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स्पाइडर-मैन बनना आसान नहीं था – एंड्रयू गारफील्ड

By   /  June 10, 2012  /  No Comments

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एंड्रयू गारफील्ड और एम्मा स्टोन  जो की आने वाली फिल्म द अमेजिंग स्पाइडर-मैन में मुख्य किरदार निभा रहे है, उन का कहना है कि इस फिल्म में नायक-नायका की भूमिका निभाने के लिए हामी भरना उन के लिए आसान नहीं था.

अभिनेता एंड्रयू गारफील्ड फिल्म द अमेजिंग स्पाइडर-मैन में स्पाइडर-मैन की भूमिका निभा रहे है. स्पाइडर-मैन के रूप में एंड्रयू गारफील्ड का कडा मुकाबला पुराने स्पाइडर-मैन की भूमिका निभाने वाले अभिनेता टोबी मैग्वायर से होगा क्यों कि अभी तक लोगो ने सिर्फ टोबी मैग्वायर को ही स्पाइडर-मैन के रूप में देखा है.

इस बारे में २४ वर्षीय अभिनेता एंड्रयू गारफील्ड का कहना है कि “मुझे ये डर सतारहा था कि जब लोग मुझे स्पाइडर-मैन के रूप में देखेंगे तो वो मेरी तुलना पुराने स्पाइडर-मैन की भूमिका निभाने वाले अभिनेता टोबीमैग्वायर से करेंगे जो कि अभी तक लोगों के बीच स्पाइडर-मैन की पहचान है और मुझे स्पाइडर-मैन के रूप में अपनी पहचान बनाने के लिए उन से बेहतर काम करना पड़ेगा.”

अपने डर को मानते हुए एंड्रयू ने कहा “बड़ी शक्ति के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है!.”

दूसरी तरफ एम्मा स्टोन का कहना है “जब मुझे फिल्म का प्रस्ताव आया तो मैं काफी घबरा गई थी कि इतना बड़ा किरदार कैसे निभा पाऊँगी. लेकिन आडीशन देने के बाद मुझे लगा कि इस फिल्म में काम करना एक मजेदार अनुभव होगा.”

क्या स्पाइडर-मैन का ये नया चेहरा लोगों के बीच अपनी पहचान बना पायेगा? क्या ये भी उतना ही लोगों के बीच उतना ही लोकप्रय होगा? इन सब बातों का खुलासा होगा 29 जून 2012 को जब सोनी पिक्चर की फिल्म द अमेजिंग स्पाइडर-मैन भारत में रिलीज होगी.

(प्रेस विज्ञप्ति)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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