/दिल्ली में गर्मी ने तोड़ा रिकॉर्ड, बैंको के ATM की शरण में पहुंचे रोमांटिक जोड़े

दिल्ली में गर्मी ने तोड़ा रिकॉर्ड, बैंको के ATM की शरण में पहुंचे रोमांटिक जोड़े

 

 

देश की राजधानी दिल्ली में गरमी ने अपने दस सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। फिलहाल गर्मी से छुटकारा भी मिलता नहीं दिख रहा। दिल्ली समेत पूरा उत्तर भारत तप रहा है। दिल्ली में तापमान 45 डिग्री के आसपास है और देश के बाकी शहरों का हाल भी कुछ ऐसा ही है। ऐसे में रोमांटिक जोड़े जाएं तो जाएं कहां?

 

 

 

दिल्ली के एक प्रतिष्ठित बैंक में एटीएम के कैमरे में जो कुछ कैद हुआ उसमें इस सवाल का जवाब छुपा है। एटीएम के एयरकंडीशनर और ठंढक को बरकरार रखने के लिए लगे काले शीशे इन जोड़ों के लिए खासे मददगार सिद्ध हो रहे हैं।

 

 

 

 

 

दरअसल, एटीएम मशीन कंप्यूटर से जुड़ा होता है और उसे लगातार चलाने के लिए एयरकंडीशनर के जरिए ठंढक बनाए रखने की जरूरत होती है। लेकिन इस ठंढक का गर्मी के मौसम में महत्व खासा बढ़ जाता है।

 

 

 

एक तरफ जहां पार्कों और पेड़ों की छांव में सूखी गर्म हवा के थपेड़ों से कुछ मिनट भी बैठना मुश्किल है वहीं ये एटीएम इन जोड़ों की खास मुफ़ीद जगह बनती जा रही है। हालांकि इस रिकॉर्डिंग में इस बात के सुबूत नहीं मिले हैं, लेकिन कई जगहों से खबरे मिली हैं कि एटीएम के गार्ड की इस रोमांटिक जगह को कुछ मिनटों के लिए दिलाने में अहम भूमिका होती है।

 

 

 

 

 

कुछ उपभोक्ताओं का कहना है कि प्रेमी जोड़ों से मामूली सुविधा शुल्क लेकर गार्ड कई बार एटीएम के बाहर ‘खराब है’ का बोर्ड भी लगा देते हैं और उन्हें ‘पूरी प्राइवेसी’ देते हैं। हालांकि ये नजारा दिल्ली के एटीएम का बताया जा रहा है, लेकिन लोगों का कहना है कि पूरे देश में एटीएम रोमांस के लिए सबसे पसंदीदा जगह बनते जा रहे हैं।

 

बताया जाता है कि बैंक अधिकारी एटीएम के इस दुरुपयोग से बचने के लिए उपाय ढूंढने में जुटे हैं, क्योंकि रोमांस अपराध की श्रेणी में भी नहीं आता, जिससे किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई की जा सके।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.