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बालकुंज आश्रय गृह में बच्चियों के साथ सामूहिक बलात्कार..

By   /  June 9, 2012  /  9 Comments

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रोहतक में अपना घर यौन शोषण मामला अभी निपटा भी नहीं है कि हरियाणा में ही बेसहारा बच्चों और महिलाओं के एक और शेल्टर होम की हकीकत सामने आ गई है। यमुनानगर में बच्चों के बालकुंज आश्रय गृह में बच्चों के साथ यौन शोषण और यातनाएं देने का मामला सामने आया है। पुलिस ने फिलहाल एक नाबालिग के साथ बलात्कार के आरोप में पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

बालकुंज आश्रय गृह में रहने वाले बच्चों पर दबाव बनाया जाता था कि वो इस बाबत बाहर बात नहीं करें। जो ऐसा करता था उसकी पिटाई की जाती थी। ये मामला नहीं खुलता अगर यहां रहने वाली 13 और 14 साल की दो बच्चियां यहां से भाग नहीं जातीं। पिछले हफ्ते ही ये दोनों बच्चियां यहां से भाग गईं। जब यह खबर मीडिया में उछली तो यमुनानगर के डीसी ने घटना की जांच के आदेश दिए। जांच के दौरान फरार हुई 14 साल की एक लड़की को खोज लिया गया।

पुलिसवाले भी करते थे ‘अपना घर’ में बच्चों से रेप

इस लडकी ने इस टीम को आपबीती सुनाई तो सबके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। लड़की ने बताया कि उसके साथ पांच लोगों ने गैंगरेप किया। बेहद डरी हुई लड़की पिटाई के डर से भाग गई। लड़की के बयान के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए पांच लोगों के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया। इन में से एक की पहचान सोनू नाम से की गई है।

पुलिस के मुताबिक लड़की के बयान लिए गए हैं और पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सिटी मजिस्ट्रेट पूजा चावरिया के मुताबिक अभी जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक मामले के सामने आने के बाद कई बच्चों को यहां से बाहर भेज दिया गया है और मामला और नहीं फैले इसके लिए मीडिया पर भी पाबंदी लगा दी गई है। बाल कुंज में इस तरह के गलत काम होने के आरोप लगने के बाद यमुनानगर के डीसी ने आनन-फानन में संस्थान के सुपरिटेंडेंट सुखविंदर सिंह का तबादला कर दिया है। मगर यहां ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये प्रशासन की तरफ से महज लीपापोती का मामला है?

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

9 Comments

  1. Prin Silence says:

    agar samaj may apraadh ki sazaa ka daar nhi hoga to Apraadh to badhay ga hi
    jarurat hai ki ki sazaa hum samaj may hi aisaa dey ki aadalat ya kanoon ki jarurat hi na paday
    mere hisaab say to hanth paav bandh kar pehlay mar maar kar saari hadiyaa tor do aur fir petrol daal kar jala do jo besahara aur kamjor logo ki ijjat say kilwaad kar tay hai
    ek apradh say jaab apradh ko shay milti hai to ek dand say ankush bhi lag sakta hai jiski aaj Roti say jyada avsakta hai

  2. en sab ko nagha kar goli mar deni chahiye.

  3. in logo ko jine ka hak nahi jo anath aur masmo ki jindgi barbad kar rahe he.

  4. ~!~ जब देश का राजा ही कंस हो गया हो? जब नंगापन का नाच नाचने वाली विद्यावालन को उसके जवान होने की खुशी में हू लाला करके उसे राष्टीय पुरुस्कार से नवाज रही हो? तो जरा सोचिये उसके सिपहसलाकार क्या राम भक्त या राष्ट भक्त होगे?जरा सोचिये?

  5. suar apni ma beti ko dekhe.

  6. Neeta Smile says:

    rakshak hi bhaksh ban gaye hai ………….sahi saja ki jarurat inhe hai….

  7. Prin Silence says:

    क्या ऐसे आरोपियो को चोरहे पर खड़ा कार कर पेट्रोल डाल कर जिंदा जला नही देना चाहिए ताकि आगे किसी और की भी हिम्मत हो तो उससे भी अपना हसार क्या होगा सोच कार ही मान ख़याल निकल जाए.
    एक तरफ हम किसी ना किसी वजह से "फीमेल" से जुड़े हैं जो की चाहे हुमारी मा,बहाँ,बेटी….कई रूप मे है जिससे हम बेंतिहा प्यार करते है और दूसरी तरफ इश्स तरह की घिनोनी हरकत को अंजाम दे तय हैं.

  8. Sanjay Dahiya says:

    thok do salo ko bhan ke….

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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