Loading...
You are here:  Home  >  राजनीति  >  Current Article

कल के अछूत बाबो सा अब पूजनीय कैसे हो गए?

By   /  May 3, 2012  /  6 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-तेजवानी गिरधर-

ये दुनिया भी अजीब है। कई बार जीते जी किसी शख्स की दो कौड़ी की इज्जत कर देती है और मरने के बाद पूजने लग जाती है। कभी राजस्थान के एक मात्र सिंह के नाम से अलंकृत पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भैरोंसिंह शेखावत जब उपराष्ट्रपति पद से निवृत्त हो कर प्रदेश में लौटे तो भाजपा में ऐसा माहौल बना दिया गया था, मानो वे कोई अनजान प्राणी हैं, जिनके लिए इस प्रदेश में कोई जगह ही नहीं है। इसे यूं भी कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी कि एक वक्त ऐसा भी आया, जब राजस्थान का यह शेर अपने ही प्रदेश में बेगाना करार दे दिया गया था।

अजमेर वासी भलीभांति जानते हैं कि जब वे दिल्ली से लौट कर दो बार अजमेर आए तो उनकी अगुवानी करने को चंद दिलेर भाजपा नेता ही साहस जुटा पाए थे। शेखावत जी की भतीजी संतोष कंवर शेखावत, युवा भाजपा नेता भंवर सिंह पलाड़ा और पूर्व मनोनीत पार्षद सत्यनारायण गर्ग सहित चंद नेता ही उनका स्वागत करने पहुंचे। अधिसंख्य भाजपा नेता और दोनों तत्कालीन विधायक प्रो. वासुदेव देवनानी व श्रीमती अनिता भदेल ने उनसे दूरी ही बनाए रखी। वजह थी मात्र ये कि अगर वे शेखावत से मिलने गए तो मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया नाराज हो जाएंगी। पूरे प्रदेश के भाजपाइयों में खौफ था कि वर्षों तक पार्टी की सेवा करने वाले वरिष्ठ नेताओं को खंडहर करार दे कर हाशिये पर धकेल देने वाली वसु मैडम अगर खफा हो गईं तो वे कहीं के नहीं रहेंगे। असल में वे नहीं चाहतीं थीं कि शेखावत जी की परिवार शृंखला राजनीति में वजूद कायम कर पाए। इसी कारण शेखावत जी के जवांई नरपत सिंह राजवी को भी पीछे धकेलने की उन्होंने भरसक कोशिश की।

मगर अब समय बदल गया है। स्व. शेखावत की द्वितीय पुण्यतिथि के अवसर पर आगामी मंगलवार दिनांक 15 मई 2012 को प्रात: 10.00 बजे उनके पैतृक गांव खाचरियावास जिला सीकर में उनकी आदमकद प्रतिमा लगाने के समारोह में न केवल पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा भाग लेंगी, अपितु प्रदेश सहित अजमेर के विधायक, पदाधिकारी व कार्यकर्ता भी शिरकत करेंगे। इसकी जानकारी स्वर्गीय शेखावत के दोहित्र अभिमन्यु सिंह राजवी ने एक संवाददाता सम्मेलन में दी, वह भी भाजपा नेताओं रासासिंह रावत, अजित सिंह राठौड़, सलावत खान, अरविन्द यादव, विधायक अनिता भदेल आदि की मौजूदगी में दी।

यह पहला मौका नहीं कि स्वर्गीय शेखावत को मरणोपरांत सम्मान दिया जा रहा है। पिछले साल 15 मई को भारतीय जनता पार्टी शहर जिला अजमेर ने स्वर्गीय शेखावत को पहली पुण्यतिथि पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उसमें भी अधिसंख्य भाजपा नेता शरीक हुए थे। प्रवक्ता व वरिष्ठ उपाध्यक्ष अरविंद यादव की ओर से जारी भाजपा की अधिकृत विज्ञप्ति में बाबो सा शेखावत जी के नाम के साथ भारतीय जनसंघ और भाजपा के संस्थापक सदस्य अलंकार भी जोड़े गए थे।

बेशक स्वर्गीय शेखावत न केवल भाजपाइयों के लिए अपितु पूरे प्रदेश के लिए सम्मानीय हैं। मगर सवाल ये है कि क्या आज श्रद्धा के पात्र ये वही शेखावत जी हैं, जिन्हें उनके जीते जी अजमेर आने पर किसी ने भाव नहीं दिया था। कैसी विडंबना। कल के अछूत बाबो सा आज अचानक पूजनीय कैसे हो गए? साफ है कि जीते जी उनसे वसुंधरा को खतरा था, मगर अब नहीं। उलटे अब तो उन्हें पूजने पर पूरे एक समुदाय के वोट हासिल होंगे।

(तेजवानी गिरधर राजस्थान के जाने-माने पत्रकार हैं। उनसे फोन नं. 7742067000 या ई-मेल ऐड्रेस  [email protected] पर संपर्क किया जा सकता है।)

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

6 Comments

  1. Hakam Ali says:

    ACHHI KHABAR HAI JANAB………

  2. Ajay Rathore says:

    U r my best&best uncal.

  3. Ajay Rathore says:

    I love u my uncal.

  4. me aap ki bat se shmat hu.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

एक क्रांतिकारी सफर का दर्दनाक अंत..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: