/अब क्या ‘FRAUD’ कहने के लिए नरेंद्र मोदी पर मानहानि का दावा करेंगे निर्मल बाबा?

अब क्या ‘FRAUD’ कहने के लिए नरेंद्र मोदी पर मानहानि का दावा करेंगे निर्मल बाबा?

बीजेपी की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी को अपने कदमों में झुकाने के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब संबोधन किया तो उनकी बातों में आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। भाषण शुरू करते ही उन्‍होंने सीधे केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपने निशाने पर लिया। मोदी ने कहा कि हर बात पर सरकार गठबंधन की आड़ में बचने की फिराक में लगी रहती है।

महंगाई की समस्या पर नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर एनडीए की सरकार बनी तो इसे दो दिन में काबू में कर लिया जाएगा। उन्‍होंने चुटकी लेते हुए कहा कि केंद्र में कई निर्मल बाबा जैसे ठग बैठे हैं और दिल्‍ली में बैठी केंद्र सरकार निर्मल दरबार बन गई है। मोदी ने कहा कि वादे तो सब करते हैं लेकिन करके कोई नहीं दिखाता। समझा जाता है कि अपने इस वक्तव्य से उन्होंने पार्टी के कुछ नेताओं को निर्मल बाबा की तरफ झुकने के प्रति भी आगाह कर दिया है।

केंद्र पर झूठे वादे करने आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ राज्‍यों की मेहनत पर ऐश कर रही है केंद्र सरकार। देश में बिजली की समस्‍या पर मोदी ने कहा कि भ्रष्‍टाचार के कारण देश में बिजली की कमी है, साथ ही कोयला घोटाले की वजह से देश में बिजली की कमी हो गई है।
एनसीटीसी की चर्चा करते हुए मोदी ने कहा कि एनसीटीसी राज्‍यों से अधिकार छीनने की साजिश है और राज्‍यों के अधिकार छीने जा रहे हैं। मोदी ने केंद्र पर संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया।

सेना प्रमुख की उम्र पर पिछले दिनों हुए विवाद की चर्चा करते हुए मोदी ने सरकार पर सेना से भिड़ने का आरोप भी लगाया। मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री अक्‍सर सरकार की उप‍लब्धियां गिनवाते रहते हैं लेकिन वास्‍तव में सरकार के पास विकास का कोई मॉडल नहीं है। मोदी ने यह भी कहा कि आतंकवाद से निपटने में केंद्र सरकार नाकाम रही है।

अब ग़ौर करने वाली बात यह है कि ठगी का प्रतीक बन चुके निर्मल बाबा वैसे तो उनके खिलाफ़ आलेख या रिपोर्ट लिखने वाली वेबसाइटों और मीडिया घरानों को तो नोटिस भिजवा देते हैं, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय ठग घोषित करने के लिए क्या वे नरेंद्र मोदी को भी कानूनी नोटिस भिजवाएंगे?

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.