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अपने गिरेबान में क्यों नहीं झांकना चाहता उपासना की बजाय वासना का केंद्र बना चर्च?

By   /  May 4, 2012  /  8 Comments

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केरल के एक अंग्रेजी अख़बार में एक पूर्व नन सिस्टर मैरी चांडी की आने वाली पुस्तक के कुछ अंश क्या छपे, बवाल मच गया। अब तो पुस्तक रिलीज़ भी हो गई, लेकिन आनन-फानन में चर्च ने कह डाला, वो कभी नन थी ही नहीं। चर्च ने ये तो माना कि मैरी चांडी रसोइये के पद पर कुछ दिनों तक उसके साथ थी, लेकिन इस सवाल पर खामोश है कि पादरी ने उनके साथ बदसलूकी की थी या नहीं।

ग़ौरतलब है कि अपनी आत्मकथा के तौर पर छपी पुस्तक ‘ननमा निरंजवले स्वस्ति’ (Best wishes, Graceful Lady) में 67 वर्षीय सिस्टर मैरी चांडी ने लिखा है कि वो जिस चर्च में नन थीं, वहां के एक पादरी ने उनके साथ बलात्कार करने की कोशिश की थी और इसका विरोध करने पर उन्हें वह चर्च छोड़ना पड़ा था। यह घटना 12 साल पहले की है। उन्होंने अपनी आत्मकथा के माध्यम से चर्चों में हो रहे यौन शोषण का जिक्र किया है। नन की इस आत्मकथा ने इसाई, खासकर कैथोलिक समुदाय को झकझोर रख दिया है।

सिस्टर चांडी ने इस बात का राजफाश किया है कि कैथोलिक चर्चों में पादरियों द्वारा ननों का यौन शोषण किया जाता है। ”कैथोलिक चर्चों में पादरियों द्वारा ननों का यौन शोषण किया जाता है। यहां आध्यात्मिकता कम वासना ज्यादा होती है” सिस्टर चांडी ने लिखा है।

हालांकि चर्चों में हो रहे यौन शोषण पर लिखी गई यह पहली किताब नहीं है। करीब दो साल पहले एक नन सिस्टर जेस्मी की पुस्तक ‘आमेन : द ऑटोबायॉग्रफी ऑफ ए नन’ ने एक किताब तहलका मचा दिया था। उनकी किताब ने भी कॉन्वेंट में हो रहे यौन शोषण और व्यभिचार का खुलासा किया था, लेकिन तब भी चर्च ने अपने गिरेबान में झांकने की बजाय सिस्टर जेस्मी को ही झूठा ठहराया था।

सिस्टर मैरी ने लिखा है मैंने ‘वायनाड गिरिजाघर’ में हुए अपने अनुभव को समेटने की कोशिश की है। उनके मुताबिक चर्च में जिंदगी आध्यात्मिकता के बजाय वासना से भरी थी। उन्होंने लिखा है, एक पादरी ने मेरे साथ बलात्कार करने की कोशिश की थी। मैंने उस पर स्टूल चलाकर इज्जत बचाई थी।” सिस्टर मैरी ने लिखा है, मैंने जाना कि पादरी और नन दोनों ही मानवता की सेवा के संकल्प से भटक जाते हैं और अपनी शारीरिक जरूरतों की पूर्ति में लगे रहते हैं।” इसी वजह से तंग आकर उन्होंने गिरजाघर और कॉन्वेंट छोड़ दिया।

हालांकि सिस्टर मैरी ने अपनी जिंदगी के 40 साल नन के रूप में बिताए हैं। जैसा कि सिस्टर मैरी ने लिखा है कि वे 13 साल की उम्र में घर से भागकर नन बनी थीं। उन्होंने चर्चों के पादरियों पर न सिर्फ ननों से यौन संबंध बनाने, बल्कि उनसे पैदा हुए नवजात बच्चों को जान से मार डालने तक के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस आत्मकथा से कई ऐसे सवाल खड़े हुए हैं जिनका जवाब चर्च सिर्फ सिस्टर चांडी से पल्ला झाड़कर नहीं दे सकता।

चर्च सिस्टर चांडी को नन मानने से ही इंकार कर रहा है। वे कहती हैं कि उन्हें चर्च के इंकार पर कोई आश्चर्य नहीं हुआ। ‘वे तो मुझपर बाहरी होने का आरोप लगाएंगे ही, ये किसी धार्मिक समुदाय के लिए कोई अच्छी ख़बर तो नहीं है।” सिस्टर चांडी ने मीडिया से कहा।

उधर चर्च के लिए चिंता की बात ये भी है कि पुलप्ल्ली में अनाथ बच्चों के लिए आश्रम चला रही सिस्टर चांडी अपने कॉन्वेंट के कुछ बाकी बचे अनुभवों को भी छापने की योजना बना रही हैं।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

8 Comments

  1. Garam tel me daaldo saalo ko…

  2. Deva Nand Rai says:

    shayd ab in churcho ke krutyo ko is desh k bhartiya jan sake….., aur sirf jane nai inke dhongipan ko bahar ane de..

  3. Dinesh Singh says:

    aisa hi chritra hai in longo ka.

  4. अब तो सब खुल कर सामने आ चूका है……
    शर्माने की जरुरत नहीं है चर्च वालों …….
    अपने पादरी की करतूतों को न ही छुपाओ तो अच्छा है ……..

    कभी किसी पंडित को ऐसा करते हुए नहीं सुना …….
    ये फर्क है हिन्दू और इसाई धर्म में…….

    • Janadhikar Bharat says:

      विकास जी आपको बहुत बहुत धन्यवाद की आपने सही तथ्य रखा. दुनिया के मुकाबले आज भी पश्चिम की गन्दगी परसने के बाद भी bhartiya charitra के मामले me kishi भी dusare mat के मानने वालों से बहुत उचे है.

  5. कुछ उपासना स्थलों पर हो रही ऐसी घटनाएँ बहुत ही गंभीर चिंताजनक और संवेदनशील हैं, धर्म गुरुओं/ प्रचारकों को इसके समाधान पर मिलकर चिंतन और प्रयास करना चाहिए…

  6. Sudhir Kumar says:

    hungama hai kyun barpa?padri ,pandit&maulvi ke dwara hone wale papon ki list nahi dali ja sakti.

  7. IN SAMSYAO KA KOI SAMADAN KBHI NIKLEGA BHI.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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