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लैला खान उर्फ रेशमा पटेल को आतंकियों ने अगवा किया या फिर आई एस आई की कोई चाल है ये

By   /  June 10, 2012  /  5 Comments

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चार साल पहले फिल्म ‘वफा’ में राजेश खन्ना के साथ बेड सीन देकर चर्चा में आई लैला खान उर्फ रेशमा पटेल आतंकियों से रिश्तों की खबरों के चलते ख़ुफ़िया एजेंसियों की आंख की किरकिरी बनी हुई थी. इसके बाद लैला खान अचानक गायब हो गयी तथा सभी ख़ुफ़िया संगठनों ने लैला को पकड़ने के लिए अपने जाल बिछा दिए.

महाराष्ट्र एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वायड) ने जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के एक दुकान से गए बुधवार को लैला की कार मित्सुबिशी आउटलैंडर बरामद की है।ऐसा माना जा रहा है कि दिल्ली हाइकोर्ट बम ब्लास्ट में लैला ने इसी कार का इस्तेमाल किया था।

अब खबर आ रही है की लैला खान उर्फ रेशमा पटेल लश्कर-ए-तैयबा के चंगुल में है और वह पाक अधिकृत कश्मीर में इस आतंकवादी संगठन से जुड़े लोगों के कब्जे में है।

सूत्रों  के मुताबिक, ‘लैला को लश्कर के किसी खुफिया ठिकाने में रखा गया है और उसे संगठन के सदस्यों के मनोरंजन का साधन बनाया गया है। अगर ऐसा है तो लैला के सामने आतंकवादियों की बात मानने को सिवा कोई रास्ता नहीं है। अगर वह ऐसा नहीं करती है तो उसे मौत का सामना करना पड़ेगा क्योंकि आतंकी गतिविधियों में उसकी संलिप्तता के सुबूत सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लग गए हैं।’

इससे पहले खबर आई थी कि लैला अपने परिवार के कई सदस्यों के साथ दुबई में है। लेकिन उसके पिता ने इस बात से इनकार किया है कि लैला दुबई में है। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक लैला लश्कर की नापाक साजिशों का अहम हिस्सा है। आरोप है कि लश्कर लैला का इस्तेमाल आतंकी संगठन के लिए फंड जुटाने में कर रहा है। लैला का कथित पति मुनीर खान बांग्लादेश के आतंकी संगठन हूजी का सदस्य है।
अब सवाल ये खड़ा हो गया है कि लैला खान उर्फ रेशमा पटेल खुद आतंकवाद का हिस्सा है या फिर आतंक वाद से पीड़ित. कहीं ऐसा तो नहीं कि ख़ुफ़िया एजेंसियों को भटकाने की कोई चाल हो यह?

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

5 Comments

  1. Krishna Choubey says:

    good

  2. kartikey says:

    Jab laila hi hai to kya comments karu rahi
    isi aur laskaretoyba ki bat to inaka bharasha hi kya yah kya karege aur kya kahege i

  3. Yogendar Sharma says:

    exelent

  4. hindi mem speeching only

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