/आमिर के ‘सत्यमेव जयते’ से प्रेरित है दूरदर्शन का सीरीयल ‘कुल की कन्या ज्योति’

आमिर के ‘सत्यमेव जयते’ से प्रेरित है दूरदर्शन का सीरीयल ‘कुल की कन्या ज्योति’

अभिनेता आमिर खान ने अपने कार्यक्रम ‘सत्यमेव जयते’ में कन्या भ्रूण हत्या से सम्बंधित मामला उठा कर, हमें इस गंभीर मामले के बारे मे सोचने पर मजबूर कर दिया. उन्होंने समाज की जो सच्चाई हम सबके सामने पेश की है, वो बहुत ही दुखद है लेकिन आमिर का यह प्रयास बहुत ही काबिले तारीफ है.

पहले भी समय-समय पर टीवी धारावाहिकों के द्वारा इस गंभीर मामले को लोगों के सामने लाने की कोशिश की गए है. “घर की लक्ष्मी बेटियां” और “बेटियां अपनी या पराया धन” भी इन ही मुद्दों पर आधारित धारावाहिक थें, जिन्होने समाज में फैले इन्ही गंभीर मुद्दों को उठाया था. दूरदर्शन पर आनेवाला धारावाहिक ‘कुल की ज्योति कन्या’ भी इस ही कड़ी का एक और प्रयास है, जो की हमारे दिल और दिमाग को झकझोर देने वाली समाज की इस सच्चाई ‘कन्या भ्रूण हत्या’ के मामले को लोगों के सामने लाएगा.

जिसकी पहली कड़ी प्रसारित होगी 7 जून को दूरदर्शन पर दोपहर 12 बजे. इसके बाद यह धारावाहिक हर सोमवार से शुक्रवार प्रसारित होगा दूरदर्शन पर दोपहर 12 बजे.

धारावाहिक “कुल की ज्योति कन्या” की कहानी है एक ऐसे इंसान की जो बेटे की चाह में अपनी गर्भवती पत्नी और अपनी दो छोटी बेटियों को घर से निकाल देता है और दूसरी शादी कर लेता है लेकिन बाद में उसकी दूसरी शादी से हुए बेटे ही उसे किस तरह से प्रताडित करते हैं? आखिर में उसकी वो बेटियाँ ही उसकी देखभाल करती है जिन्हें उसने बचपन में अपने घर से निकाल दिया था और उसे अपनी गलतियों का अहसास होता है कि वो कितना गलत सोचता था जबकि कुल की ज्योति तो कन्या ही होती है.

डी एस प्रोडक्शन के बैनर में बने इस धारावाहिक के निर्माता दीपक शर्मा कहते हैं, “हमारी पूरी दुनिया महिलाओं के आसपास घूमती है, वो हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है हमारी माँ, बहन, बेटी सभी महिलाएँ है जिनके बिना हम अपना आस्तित्व सोच भी नहीं सकते. अगर उनके लिए कुछ करने का मौका मिले तो इस से बड़ी बात और क्या हो सकती है. मेरे घर में भी मेरी एक छोटी पारी है और ये भी इस धारावाहिक से जुड़ने का एक बहुत ही महत्पूर्ण कारण है.”

आलोक दीक्षित इस धारावाहिक के निर्देशक हैं. धारावाहिक के लेखक हैं पारस जैसवाल. जिन कलाकारों ने इसमें अभिनय किया है उनमे मुख्य हैं अभिनेत्री उपासना सिंह, गजेन्द्र चैहान, आशा सिंह, साहिबा, विजय भाटिया, अमित पचैरी, मल्लिका, मनीष जैन, रमेश गोयल, सुमन गुप्ता, राजेश तिवारी, अंजू राजीव और चारु वाधवा. (प्रेस विज्ञप्ति)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.