/अपना घर या नेताओं और अफसरों की एय्याशी का अड्डा? बड़े बड़े नाम शामिल!!

अपना घर या नेताओं और अफसरों की एय्याशी का अड्डा? बड़े बड़े नाम शामिल!!

शारीरिक प्रताडऩा व यौन शोषण का अड्डा बने ‘अपना घर’ पर लगे आरोपों की तह में जाने के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग ने एक कमेटी गठित की है। यह कमेटी आज रोहतक जाकर स्‍थानीय लोगों के अलावा जिला प्रशासन और पुलिस से भी बातचीत करेगी।

आयोग की सदस्‍य शमिना शफीक का कहना है कि शनिवार को पैनल लोगों से मिलेगा और जिला प्रशासन और पुलिस से रिपोर्ट मांगेगा।

दूसरी ओर, संस्‍था की संचालक जसवंती ने यह कह कर नेताओं और आला अधिकारियों को परेशानी में डाल दिया है कि कोर्ट में सुनवाई के दौरान वह कई बड़े नामों का खुलासा करेगी। जसवंती का दावा है कि ये सभी नेता और अफसर ‘अपना घर’ में अक्‍सर आते थे। यही नहीं, संस्थान में स्पेशल ब्यूटी पार्लर पाया गया। जिसमें जिले की कई महिला अधिकारी और वीआईपी फ्री में मसाज का मजा लेती थीं। यहां की लड़कियों से जबरन यह काम कराया जाता था।

वहीं, पुलिस ने शुक्रवार को ही ‘अपना घर’ को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) एमएस मान के निर्देश पर सील कर दिया है। इससे पहले हिसार से रोहतक पहुंचे एडीजीपी मान ने आईजी आफिस में अपना घर मामले की जांच से जुड़े रोहतक पुलिस के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने साफ कहा कि नवगठित विशेष दल हर रिकॉर्ड का अपने ढंग से जांच करेगा। इसलिए अपना घर को तत्काल प्रभाव से सील किया जाए।

केस की अगली सुनवाई 15 को

9 मई को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने केंद्र व राज्य सरकार की आर्थिक सहायता से चलने वाली ‘अपना घर’ संस्था पर छापा मारा था। छापे के दौरान लड़कियों व महिलाओं ने संस्था की संचालिका जसवंती व अन्य पर यौन शोषण, शारीरिक शोषण, मारपीट व बच्चों की खरीद फरोख्त का आरोप लगाया था। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जसवंती, उसके दामाद जयभगवान, बेटी सिम्मी, ममेरे भाई सतीश, ममेरी बहन शीला, भाई जसवंत व काउंसलर वीना को केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया था। इस समय सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में है। केस की अगली सुनवाई 15 जून को होगी।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.