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मनमोहनी कैबिनेट में पत्रकार: राजीव शुक्ला बने राज्यमंत्री

By   /  July 12, 2011  /  3 Comments

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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने ताजा कैबिनेट विस्तार में राज्यसभा सांसद और कांग्रेस महासचिव राजीव शुक्ला को संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री का ओहदा दिया है। देखा जाए तो यूपीए सरकार ने पहली बार किसी नई पीढ़ी के पत्रकार को मंत्रालय में जगह दी है। हालांकि राजीव शुक्ला एक अर्से से पत्रकारिता छोड़ कर राजनीति में सक्रिय हैं।

कभी एल टीवी (जी टीवी का करेंट अफेयर चैनल जो बाद में जी न्यूज़ बन गया) पर आमने सामने साक्षात्कार वाले कार्यक्रम ‘रूबरू’ से टीवी पत्रकारिता में कदम रखने वाले राजीव उन दिनों प्रिंट मीडिया में भी एक जाना पहचाना नाम थे।

राजीव शुक्ला पत्रकारिता से बनाए गए अपने संबंधों का बेजा इस्तेमाल करने के लिए खासे बदनाम रहे हैं और कई लोग उनहें पावर ब्रोकर यानि सत्ता का दलाल भी कहते हैं। कहा तो यहां तक जाता है कि कभी राजीव गांधी से उन्होंने आनंद बाजार ग्रुप पर रविवार का संपादक बनने (तब वे इसी पत्रिका में विशेष संवाददाता थे) की सिफारिश भी लगवाई थी।

तब रविवार के प्रकाशक सरकार बंधुओं ने दबाव सहने की बजाय इसे बंद करना बेहतर समझा था और उस ज़माने की इस बेहतरीन पत्रिका से देश के हिंदी के सजग पाठक महरूम हो गए। लेकिन इस बात से किसी को इंकार नहीं होगा कि उनका चैनल न्यूज़ 24 तथा बीएजी फिल्म्स अभी भी देश भर में सैकड़ों पत्रकारों के लिए पहचान का एक जरिया बना हुआ है। गौरतलब है कि देश भर में ‘स्ट्रिंगर राज’ मॉडल की शुरुआत बीएजी के सनसनी और टीवी  लाइव के आँखों-देखी ने ही की थी, जिसे बाद में लगभग सभी चैनलों ने अपना लिया था।

पत्रकार कोटे से सरकार में दाखिल होने का यह पहला मौका नहीं है। सबसे पहले यह अवसर पाने वाले इंडिया टुडे के वर्तमान संपादक एमजे अकबर थे जिन्हें 1991 में मानव संसाधन मंत्रालय में सलाहकार (राज्य मंत्री स्तर) का पद मिला था। यहां यह जोड़ना आवश्यक होगा कि अकबर ने दो बार लोकसभा की मुश्किल मानी जाने वाली किशनगंज सीट अपनी लोकप्रियता के दम पर जीती थी और अपनी प्रतिभा सिद्ध कर चुके थे। इसके बाद वाजपेयी कैबिनेट में अरुण शौरी भी पत्रकार कोटे से मंत्रालय में शामिल हो चुके हैं। हालांकि शौरी और अकबर के मुकाबले शुक्ला की शख्सियत कहीं नहीं ठहरती लेकिन इन सभी में कम से कम एक बात समान है कि तीनों ही अपने करीयर के प्रारंभिक काल में पत्रकारिता से जुड़े रहे थे।

कैबिनेट में कांग्रेस के वी किशोर चंद्र देव और तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी नए चेहरे हैं। ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने से खाली हुआ रेल मंत्रालय तृणमूल कांग्रेस के पास ही रह गया है। दिनेश त्रिवेदी नए रेल मंत्री होंगे। पिछले दिनों प्रधानमंत्री के निर्देशों की अवहेलना से चर्चा में आए तृणमूल कांग्रेस के राज्य मंत्री मुकुल रॉय को रेलवे के बजाय शिपिंग तक ही सीमित कर दिया गया है। फिलहाल वह दोनों मंत्रालयों में राज्य मंत्री थे और खबर है कि जब मनमोहन सिंह ने असम में हुई रेल दुर्घटना का जायजा लेने को कहा तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया।

किशोर चंद्र देव को आदिवासी मामले और पंचायती राज मंत्रालय दिया गया है। यूपी में अगले साल होने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए स्वतंत्र प्रभार वाले इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा को कैबिनेट में शामिल किया गया है। बेहतर ढंग से काम करने की वजह से स्वतंत्र प्रभार वाले पर्यावरण राज्य मंत्री जयराम रमेश को प्रमोट करके कैबिनेट में जगह दी गई है। जयराम रमेश को ग्रामीण विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। अब तक ग्रामीण मंत्रालय देख रहे विलास राव देशमुख को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में भेजा गया है। अब वीरप्पा मोइली कंपनी मामलों के कैबिनेट मंत्री होंगे, जबकि सलमान खुर्शीद कानून मंत्रालय संभालेंगे।

पवन कुमार बंसल को जल संसाधन की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। कांग्रेस की प्रवक्ता जयंती नटराजन और पवन सिंह घाटोवर को स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्य मंत्री बनाया गया है। जयंती नटराजन को पर्यावरण मंत्रालय दिया गया है। तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय, कांग्रेस के चरण दास महंत, जीतेंद्र सिंह, मिलिंद देवड़ा और राजीव शुक्ला को राज्य मंत्री बनाया गया है। मंत्रालय में इस बार टीम राहुल के कई सदस्य हैं और कहा जा रहा है कि यह इस बात की तैयारी है कि राहुल गांधी जब कैबिनेट में महत्वपूर्ण ओहदा
संभालें तब उनकी टीम अनुभवी मंत्रियों की हो।

कुल सात मंत्रियों की छुट्टी हुई है, जिनमें एम.एस. गिल, बीके हांडिक, कांति लाल भूरिया, ए. साई प्रताप और अरुण यादव शामिल हैं जबकि दयानिधि मारन और मुरली देवड़ा के इस्तीफे को राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेज दिया गया है।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. GH Qadir says:

    Rajiv Shukla ji ko congress ne mantri banakar ye sabit kiya hai ki chatukarita party me sarvo pari hai.vo mission 2012 U.P. me kaha thaherte hai.unhe arab pati BCCI ki upadhyakshi sambhalna chahiye.kam se kam mehnatkash neta Jagdambika pal ko to mauka milna hi chahiye tha.

  2. acharya vipash says:

    जिन पत्रकार -राजनेताओं के नाम आपने गिनाए हैं उनकी राजीव जी से कोई तुलना नहीं हो सकती!राजीव जी के नजदीक तो अमर सिंह ही ठहर सकते हैं

  3. kulwant mittal says:

    मनमोहिनी सरकार में कोई भी आये कोई भी जाये , कुछ नहीं होने वाला .
    पुराने मंत्री घोटाले कर के चले गए , नए आ कर घोटाले करेंगे , और हम कुछ नहीं कर पाएंगे ………….????????????
    क्या कुछ हो सकता है ….?????
    नहीं ना,…???
    यह सब तो 2014 तक झेलना ही पड़ेगा……….

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