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कविताओं के गुण-धर्म के साथ-साथ छन्दों पर भी पकड़ रखें नवोदित कवि :नामवर सिंह

By   /  May 3, 2012  /  No Comments

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दिल्ली हिन्दी साहित्य सम्मेलन के तात्वावधान में कँवुर विक्रमादित्य सिंह रचित काव्य संग्रह कुछ तो बाकी रह गया का लोकार्पण पद्मभूषण गोपाल दास नीरज ,डा नामवर सिंह एवं श्री किशोर उपाधायाय द्वारा संयुक्त रुप से किया गया।

लाल कला मंच द्वारा इसके अध्यक्ष श्रीमती सोनू गुप्ता एवं अतिथियों द्वारा श्रीकुँवर विक्रमादित्य सिहं को इनकी कृति कुछ तो बाकी रह गया के लिए शब्द साधक सम्मान एवं डॉ.ए. कीर्तिवर्धन को हिन्दी सेवा के अमूल्य धरोहर कृति जतन से ओढी चदरिया के संपादन के लिए इन्हें भी शब्द-साधक सम्मान से अतिथियों एवं लाल कला मंच के सचिव श्री लाल बिहारी लाल द्वारा सम्मानित किया गया। इन्हें सम्मान स्वरुप अंग वस्त्र,1100 रुपये नकद,सम्मान पत्र, पदक एवं बुके प्रदान किया गया। समारोह का आयोजन हिन्दी भवन,आई.टी.ओ.,नई दिल्ली में समपन्न हुआ जिसकी अध्यक्षता आकाशवाणी दिल्ली के केन्द्र निदेशक श्री लक्ष्मी शंकर बाजपेयी ने किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. नामवर सिंह ने नवोदित कवियो के इसके गुण-धर्म पर ध्यान देने एवं छन्दों पर भी पकड़ होने की बात कही। पद्मभूषण गोपालदास नीरज ने आशीर्वचन के साथ-साथ अपनी दो चार कविताये भी सुनाईं। सान्निध्य दिल्ली के पूर्व महापौर श्री महेश चन्द्र शर्मा तथा हिन्दी त्रैमासिक- सरस्वती सुमन(देहरादून) के प्रधान संपादक डा आनन्द सुमन सिंह का था तथा काव्य संकलन कुछ तो बाकी रह गया पर परिर्चाचा में मुख्य वक्ता के रुप में आकाशवाणी दिल्ली के कार्यक्रम अधिकारी डा. हरि सिंह पाल एवं राष्ट्र किंकर के संपादक डा. विनोद बब्बर ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का संचालन डा. ए. कीर्तिवर्धन ने किया।

इस अवसर पर राजधानी दिल्ली से प्रकाशित द्विमासिक पत्रिका हम सब साथ-साथ द्वारा देश के दर्जनों साहित्यकारो को कार्यकारी संपादक श्री किशोर श्रीवास्तव एवं अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। (प्रेस विज्ञप्ति)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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