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दस साल बाद आई टेलीकॉम नीति, रोमिंग राज होगा खत्म, देश भर में चलेगा एक ही नंबर

By   /  May 31, 2012  /  1 Comment

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मोबाइल पर लगने वाला रोमिंग चार्ज अब जल्द ही खत्म हो जाएगा। कैबिनेट ने गुरुवार को राष्ट्रीय दूरसंचार नीति-2012 को मंजूरी दे दी है, जिसके चलते अब मोबाइल के दूसरे टेलीकॉम सर्किल में इस्तेमाल पर लगने वाला रोमिंग चार्ज खत्म हो जाएगा। इतना ही नहीं, पूरे देश में एक ही मोबाइल नंबर काम कर सकेगा, यानी सर्किल बदलने पर मोबाइल नंबर बदलने की जरूरत नहीं रह जाएगी। इसके अलावा स्पेक्ट्रम लाइसेंस के लिए नए सिरे से नीलामी किए जाने का भी फैसला लिया गया है।

नई दूरसंचार नीति में देश भर में रोमिंग चार्ज खत्म करने के साथ ही देशव्यापी नंबर पोर्टिबिलिटी और इंटरनेट ब्रॉडबैंड की स्पीड बढ़ाने की भी बात शामिल है। नंबर पोर्टेबिलिटी की सुविधा का विस्तार करते हुए नई दूरसंचार नीति में इस बात की इजाजत दी गई है कि कोई भी ग्राहक अब देश में कहीं भी जाए, उसे अपना मोबाइल नंबर बदलने की जरूरत नहीं होगी। इसका मतलब यह हुआ कि सर्विस प्रोवाइडर या शहर (सर्किल) बदलने पर आप अपना पुराना मोबाइल नंबर बरकरार रख सकते हैं।

नई दूरसंचार नीति स्पेक्ट्रम की पूलिंग, सहभागिता और आने वाले समय में कारोबार की भी इजाजत देगा। इससे एक कंपनी के पास अधिक मात्रा में स्पेक्ट्रम होने पर वह इसे अन्य के साथ बांट सकती है या फिर उसे बेचकर लाभ कमा सकती है। हालांकि इसके लिए निश्चित तौर पर उन्हें कुछ नियमों का पालन करना होगा। टेलीकॉम इंडस्ट्री लंबे समय से इसकी मांग कर रही थी।

सरकार की ओर से यह नीति लगभग एक दशक बाद उस समय लाई गई है जब पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा समेत 14 लोग सन 2008 में हुए स्पेक्ट्रम आंवटन में कथित गड़बड़ी को लेकर आरोपों के घेरे में हैं। सभी का कहना है कि उन्होंने उस समय की नीति का पालन किया था जो कानूनन गलत नहीं ठहराया जा सकता और ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई सही नहीं है। नई टेलीकॉम पॉलिसी में वर्ष 2020 तक हर गांव तक फोन पहुंचाने के साथ ही ग्रामीण टेलीफोन घनत्व को 37 से बढ़ाकर शत-प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. Yogendar Sharma says:

    roaming kab khatam hogi.

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