/रांची में वेब पोर्टल के संपादक मुकेश भारतीय जेल में, पॉयनियर ने कहा ब्लैकमेलर

रांची में वेब पोर्टल के संपादक मुकेश भारतीय जेल में, पॉयनियर ने कहा ब्लैकमेलर

झारखंड से एक सनसनीखेज़ खबर आ रही है कि राजधानी रांची में एक पोर्टल राजनामा.कॉम के संचालक और संपादक मुकेश भारतीय को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मुकेश भारतीय ने पायनियर अखबार और प्रदेश सूचना विभाग की मिलीभगत के खिलाफ़ कुछ रिपोर्टो को भी प्रकाशित किया था। बताया जाता है कि इन रिपोर्टों से बौखलाकर पायनियर, रांची के फ्रेंचाइज़ी धारक और प्रकाशक पवन बजाज ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज़ कर मुकेश भारतीय को सोते वक्त घर से उठवा लिया।

मुकेश को रांची की एक अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। उनपर पायनियर के प्रकाशक पवन बजाज ने लिखित आरोप लगाया है कि उन्होंने पंद्रह लाख रुपये मांगे थे। उधर, मुकेश भारतीय के करीबियों का कहना है कि मुकेश भारतीय ने आरटीआई के जरिए पायनियर अखबार और सूचना विभाग की कथित मिलीभगत से संबंधित कई जानकारियां मांगी थी और कुछ अन्य तथ्यों का पता लगाया था। इससे पायनियर के गोरखधंधे का खुलासा हो रहा था।

झारखंड के पब्लिक रिलेशन डिपार्टमेंट का कहना है कि पायनियर का सर्कुलेशन बावन हजार है, और इसी आंकड़े के आधार पर उसे विज्ञापन दिया जाता है, जबकि मुकेश भारतीय का कहना है कि पायनियर जिस सन्मार्ग प्रेस में छपता है उसके आंकड़े बताते हैं कि वहां द पायनियर सिर्फ पंद्रह सौ कापी प्रकाशित होती हैं। तो, द पायनियर अखबार हजारों कापियों के फर्जी आंकड़े दिखाकर विज्ञापन ले रहा है जो गलत है।

इससे संबंधित खबरें मुकेश भारतीय अपने पोर्टल पर प्रकाशित कर चुके थे। झारखंड में अखबारों, चैनलों, पोर्टलों आदि को मिलने वाले विज्ञापन के बारे में भी जानकारी पब्लिक रिलेशन डिपार्टमेंट से मांगी थी। इस सबके कारण विभागीय अधिकारी भी उनसे खुन्नस खाते थे।

ख़बर है कि मुकेश की गिरफ़तारी के लिए गोंडा थाने की पुलिस इस अंदाज़ में पहुंची जैसे किसी पत्रकार को नहीं, आतंकवादी को पकड़ना हो। पहले कई राइफ़लधारी जवानों ने उनके मकान को घेर लिया, फिर एक सब इंस्पेक्टर ने उनकी बालकनी से उनपर पिस्तौल तानते हुए धमकाया कि अगर वे बाहर नहीं निकले तो उन्हें गोली मार दी जाएगी। मुकेश को उनके ओरमांझी स्थित घर की दूसरी मंजिल (छत) पर दूसरे के मकान की तरफ से चढ़कर धर दबोचा गया। पुलिस उनके लैपटॉप, मोबाइल एवं इंटरनेट मॉडेम भी उठाकर ले गई।

पत्रकारों को मुकेश की गिरफ़्तारी की खबर तीन दिन पहले ही आई थी, लेकिन उनकी खबर को किसी भी मीडिया संस्थान ने प्रमुखता नहीं दी। बताया जाता है कि मुकेश ने अपने पोर्टल में झारखंड सूचना विभाग के साथ-साथ उससे विज्ञापन-लाभ उठाने वाले लगभग सभी स्थानीय अखबारों और मीडिया संस्थानों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, इसीलिए कोई उन्हें तवज्ज़ो नहीं दे रहा।

ग़िरफ्तारी की खबर और उनके पक्ष की बात झारखंड के ही एक मोबाइल नंबर 09386373554 से ही पत्रकारों के पास आई थी, लेकिन जब मीडिया दरबार ने इस नंबर पर बात करने की कोशिश की तो एक सज्जन ने फोन उठा कर मुकेश के जेल भेजे जाने की सूचना तो दी, लेकिन अगले ही पल मीडिया की बेरुखी की शिक़ायत करते हुए कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया। इसके बाद कॉल करने पर कभी क्रॉस कनेक्शन तो कभी रॉन्ग नंबर के बहाने उन सज्जन ने कोई बात नहीं की।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.