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जया बच्चन ने शिकायत की हो या नहीं, राज्यसभा टीवी का इससे कोई वास्ता नहीं…

By   /  May 17, 2012  /  3 Comments

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समाजवादी पार्टी सांसद जया बच्चन एक बार फिर रेखा से अपने रिश्तों को लेकर चर्चा में हैं। खबर है कि वह रेखा के शपथ ग्रहण की टीवी कवरेज को लेकर नाराज हैं। उनका कहना है कि रेखा के शपथ ग्रहण के दौरान कैमरा बार-बार उनके ऊपर लाने की कोई जरूरत नहीं थी। उन्होंने इस बारे में राज्यसभा टीवी के खिलाफ बाकायदा शिकायत भी दर्ज कराई है। उधर राज्यसभा सचिवालय ने इस खबर का खंडन किया है और कहा है कि राज्यसभा टीवी का इस प्रसारण से कोई संबंध नहीं है।

बताया जाता है कि यह पहला मामला है जब किसी सांसद ने इस बात के लिए शिकायत दर्ज कराई है कि टीवी कैमरा बार-बार उस पर क्यों फोकस कर रहा था? समाचार चैनल टाइम्स नाउ ने इस बारे में खबर दी है।

गौरतलब है कि जया बच्चन और रेखा के बीच रिश्ते तनावपूर्ण बताए जाते रहे हैं। राज्यसभा में रेखा की सीट निर्धारित होने के बाद जब जया ने अपनी सीट बदलवाई तो उसके बारे में भी मीडिया में यही कहा गया कि उनसे आमना-सामना टालने के लिए ही जया ने अपनी सीट बदलवाई। हालांकि जया का कहना था कि समाजवादी पार्टी के सांसद बृजभूषण तिवारी की अचानक हुई मौत की वजह से उन्होंने अपनी सीट बदलवाई। दिवंगत तिवारी की सीट उनके नजदीक ही थी।

रेखा के शपथग्रहण के दौरान सबका ध्यान इस बात पर था कि जया की क्या प्रतिक्रिया होती है। इस वजह से राज्यसभा टीवी का कैमरा भी बार-बार जया बच्चन को दिखा रहा था। अब जया ने इस पर आपत्ति जताई है।

इस बीच राज्यसभा सचिवालय ने इस खबर का खंडन किया है कि सांसद जया बच्चन ने उसके पास टीवी कवरेज को लेकर राज्यसभा टीवी की शिकायत की है। सचिवालय की ओर से जारी बयान में यह भी कहा गया है कि टीवी कवरेज दूरदर्शन के ही जिम्मे है। यह काम अभी राज्यसभा टीवी को नहीं सौंपा गया है।

संसदीय कार्य मंत्री राजीव शुक्ल ने नाम लिए बगैर यह बात मानी कि कुछ सांसदों ने टीवी कवरेज की शिकायत की थी। (नभाटा)

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  • Published: 8 years ago on May 17, 2012
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  • Last Modified: May 17, 2012 @ 4:21 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. देखा एक ख्वाब तो…

  2. Devendra Surjan, Jabalpur says:

    जया हो जाए गुस्सा तो बनता है , केमरे का भी केंद्रित हो जाना उन पर बाजिब.
    रेखा के शपथ लेने से जया के चेहरे, पर आ गईं रेखाओं को पढ़ने के लिए.

  3. Pawel Parwez says:

    आगे आगे देखिये होता है क्या!

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