Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

एक्सप्रेस ने भेजा विनोद मेहता और ‘ओपन’ को मानहानि का नोटिस, मांगे 500 करोड़

By   /  May 17, 2012  /  2 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

अंग्रेजी की दो पत्रिकाओं ‘ओपन’ और ‘आउटलुक’ से अखबार इंडियन एक्सप्रेस की कानूनी लड़ाई शुरु हो गई है। एक्सप्रेस ने ओपन के अप्रैल अंक में छपे आउटलुक के एडिटोरियल चेयरमैन विनोद मेहता के इंटरव्यू के संबंध में दोनों को एक कानूनी नोटिस भेजा है। इस इंटरव्यू में मेहता ने सेना के मूवमेंट के बारे में खबर छापने को लेकर एक्सप्रेस की कड़ी आलोचना की है। नोटिस में मानहानि के हर्ज़ाने के तौर पर 500 करोड़ की मांग की गई है।

अंग्रेजी टैबलॉयड मेल टुडे ने जब इस बारे में एक्सप्रेस के संपादक शेखर गुप्ता से बातचीत करनी चाही तो उन्होंने टका सा जवाब दे दिया कि वो बात नहीं करेंगे। जब उनसे पूछा गया कि क्या विनोद मेहता का इंटरव्यू उन्हें बदनाम करने के लिए था, तो उनका जवाब था, मैं इस बारे में कोई बात नहीं करना चाहता। आप हमारे लीगल डायरेक्टर से बात कर लीजिए।

विनोद मेहता ने नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे इसका जवाब खुली बहस में देना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें लीगल नोटिस से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन इस तरह के मामलों को अदालत की बजाय टीवी पर बहस के जरिए निपटाए जाते तो बेहतर होता।

उधर इंडियन एक्सप्रेस की लीगल डायरेक्टर वैदेही ठक्कर ने कई बार फोन करने के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया। वकील पूर्वी कमानी के जरिए भेजे इस नोटिस में कहा गया है कि ओपन मैगज़ीन ने विनोद मेहता क इंटरव्यू इंडियन एक्सप्रेस की छवि को खराब करने के लिए छापा है। नोटिस में कहा गया है कि 19 अप्रैल को छपे इस इंटरव्यू पर शेखर गुप्ता के सहकर्मी, पाठक और आम आदमी कई बार ध्यान  दिला चुके हैं।

नोटिस में दोनों को माफीनामा छापने के अलावा इंडियन एक्सप्रेस, शेखर गुप्ता और तीन अन्य पत्रकारों के अकाउंट में 100-100 करोड़ जमा करने की मांग की गई है। नोटिस के जरिए गुप्ता ने ओपन के अलावा आउटलुक पर भी हमला बोला है। उन्होंने संपादकों की जिम्मेदारी याद दिलाते हुए आउटलुक पर रतन टाटा की छवि खराब करने के भी आरोप लगाए हैं।

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. Shivnath, You must be aware and the people of India, who have slightest knowledge of the functioning of media houses, know about the "great Editor Shekhar Gupta", who is said to be a master operator in journalists' circles right from garabbing IN illegally and operating in hush and hush manner in the Delhi darwar. Enlightened journalists know how Shekhar gupta asked his fellow colleagues to do important stories and when the stories are completed , Shekhar Gupta makes a deal with related persons, affecting by the reports and spiked the stories? This has been once came to light in a big way when Ram Bilas Paswan was minister in Vajpayee government! Shekhar Gupta after making deal with Ram Bilas , skipped one of the best story of the year by his reporter-that journalist revolted openly and abused Shekhar Gupta openly and resigned from IE. Such stories of blackmailing by Shekhar Gupta are well known in Delhi circles!Vinod Mehta, a free , frank, and upright journalist has rightly challenged Shekhar Gupta for open house discussions over such issue! If Shekhar Gupta has gut feeling, he should be prepared for the same why this damage suits against Open and Vinod Mehta?

  2. Shivnath Jha says:

    भारत में अगर कभी पत्रकारों और संपादकों के भूमिका की जांच की गयी तो शेखर गुप्ता उस सूची से अछूता नहीं रहेंगे – कैसे एक रिपोर्टर कब्ज़ा किया इंडियन एक्सप्रेस समूह को – राम नाथ गोयनका के बेटा से क्या "गलती" हुयी थी जो शेखर गुप्ता के सामने ठेन्धुने टेक दिए और मालिक बना दिया समूह का?

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

एक जज की मौत : The Caravan की सिहरा देने वाली वह स्‍टोरी जिस पर मीडिया चुप है..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: