Loading...
You are here:  Home  >  राजनीति  >  Current Article

संगठन की दुहाई देने वाली भाजपा में व्यक्ति हो गए हावी

By   /  June 10, 2012  /  6 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

यह बात सिद्धांतत: तो सही है कि लोकतंत्र में व्यक्तिवाद और परिवारवाद का कोई स्थान नहीं होना चाहिए और नीति व विचार को ही महत्व दिया जाना चाहिए, मगर सच्चाई ये है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश कहलाने वाले हमारे भारत में परिवारवाद और व्यक्तिवाद ही फलफूल रहे हैं। कांग्रेस की आधारशिला तो टिकी ही परिवारवाद पर है, जबकि भाजपा में आंतरिक लोकतंत्र होने के बावजूद व्यक्तिवाद का बोलबाला है।
ताजा उदाहरण ही लीजिए। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी पार्टी पर इतने हावी हो गए हैं कि उनकी नाराजगी से डर कर संघ पृष्ठभूमि के संजय जोशी का पहले भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी से इस्तीफा लेना पड़ा और उसके बाद जब मोदी के खिलाफ एवं जोशी के समर्थन में पोस्टरबाजी होने लगी तो जोशी को पार्टी ही छोड़ देनी पड़ी। जोशी को पार्टी से बाहर निकाले जाने को मोदी की बड़ी जीत माना जा रहा है। इसमें भी रेखांकित करने लायक बात ये है कि मोदी भी संघ पृष्ठभूमि के ही हैं, इसके बाद भी जोशी को शहीद किया गया है। साफ है कि अब संघ में भी धड़ेबाजी हो गई है। यूं संघ की विशेषता ये रही है कि वह कभी व्यक्ति को अहमियत नहीं देता, विशेष रूप से नीति के मामले में। इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण ये है कि जब संघ पृष्ठभूमि के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने जिन्ना की तारीफ में चंद शब्द कह दिए तो उन्हें पद से इस्तीफा देने को मजबूर कर दिया गया। मगर अब ऐसा लगता है कि संघ भी व्यावहारिक होने लगा है। वह समझ रहा है कि जोशी भले ही बड़े काम के नेता हैं, मगर उनकी तुलना में मोदी का जनाधार कई गुना अधिक है। जोशी के चक्कर में मोदी की नाराजगी मोल नहीं ली जा सकती। ताजा मोदी-जोशी प्रकरण में संघ व भाजपा की जबरदस्त किरकिरी हो रही है। दोनों संगठन समझ रहे हैं कि यह विवाद पार्टी हित में नहीं है, मगर उनकी नजर में आगामी लोकसभा चुनाव में जीत का लक्ष्य सबसे अहम है। हालांकि अभी तय नहीं है कि मोदी ही भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के दावेदार होंगे, मगर चाहे-अनचाहे वे दावेदार तो हो ही गए हैं। इसके अतिरिक्त एक राज्य गुजरात में उनका व्यक्तिगत बोलबाला है। भले ही ताजा प्रकरण में मोदी एक व्यक्ति के रूप में ताकतवर बन कर उभर आए हैं और यह संघ व भाजपा की नीतियों के अनुकूल नहीं है, मगर सत्ता में आने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन्हें अपनी नीति को तिलांजलि देनी पड़ रही है। इसकी आलोचना भी हो रही है। बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने तो साफ कहा है कि पार्टी से बड़ा कोई नहीं। संजय जोशी से जिस तरह से इस्तीफा लिया गया वह आंतरिक लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है, मगर उसके बाद भी यदि संघ व भाजपा को जोशी को हटाना उचित लग रहा है, तो इसका मतलब साफ है कि सत्ता में आने के लिए वह आंतरिक लोकतंत्र को छोडऩे संबंधी आलोचना सहने को तैयार है।
इतिहास में जरा पीछे जाएं तो अंदाजा लग जाएगा कि आज संघ पर हावी हो चुके मोदी संघ की ताकत से ही भाजपा के दिग्गजों से टक्कर ले चुके हैं। मोदी की वजह से जब पार्टी पर सांप्रदायिक होने का आरोप लग रहा था, तब भी भाजपा हाईकमान में इतनी ताकत नहीं थी कि उन्हें इस्तीफे के लिए कह सके। संघ के दम पर मोदी अपना हठ तब भी दिखा चुके हैं, जब गुजरात दंगों के बाद हुए विधानसभा चुनावों में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे वरिष्ठ नेताओं के कहने के बावजूद उन्होंने हरेन पंड्या को टिकट देने से इंकार कर दिया था।
भाजपा में व्यक्तिवाद का मोदी ही अकेला उदाहरण नहीं हैं। राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, झारखण्ड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे कई राज्य हैं, जहां के क्षत्रपों ने न सिर्फ पार्टी आलाकमान की आंख से आंख मिलाई, अपितु अपनी शर्तें भी मनवाईं। मजे की बात है कि उसके बाद भी पार्टी सर्वाधिक अनुशासित कहलाती है। और उसी में अनुशासनहीनता की सर्वाधिक घटनाएं होती हैं।
आपको याद होगा कि राजस्थान में पार्टी आलाकमान के फैसले के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफा देने से इंकार कर दिया था। बड़ी मुश्किल से उन्होंने पद छोड़ा, वह भी राष्ट्रीय महासचिव बनाने पर। उनके प्रभाव का आलम ये था कि तकरीबन एक साल तक नेता प्रतिपक्ष का पद खाली ही पड़ा रहा। आखिरकार पार्टी को झुकना पड़ा और फिर से उन्हें फिर से इस पद से नवाजा गया। ऐसे में भाजपा के इस मूलमंत्र कि ‘व्यक्ति नहीं, संगठन बड़ा होता है, की धज्जियां उड़ गईं। हाल ही पूर्व गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया की यात्रा के विवाद में भी वसुंधरा की ही जीत हुई। कटारिया को अपनी यात्रा रद्द करनी पड़ी। केवल इतना ही नहीं, विवाद की आड़ में वसुंधरा इस बात पर अड़ गई कि रोजाना की किचकिच खत्म करते हुए घोषित कर दिया जाए कि राजस्थान में आगामी चुनाव उनके ही नेतृत्व में लड़ा जाएगा। हालांकि पार्टी इसकी घोषणा तो नहीं कर पाया, मगर जानकारी ये ही है कि नीतिगत रूप से उनकी मांग मानी ली गई है। मतलब साफ है, मोदी की तरह वसुंधरा भी पार्टी पर हावी हैं। मोदी तो फिर भी संघ पृष्ठभूमि के हैं, मगर राजस्थान में तो संघ से विपरीत चल रही वसुंधरा के आगे पार्टी व संघ को झुकना पड़ रहा है।
इसी प्रकार कर्नाटक में पार्टी को खड़ा करने वाले निवर्तमान मुख्यमंत्री येदियुरप्पा का कद पार्टी से बड़ा हो गया। वो तो लोकायुक्त की रिपोर्ट का भारी दबाव था, वरना मुख्यमंत्री पद छोडऩे के पार्टी के आदेश को तो वे साफ नकार ही चुके थे। कुछ दिन शांत रहने के बाद वे अब भी फिर से मुख्यमंत्री बनाए जाने के लिए दबाव बना रहे हैं।
दिल्ली का उदाहरण लीजिए। मदन लाल खुराना की जगह मुख्यमंत्री बने साहिब सिंह वर्मा ने हवाला मामले से खुराना के बरी होने के बाद उनके लिए मुख्यमंत्री पद की कुर्सी को छोडऩे से साफ इंकार कर दिया था। जब उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में अपने लिए पद देने का प्रस्ताव दिया गया, तब जा कर माने। उत्तर प्रदेश में तो बगावत तक हुई। कल्याण सिंह से जब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा लिया गया तो वे पार्टी से अलग हो गए और नई पार्टी बना कर भाजपा को भारी नुकसान पहुंचाया। उनका आधार भी जातिवादी ही था। इसी प्रकार उत्तराखण्ड में भगत सिंह कोश्यारी और भुवन चंद्र खंडूरी को हाईकमान के कहने पर मुख्यमंत्री पद छोडऩा पड़ा, मगर जब वहां विधानसभा चुनाव हुए तो पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी के कहने के बावजूद उस रैली में खंडूरी और कोश्यारी नहीं पहुंचे। मध्यप्रदेश में उमा भारती का मामला भी छिपा हुआ नहीं है। वे राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में तत्कालीन अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी को खुद पर कार्रवाई की चुनौती देकर बैठक से बाहर निकल गई थीं। शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर उन्होंने अलग पार्टी ही गठित कर ली। एक लंबे अरसे बाद उन्हें पार्टी में शामिल कर थूक कर चाटने का मुहावरा चरितार्थ किया गया। इसी प्रकार झारखण्ड में शिबू सोरेन की पार्टी से गठबंधन इच्छा नहीं होने के बावजदू अर्जुन मुण्डा की जिद के आगे भाजपा झुकी। इसी प्रकार जम्मू-कश्मीर में वरिष्ठ नेता चमन लाल गुप्ता का विधान परिषद चुनाव में कथित रूप से क्रास वोटिंग करना और महाराष्ट्र के वरिष्ठ भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे का दूसरी पार्टी में जाने की अफवाहें फैलाना भी पार्टी के लिए गंभीर विषय रहे हैं।
कुल मिला कर आंतरिक लोकतंत्र की दुहाई देने वाली पार्टी में अब विभिन्न क्षत्रप व व्यक्ति उभर आए हैं, जो कि संघ व भाजपा पर हावी हो चुके हैं।
-तेजवानी गिरधर
7742067000
[email protected]

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

अजमेर निवासी लेखक तेजवानी गिरधर दैनिक भास्कर में सिटी चीफ सहित अनेक दैनिक समाचार पत्रों में संपादकीय प्रभारी व संपादक रहे हैं। राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश सचिव व जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान के अजमेर जिला अध्यक्ष रह चुके हैं। अजमेर के इतिहास पर उनका एक ग्रंथ प्रकाशित हो चुका है। वर्तमान में अपना स्थानीय न्यूज वेब पोर्टल संचालित करने के अतिरिक्त नियमित ब्लॉग लेखन भी कर रहे हैं।

6 Comments

  1. Aap Firozabad Uttar Pradesh says:

    pls comment

  2. देवाशीष शर्मा उर्फ देवेश पलिया says:

    मेरे प्यारे देशवासियो में एक बात सभी से पूछना चाहता हूँ कि जिला फिरोजाबाद में बजरंग दल के विभाग संयोजक पं वीनेश भाई पुत्र श्री बनारसी दास शर्मा हैं |
    १- जो कि हिंदुत्व के ठेकेदार बनते हैं और पैसे के लिए अपनी गौ माता को कटवाने में सहयोग करते है |
    २- दूसरा ये कोटला चुंगी चौराहे पर प्रत्येक दूकान दार और ठेले वालो और गरीब लोगो से चौथ वसूली का काम करते हैं |
    ३- ये थानों और सरकारी दफ्तरों में दलाली का काम भी करते हैं और गुंडा गर्दी के लिए मशहूर हैं |
    ४- इन्होने मेरी आँखों के सामने गाँव मिलिख निवासी सुनील ठाकुर से पांच हज़ार रूपये उसके मिटटी के खनन के मुकदमे को निपटाने के वास्ते लिए और उसका काम नहीं कराया और उसके पैसे खा गया फिर उसका काम टीम अन्ना फिरोजाबाद ने बिना पैसे के कराया लेकिन जब वो गरीब आदमी अपने पैसे मांगने गया तो उसको भद्दी भद्दी गालियाँ देकर जान से मारने कि धमकी दी और उससे कहा कि अगर वो कभी भी भविष्य में उनके आस पास नजर आया तो अंजाम बुरा होगा | मैं स्वयं इसका गवाह हूँ |
    ५- अब आज पं वीनेश भाई कि भाभी को भाजपा ने टिकट दिया और बदकिस्मती से हमारे वार्ड न १६ से जबकि वो वार्ड नो १६ में रहती भी नहीं ?
    ६- आज वो हमारे वार्ड में वोट मांगने आये तो मैंने साफ़ मना कर दिया तो मेरे पास तरह तरह कि धमकी आ रहीं है और मुझे जान से मारने कि धमकी दी अब मैं सभी मित्रों से पूछना चाहता हूँ क्या ऐसे प्रत्याशी को वोट देना चाहिए या नहीं ??????????
    ७- भाजपा जान बूझकर भ्रष्ट और गुंडे प्रवत्ति के लोगो को टिकट देती है | फिरोजाबाद में जो विधायक मनीष असीजा कि गुलामी करेगा उसको वरीयता मिलती है |
    ८- टीम अन्ना फिरोजाबाद ने भाजपा प्रत्याशी मनीष असीजा का जी जान से समर्थन करते हुए उन्हें विधायक बनबाया लेकिन जीतने के बाद केवल और केवल अपने चमचे और पार्टी के लोगो का स्वागत व् सम्मान हुआ लेकिन टीम अन्ना और उसके सारे वादे ये कमीना भूल गया और आज तक किसी भी सदस्य को जितने के बाद इसने धन्यवाद तक नहीं दिया और बल्कि अन्ना और रामदेव समर्थकों को बेइज्जत करने का काम ये नगर विधायक व् भाजपा कि पूरी टीम कर रही है |
    ९- अंत में सभी से में इस बारे में राय जानना चाहता हूँ और पूछना चाहता हूँ हम किस बेस पे मोदी और तमाम लोगो कि सिफारिश करते हैं ये सभी राजनातिक पार्टी चोर चोर मौसेरे भाई है जय हिंद जय भारत
    पं देवेश पलिया टीम अन्ना फिरोजाबाद उत्तर प्रदेश

  3. Aap Firozabad Uttar Pradesh says:

    मेरे प्यारे देशवासियो में एक बात सभी से पूछना चाहता हूँ कि जिला फिरोजाबाद में बजरंग दल के विभाग संयोजक पं वीनेश भाई पुत्र श्री बनारसी दास शर्मा हैं |.
    १- जो कि हिंदुत्व के ठेकेदार बनते हैं और पैसे के लिए अपनी गौ माता को कटवाने में सहयोग करते है |.
    २- दूसरा ये कोटला चुंगी चौराहे पर प्रत्येक दूकान दार और ठेले वालो और गरीब लोगो से चौथ वसूली का काम करते हैं |.
    ३- ये थानों और सरकारी दफ्तरों में दलाली का काम भी करते हैं और गुंडा गर्दी के लिए मशहूर हैं |.
    ४- इन्होने मेरी आँखों के सामने गाँव मिलिख निवासी सुनील ठाकुर से पांच हज़ार रूपये उसके मिटटी के खनन के मुकदमे को निपटाने के वास्ते लिए और उसका काम नहीं कराया और उसके पैसे खा गया फिर उसका काम टीम अन्ना फिरोजाबाद ने बिना पैसे के कराया लेकिन जब वो गरीब आदमी अपने पैसे मांगने गया तो उसको भद्दी भद्दी गालियाँ देकर जान से मारने कि धमकी दी और उससे कहा कि अगर वो कभी भी भविष्य में उनके आस पास नजर आया तो अंजाम बुरा होगा | मैं स्वयं इसका गवाह हूँ |.
    ५- अब आज पं वीनेश भाई कि भाभी को भाजपा ने टिकट दिया और बदकिस्मती से हमारे वार्ड न १६ से जबकि वो वार्ड नो १६ में रहती भी नहीं?
    ६- आज वो हमारे वार्ड में वोट मांगने आये तो मैंने साफ़ मना कर दिया तो मेरे पास तरह तरह कि धमकी आ रहीं है और मुझे जान से मारने कि धमकी दी अब मैं सभी मित्रों से पूछना चाहता हूँ क्या ऐसे प्रत्याशी को वोट देना चाहिए या नहीं?
    ७- भाजपा जान बूझकर भ्रष्ट और गुंडे प्रवत्ति के लोगो को टिकट देती है | फिरोजाबाद में जो विधायक मनीष असीजा कि गुलामी करेगा उसको वरीयता मिलती है |.
    ८- टीम अन्ना फिरोजाबाद ने भाजपा प्रत्याशी मनीष असीजा का जी जान से समर्थन करते हुए उन्हें विधायक बनबाया लेकिन जीतने के बाद केवल और केवल अपने चमचे और पार्टी के लोगो का स्वागत व् सम्मान हुआ लेकिन टीम अन्ना और उसके सारे वादे ये कमीना भूल गया और आज तक किसी भी सदस्य को जितने के बाद इसने धन्यवाद तक नहीं दिया और बल्कि अन्ना और रामदेव समर्थकों को बेइज्जत करने का काम ये नगर विधायक व् भाजपा कि पूरी टीम कर रही है |.
    ९- अंत में सभी से में इस बारे में राय जानना चाहता हूँ और पूछना चाहता हूँ हम किस बेस पे मोदी और तमाम लोगो कि सिफारिश करते हैं ये सभी राजनातिक पार्टी चोर चोर मौसेरे भाई है जय हिंद जय भारत.
    पं देवेश पलिया टीम अन्ना फिरोजाबाद उत्तर प्रदेश.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

पाकिस्‍तान ने नहीं किया लेकिन भाजपा ने कर दिखाया..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: