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बेशर्मी और फिजूलखर्ची की भी कोई हद होती है…

By   /  June 9, 2012  /  3 Comments

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– राजीव गुप्ता||
यूपीए की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी ने पिछले महीने अपनी सरकार की उपलब्धियों का “जनता के लिए रिपोर्ट 2011 -2012 ”  मे लेखा – जोखा पेश करते हुए कहा था कि भारत में आर्थिक विकास दर अब तेजी के पथ पर है लेकिन इसका लाभ अभी हमारे लाखो गरीबो को पहुचना बाकी है ! परन्तु योजना आयोग ने  पिछले दिनों गरीबो के लिए आलीशान शौचालय बनवाकर सोनिया जी की इन बातो को झुठला दिया ! गौरतलब है कि योजना आयोग के मुताबिक रोजाना 28 रुपए से ज्यादा खर्च करने वाला गरीब नहीं है ! गरीबी की ‘अनूठी’ परिभाषा तय करने वाले योजना आयोग की “फिजूलखर्ची” का नमूना यह है कि उसने अपने 2  शौचालयों की मरम्मत पर ही 35 लाख रुपए खर्च कर  डाले ! सूचना अधिकार कानून (RTI) के तहत दाखिल एक अर्जी के जवाब से यह आंकड़ा सामने आया है ! हालांकि योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह इस बारे में अब सफाई दे रहे हैं कि यह रकम सिर्फ 2  शौचालयों पर खर्च नहीं की गई और यह खर्च सचमुच जरूरी था ! ध्यान देने योग्य है कि पिछले वर्ष अगस्त महीने में प्रधानमंत्री को इसी योजना आयोग ने  विकास दर बढ़ाने के 3 मंत्र  दिए थे जिसमे से एक  प्रमुख मन्त्र सरकारी – खर्च को कम करने को लेकर था ! सरकारी खर्च कम करने के चलते और बदहाल अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार द्वारा नयी नौकरियों पर रोक तक लगाने की बात कही गयी !
बढ़ती महगाई ने एक तरफ जहा आम आदमी का जीना दूभर कर रखा है तो वही दूसरी तरफ गिरती विकास दर ने भारत की पूरी अर्थव्यवस्था को चरमरा कर रख दिया है जिसकी पुष्टि अभी हाल में ही प्रधानमंत्री ने भी की ! दुनिया भर में आर्थिक बदहाली के चलते भारत सहित समूचा विश्व फिर से आर्थिक मंदी की तरफ बढ़ रहा है ! आगे आने वाले दिन भारत के लिए बहुत ही कष्टदाई हो सकते है क्योंकि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह दूसरा स्लोडाउन ज्यादा लंबा और गहरा हो सकता है ! फिर ऐसी हालत ऐसे समय आ रही है, जब भारत की अर्थव्यवस्था पहले से ही डगमगाई हुई है ! विकास की रफ्तार धीमी पड़ रही है, सरकार कमजोर दिख रही है और उसका सारा लेखा – जोखा बिगड़ा हुआ है ! बाज़ार में रूपये की कीमत लगातार घाट रही है ! विदेशी निवेशक भाग रहे हैं और बिजनेस की उम्मीदें अंतिम सांस लेने के कगार पर है ! सभी अर्थशास्त्री अब एक सुर में सुर मिलाकर बोल रहे है कि ऐसी खस्ता हाल के लिए जिम्मेदार हमारी सरकार की अपनी गलतियां  है, जिसके लिए केवल दुनिया की खराब हवाओं को कसूरवार ठहराया जाना ठीक नहीं है ! परन्तु यूपीए की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी के अनुसार उनकी सरकार के कार्यक्रम न केवल लाभकारी है अपितु नीतिया भी सही है !
आर्थिक अपंगता की मार झेल रही अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए  बुधवार को  मनमोहन की अगुआई वाली यूपीए – 2 सरकार ने पूर्व राजग सरकार की तर्ज पर इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान केन्द्रित कर कुछ योजनाओं को हरी झंडी दिखाकर सरकार को “चलती हुई सरकार” के रूप में दिखाने की कोशिश की ! जिसमे रेलवे , नागरिक विमानन, सड़क, कोयला, बिजली और बंदरगाह से सम्बंधित लगभग चार दर्जन योजनाये शामिल है ! ध्यान देने योग्य है कि पूर्व प्रधानमंत्री की अगुआई में वर्ष 2000 – 2001 में  तत्कालीन केंद्र सरकार ने सड़क, बंदरगाह और उड्डयन क्षेत्र में निवेश बढ़कर अर्थव्यवस्था की रफ़्तार को तेजी से बढाया था ! इससे भारत के इत्मीनान और भरोसे की धाक जमी थी ! सही ठिकाने की तलाश में तड़प रही विदेशी पूंजी को यहां आने की हिम्मत हुई जिससे तत्कालीन सरकार की साख भी बढी  थी ! सरकार के इन फैसलों से अभी तक बदकिस्मती से ठप नजर आ रही सरकार थोड़ी खिसकती हुई दिखी ! अन्यथा  सरकार का अभी तक सारा ध्यान घोटालों, आंदोलनों, असंतोष और सियासत पर ही था ! सरकार को अब इस आर्थिक बदहाली से बाहर आने के लिए उसे इन मुद्दों को निपटाकर अपनी बची-खुची साख बचानी चाहिए !
वित्‍त वर्ष 2012-13 अवसंरचना के लक्ष्‍यों को अंतिम रूप देने के लिए आयोजित बैठक में प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह के  अनुसार पिछले आठ वर्षों के दौरान आकर्षक उच्‍च वृद्धि दर प्राप्‍त करने और विश्‍व में दूसरी सबसे तेज बढती बडी अर्थव्‍यवस्‍था के रूप में उभरने के बाद भारत की अर्थव्यवस्था अब अत्‍यधिक मुश्किल दौर से गुजर रही है ! चारों तरफ यूरोजोन चिंता का कारण बना हुआ है ! घरेलू स्‍तर पर बढती मांग के साथ-साथ आपूर्ति पक्ष में मौजूदा अवरोधकों के कारण महंगाई पर दबाव बढ़ रहा है !  इन सभी कारकों के कारण एक विकट आर्थिक चुनौती है !   हालाँकि पिछले वर्ष औद्योगिक चैंबर पीएचडीसीसीआई के पूर्व जनरल सेक्रेटरी कृष्ण कालरा का कहना है आर्थिक मंदी की मार ज्यदा भारत पर ना पड़े इसलिए  सरकार को मांग में बढ़ोत्तरी करने के साथ – साथ अपने घरेलू बाजार को ज्यादा मजबूत बनाना चाहिए !  महंगाई को कम करके औद्योगिक उत्पादन की दर को बढ़ाना होगा ! साथ ही यूरोपीय देशों को छोड़कर भारत को अब अपने पड़ोसी देशों और अन्य देशों के बाजारों की तरफ आयात की गाड़ी मोड़नी होगी ! अगर भारत ऐसा कर पाया तो निश्चित तौर पर इस मंदी का सही तरीके से न केवल हम मुकाबला कर पाएंगे बल्कि अपनी ग्रोथ रेट को भी तर्कसंगत स्तर पर भी रख पाएंगें !
वर्तमान सरकार को चलाने की डोर जाने माने अर्थशास्त्रियों के हाथ में है ऐसा कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं है ! एक तरफ जहा प्रधानमंत्री और मोंटेक सिंह अहलूवालिया दुनिया के जाने – माने अर्थशास्त्री है तो वही वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी भी 1986 में यूरोमनी द्वारा दुनिया के सर्वोत्तम वित्त मंत्री के रूप में सम्मान प्राप्त कर चुके है ! अतः भारत की जनता  इनसे आर्थिक सुधार के मुद्दों पर कुछ करिश्माई जरूरी कदम लेने की आस से देखती  थी ! भारत की अर्थव्यवस्था की ऐसी हालत की आहट कई दिनों पूर्व ही रेटिंग एजेंसियों ने दे दी थी ! गौरतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी स्टैडर्ड एंड पूअर्स ने राजकोषीय घाटे की बिगडती स्थिति तथा नीति-निर्णय के स्तर पर चलते राजनीतिक दिशाहीनता को देखते हुए भारत की रेटिंग को नकारात्मक कर दिया था ! इतना ही नहीं एक अन्य रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की ख़राब होती अर्थव्यवस्था के लिए श्री मनमोहन सिंह को ही जिम्मेदार ठहराया था ! इन एजेंसिया की विश्वव्यापी इतनी बड़ी साख है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इनकी रिपोर्टो के आधार पर ही विदेशी अन्य देशो में निवेश करते है !
हालाँकि 9 प्रतिशत की विकास दर के लिए इस वित्त वर्ष में सरकार ने ढांचागत क्षेत्र में 2 लाख करोड़ रूपये के निवेश का लक्ष्य रखा है ! गौरतलब है कि प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के प्रमुख डॉ. चक्रवर्ती रंगराजन पहले ही कह चुके हैं कि भारत को गरीबी से बाहर निकालना है तो उसे हर साल 9 पर्सेंट की ग्रोथ रेट हासिल करनी होगी ! ऐसा करने से बाज़ार में रौनक लौटेगी ! बाज़ार में नौकरियों के ज्यादा अवसर पैदा होंगे और गरीबी कम करने में मदद मिलेगी !  सरकार आम आदमी के साथ खडी दिखे जिसके दम पर वो सत्ता में आई थी ! परन्तु यह सब तभी संभव होगा जब पेट्रोलियम मंत्रालय और योजना आयोग अपनी जगहंसाई वाले ऐसे कृत्यों से बाज आये ! गौरतलब है अभी हाल में ही पेट्रोल की कीमतों में  एकाएक 7 .5 रूपये की वृद्धि कर दी गयी जिसके चलते पूरे देश में इस फैसले के विरोध में आम जनता सडको पर उतरी थी ! अन्यथा वो दिन दूर नहीं कि इस सरकार का वैसा ही ह्र्स्न होगा जो अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के चुनाव में हुआ था ! ध्यान देने योग्य है कि उत्तर प्रदेश के चुनाव में हुई हार की समीक्षा के लिए कांग्रेस द्वारा बनाई गयी कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार जिम्मेदार कारणों में से मंहगाई के साथ – साथ एक प्रमुख कारण नेताओ की बेजुबानी भी था ! कही ऐसा ना हो कि आगामी लोकसभा चुनाव में सरकार की फिजूलखर्ची भी एक मुद्दा बन जाये इसलिए सरकार को अभी से ऐसे कृत्यों पर रोक लगानी होगी !
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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. sensless ho halla ek taraf to hum chate hain india me worldclass facilities ho 35 lakh ka toilet kisi ne ghar me nahi banbaya.

  2. ha ha ha ha ha ha ha ha

  3. likhte raho, chillate raho unke kaan men joon nahin rengegi.

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