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युपी पत्रकारिता के टॉप टेन दलालों की जल्द ही नकाब उतारूंगा

By   /  June 13, 2012  /  12 Comments

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-कुमार सौवीर

प्रभात त्रिपाठी ने फिर छेड़ा एक नया शिगूफा: लखनऊ: बड़े-बड़े पत्रकार नेताओं की कोशिशों के बावजूद हजरतगंज के सौंदर्यीकरण में 140 करोड़ रूपये की दलाली करने वाले पत्रकारों का चेहरा अभी तक सार्वजनिक नहीं हो पाया है, लेकिन खुद को दबंग बताने वाले एक पत्रकार ने आज आखिर इतना तो खुलासा कर ही दिया है कि यह दलाल पत्रकार एक नामी चैनल और दूसरा एक समाचार एजेंसी से सम्‍बद्ध है। यह दीगर बात है कि प्रभात ने कभी भी किसी अपने ऐलान पर कोई अमल नहीं किया है, लेकिन कम से कब आज तो ऐलान कर दिया है कि जुलाई के तीसरे हफ्ते में दिल्‍ली वे यूपी के बड़े दलालों की सूची जाहिर कर उन्‍हें देश के सामने बेनकाब करेंगे।

हालांकि प्रभात ने इस बात की कोई कैफियत नहीं दी है कि खुलासे के लिए उन्‍होंने किस भविष्‍यवक्‍ता से जुलाई के तीसरे हफ्ते की साइत क्‍यों निकाली है। कुछ भी हो, लेकिन इस पत्र के बाद से मुख्‍यमंत्री भवन एनेक्‍सी में पत्रकारों के बीच भयानक जंग शुरू हो सकती है। प्रभात के पत्र में आरोप लगाया गया है कि लखनऊ के कई पत्रकारों के पास बेहिसाब और अकूत सम्‍पत्ति है। आरोप के अनुसार यह सम्‍पत्ति पूरी तरह नाजायज है और जाहिर है कि यह दलाली या कुकर्मों से ही कमाई गयी है। हालांकि प्रभात ने अपने पत्र में किसी का नाम नहीं लिया है लेकिन इनका इशारा सच्चिदानंद गुप्‍ता उर्फ सच्‍चे पर है। इसी मसले पर मीडिया सेंटर में इन दोनों के बीच जमकर हंगामा हो गया था।

बहरहाल, प्रभात का आरोप है कि कई पत्रकारों की बीवी, बच्‍चे ही नहीं, बल्कि उनके रिश्‍तेदार भी मर्सिडीज जैसी बेशकीमती कारों से चलते हैं। उनका आरोप है कि उनको जान से मारने की कोशिश भी की जा सकती है। गौरतलब है कि प्रभात ने अब तक जितने भी पत्रकारों पर आरोप लगाये हैं, उनके नाम और उनकी करतूत का ब्‍योरा देने का दावा हर बार किया है, लेकिन हैरत बात की है कि प्रभात ने अपने किसी भी आरोप का खुलासा कभी भी नहीं किया है। सूत्रों के अनुसार ऐसे में प्रभात का यह पत्र केवल थोथे प्रचार यानी प्रोपेगंडा ही साबित हो सकता है। कुछ भी हो, लेकिन इतना तो सत्‍य है कि प्रभात त्रिपाठी ने जिन दो पत्रकारों के नामों का खुलासा इशारे-इशारे में कर दिया है, इससे हजरतगंज के सौंदर्यीकरण में 140 करोड़ की गयी ऐतिहासिक दलाली की करतूत का खुलासा अब जल्‍दी ही हो सकता है। जरा आप भी जायजा ले लीजिए प्रभात के इस पत्र का, जिसे नीचे हूबहू दिया जा रहा है….

यूपी में कुछ तथाकथित दागी पत्रकार धड़ल्ले से कर रहे हैं भ्रष्टाचार, कहीं पीआईएल के नाम पर ब्यूरोक्रेसी से वसूली तो कहीं सत्ता के दलाल बनकर कर रहे हैं भ्रष्टाचार, सीबीआई जांच होनी चाहिए इनकी

मेरे प्रिय यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, सीबीआई के निदेशक, न्यायपालिका व लोकपालिका से जुड़े लोगों व पत्रकार साथियों के बीच एक जरूरी खबर ब्रेक कर रहा हूं, इसलिए कि ऐसा करना अब काफी जरूरी हो गया है। यूपी में पिछले दो दशकों से पत्रकारिता में रोज नए कलंक लग रहे हैं। हमारे बीच में कुछ तथाकथित पत्रकार पिछले दो दशकों से राजधानी लखनऊ में पत्रकारिता के क्षेत्र को लगातार कलंकित करने का काम कर रहे हैं जो पूरे पत्रकारिता बिरादरी के नाम पर कलंक हैं। मैं यह खबर इसलिए ब्रेक कर रहा हूं क्योकि मैं पिछले 17 वर्षों से लगातार पीत पत्रकारिता करने वालों को सावधान करता चला आया हूं। पत्रकार हितों के कई मुद्दों को कई वर्षों से पत्रकारिता के फोरम से लेकर प्रेस परिषद के अध्यक्ष काटजू जी को ज्ञापन देने व सरकार तथा सूचना निदेशक से इस पूरे प्रकरण की जांच की मांग करता आया हूं। लेकिन मेरे द्वारा अब तक किए गये सभी प्रयासों को इन मठाधीस पत्रकारों ने विफल कर दिया है। लेकिन मेरा लगातार प्रयास जारी है। मैं जुलाई के तीसरे सप्ताह में किसी भी समय दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस करके उन टाप 10 पत्रकारों के चेहरे पूरे देश के सामने लाने का प्रयास करूंगा जिन्होंने यूपी की पत्रकारिता को कलंकित किया है।

राजधानी लखनऊ सहित देश के कुछ हिस्सों में इन टाप 10 पत्रकारों के पास इतनी अकूत संपत्ति है जिनकी अगर सही मायनों में सीबीआई जांच हो जाए तो इन लोगों को अब से कई वर्षों पूर्व ही जेल की सीखचों में होना चाहिए था लेकिन कहावत है कि जब पाप का घड़ा भर जाता है तो उसका फूटना तय है। इन तथाकथित पत्रकारों के पाप का घड़ा अब लगता है कि भर चुका है। अब सिर्फ फूटना बाकी है। हद तो तब हो जाती है जब सही बात करने वाला अपने पत्रकारों के फोरम पर अगर बात करता है तो कुछ लोग चिढ़ कर उसे ऐसा रूप देने का काम करते हैं जिससे उसकी बात दब जाए। अगर सही बात करो तो यह तथाकथित पत्रकार पूरी टोली बनाकर उस बात करने वाले की बात को दबाने के लिए गाली गलौज तथा मारपीट पर उतारू हो जाते हैं।

मेरा तो सीधा मानना है कि जाको राखे साइयां मार सके न कोई। जब तक जिस व्यक्ति के साथ ईश्वर है और उसकी ईमानदारी तथा मिशन को बेनकाब करने की क्षमता व शक्ति है, कोई राक्षसी ताकत उसका अंत नहीं कर सकती। रावण का वध जिस तरह से राम ने किया था उसी तरह इन पापी व भ्रष्टाचारी राक्षस पत्रकारों का अंत एक न एक दिन कोई राम रूपी पत्रकार या फिर समाज का एक संघर्षशील व्यक्ति आकर जरूर करेगा। एक टांग टूटी है तो दूसरी टांग अवश्य टूटेगी। ऐसा मेरा मानना है। एसे लोगों की उल्टी गिनती अब शुरू हो चुकी है। किसी भी व्यक्ति का अहंकार उसका अंत कर देता है।

यूपी में जिस तरह से पीत पत्रकारिता करने वाले गिने चुने मठाधीस मौजूद हैं, उनका अब अंत निकट है। मैं सीबीआई निदेशक से इस खबर के माध्यम से अपील करना चाहूंगा कि वह यूपी के कुछ पत्रकारों के एसेट के बारे में जांच अवश्य करा लें कि इतनी अकूत संपति आखिर कहां से आई। मेरा यह भी कहना है कि इसके साथ ही मेरी भी जांच करा ले कि जो आवाज उठा रहा है उसका जीवन कितना पाक-साफ है कि नहीं। मेरी पारदर्शिता का नमूना जांच से सामने आ जाएगा। यूपी में एनआरएचएम घोटाला व कई अन्य घोटाले रोज पकड़े जा रहे हैं लेकिन पत्रकारों के घोटालों पर किसी की नजर नहीं जा पा रही है।

इन घोटालों में कई पत्रकार लिप्त हैं जो अब तक बचते आए हैं। जिस तरह से प्रदेश में नेता मंत्री, ब्यूरौक्रेट सलाखों के पीछे जा रहे हैं अगर सही तरह से सीबीआई जांच कर ली जाए तो कई ऐसे नामी गिरामी पत्रकार भी जेल के सलाखों में आ जाएंगे जो अब तक किसी भी तरह से बचे हुए हैं। मायावती सरकार में हजरतगंज सौंदर्यीकरण के नाम पर दलाली लेने वाले दो पत्रकार जो नामी चैनल व एजेंसी में हैं, वे अब तक बचे हुए हैं।

यूपी में पत्रकारिता की आड़ में भ्रष्टाचार करने का अब एक नया स्वरूप सामने आ रहा है। कुछ बिना पढ़े लिखे तथाकथित पत्रकार जनहित याचिका दाखिल करके करोड़ो रूपये की वसूली ब्यूरौक्रेट व सरकार के बड़े अफसरों से करने में जुट गए हैं। पिछले एक दशक से कुछ जनहित याचिकाकर्ता जिसमें कुछ लोगों ने करोड़ों कमा लिया है। इनमें से कुछ को कानून की जानकारी है क्योंकि वे उनमें कुछ योग्यता है और कुछ ऐसे हैं जिन्हें कानून की जानकारी नहीं है, पर अच्छा वकील हायर करके याचिकाएं दायर करा रहे हैं। ये लोग जनहित याचिकाकर्ता एक्सपर्ट बनने का दावा पत्रकारिता बिरादरी में हर रोज करते हैं।

इन लोगों की अगर सीबीआई या खुद जिस अदालत में जनहित याचिका दायर करते हैं, उसके माननीय जज महोदय जांच कर लें तो ये लोग सलाखों के सीखचों में अंदर होंगे, यह मेरा दावा है। इनके पास याचिकाकर्ता होने का प्रमाण जरूर दिखाई देगा लेकिन अंदर की तस्वीर काफी भयावह होगी क्योंकि इनके पास शहर में आलीशान कोठी व बड़ी मर्सडीज गाड़िया इनके व इनके रिश्तेदारों बच्चों व बीबियों के पास मौजूद है जो सीबीआई को जरूर मिल जाएगी। इस संबंध में मेरे पास पुख्ता प्रमाण हैं। हम भ्रष्टाचार को मिटाने की बात तो करते हैं लेकिन मीडिया के बड़े पत्रकार बनकर खुद भ्रष्टाचार करते हैं, यह कहां का न्याय है। इस पर शीघ्र कुछ कठोर कदम जरूर उठाना चाहिए।

शहर में एक अखबार लगातार पहले पन्ने पर रोज भ्रष्टाचार को लेकर पहले बड़े अधिकारियों की फोटो छापता है बाद में बड़ी रकम ले देकर ईमानदारी का चोला पहन लेता है। पत्रकारिता में ऐसे काले भेड़िए बहुत बनते जा रहे हैं। सरकारी मकान पर कब्जा बनाकर सरकार को गाली देना एनेक्सी मे बैठ कर सीना जोरी करके सरकार को पलटने की योजना बनाना इन तथाकथित कुछ एक दर्जन पत्रकारों का धंधा अब जोरों पर चल रहा है। मुख्यमंत्री अखिलेश व नेता जी के यहां एक व्यक्ति से सेटिंग करके अपने आपको बचाए रखने का धंधा इन लोगों का जोर-शोर से चल रहा है।

मुख्यमंत्री व नेता जी के सामने पत्रकारों के वहीं घिसे-पिटे चेहरे हर सप्ताह मिलने जाएंगे जो प्रदेश की सरकार को गिराने व बनाने का दावा करते हैं। जो वास्तव में पत्रकार हैं जिन्हें कुछ लिखना होता है ऐसे पत्रकारों को मुख्यमंत्री व नेता जी से नहीं मिलने दिया जाता है। उन्ही के गोल के पत्रकार लगातर मुख्यमंत्री आवास व बीडी मार्ग तथा सपा पार्टी कार्यालय में अपना कब्जा बनाए हुए हैं। ऐसे लोगों के हाथ बड़े लंबे होते हैं जो सरकार के लिए संकटमोचक कम बल्कि आफत पैदा करने वाले ज्यादा माने जा सकते हैं। ऐसे लोगों को चिन्हित करके उनके पर स्वयं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व नेता जी को काटने होंगे क्योंकि ये लोग बदनामी तथा परेशानी का सबब बन जाएंगे।

यूपी में करीब तीन सौ ऐसे पत्रकार है जो इन कुछ मुठ्ठी भर पत्रकारों के काले कारनामों के कारण अपने आपको अपमानित महसूस करते रहते हैं। लेकिन बोल नहीं पा रहे हैं। मेरा मानना है और अपने उन सभी लोगों से अपील है कि समाज के इन भेड़िये पत्रकारों का अंत अब किया जाना चाहिए। इनके चेहरे अब हर हाल में समाज के सामने आने चाहिए जिससे यूपी की जनता व सरकार को पता चल सके कि उनकी नाक के नीचे एनेक्सी में रोज शाम को क्या-क्या खेल खेला जाता है।

इंतजार कीजिए जुलाई के तीसरे सप्ताह तक का। मैं इस पत्र व खबर को सीबीआई व प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा सुप्रीम कोर्ट के चीफ चस्टिस कपाड़िया जी के संज्ञान में भी लाना चाहता हूं कि वह इस पर निष्पक्ष जांच कर लें और उन टाप 10 पत्रकारों की, जो मैं सूची दे रहा हूं उनकी जांच करके गिरते हुए पत्रकारिता के स्तर को सुधारने में अहम भूमिका अदा कर सकें, जिससे दूध का दूध पानी का पानी अपने आप हो जाए और समाज से इन भेड़िए तथा कथित पत्रकारों का अंत हो सके। जो समाज के लिए लगातर कलंक बनते जा रहे हैं।

अंत मे मैं यह भी कहना चाहता हूं कि इस गंभीर मुद्दे को मैं पिछले 15 वर्षों से समाज के हर उस मंच पर उठाता चला आ रहा हूं जहां उठाना चाहिए। मेरे इस काम से मेरी जान को भी खतरा बन चुका है। मेरा जीवन किसी भी समय पत्रकारिता जगत के भूखे भेड़िए खत्म करा सकते हैं, यह भी सच है। लेकिन मैं सच से भागने वाला व्यक्ति नहीं हूं। मेरे पास इनके चेहरे बेनकाब करने के कई सबूत मौजूद हैं। ऐसी स्थित में अगर मेरा जीवन खत्म कर दिया जाता है तो जिम्मेदार यही लोग होंगे। क्योकि समाज में ईमानदारी की बात करना अब अभिशाप माना जाता है। इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह तय करना उनका काम होगा, जिनसे मैं अपनी बड़ी मांग रख रहा हूं। मेरी इस अपील को अगर कोई समर्थन देना चाहे तो उसका स्वागत है। धन्यवाद सरकारी एजेंसी व पत्रकार साथियों।

निवेदनकर्ता

प्रभात कुमार त्रिपाठी

यूपी मान्यता प्राप्त पत्रकार

ब्यूरो प्रमुख दैनिक समाजवाद का उदय

मोबाइल- 09450410050
प्रतिलिपि सूचनार्थ।

1, मुख्य न्यायाधीश

श्री कपाड़िया जी

सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली।

2, मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव जी

मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश,लखनऊ।

3, मुख्य न्यायाधीस

यूपी हाईकोर्ट इलाहाबाद

4,, सूचना सचिव व सूचना निदेशक

अमृत अभिजात जी,एनेक्सी लखनऊ।

(भडास)

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  • Published: 5 years ago on June 13, 2012
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  • Last Modified: June 13, 2012 @ 10:19 am
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

12 Comments

  1. hm sath-sath hain tenson. no t.

  2. khushi hui jaankar ke kuch hoga ab , we all r with u any time any where , keep it up.

  3. Kumar Sauvir says:

    शुक्रिया

  4. Kumar Sauvir says:

    वक्‍त अब आने ही वाला है। तूफान की रफ्तार है कि कुछ न कुछ होकर ही रहेगा

  5. Kumar Sauvir says:

    शुक्रिया

  6. Kumar Sauvir says:

    हकीकत तो वही है जो आप समझ रहे हैं।
    कुमार सौवीर, लखनऊ

  7. Ati uttam ham aise bevak rai ke kadradaan hain…

  8. chor patrkar jo hafta lete hi , unko nanga karo to baat hai…

  9. laldhari_yadav says:

    पत्रकार जब ऐसा करेंगे तो इस देस का क्या होअगा किव किए अप सब का भरोअसा हय अप सब धोखा नए करय किव किय अपसब सेय भरोसा उठ जायगा इअस लिये अपसब पैसे पर ना बिअकय देअस के बार्य मय सोचय
    अप का भला होअगा अप का भीय

  10. Shiva Jain Ap jyasea patr kar hiagiatoa achhahoga buat agar ap sab khuad choaroky kam joabhia krata hia deas ka gadar hia.

  11. bhai sahab aapne to sabo ki aukat ki pole hi khol di hai.

  12. PATRAKAR KAON SE IMANDAR HAIN.KYA YE DALAL NAHI HO SAKTYE.JO PATRAKAR KHUD CHOR HAI.WO DUSSRYE KO KAISE CHOR KAH SAKTA HAI.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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