  17. बड़े भाई साहब भगवान तो कण कण में बसे हुए है आप में भी बसे हुए है |तो फिर अन्य चीजो में क्यों नहीं |

  18. जब तक चुथिया जिन्दा है अकल्वर भूखा नहीं मरेगा.

  19. Yogesh Garg says:

    धन्यवाद धीरज जी आपकी बात जनता तक पहुच गई है https://www.facebook.com/photo.php?fbid=404340832931229&set=a.382954501736529.92292.382860581745921&type=1.

  20. जहां तक मीडिया में प्रचार का सवाल है ,सारा खेल पेड न्‍यूज का है। बाकी तो आस्‍था और भक्ति के नाम चुहों और चीटियों से लगाकर भूत प्रेतो और पत्‍थरों तक को पूजना हमें घुट्टी के साथ के पिलाया जाता है।.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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