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पंचमहल पुलिस की क्रूरता – दलित युवक की बुरी तरह पिटाई

By   /  June 13, 2012  /  1 Comment

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पुलिस चाहे कहीं की भी हो चरित्र एक सा है. अब गुजरात पुलिस का ‘क्रूर’ चेहरा सामने आया है। राज्य के पंचमहल जिले के कौटंभा ताल्लुका के वेद गांव में में एक दलित युवक को पुलिस ने जमकर पीटा और फिर उसके कपड़े उतारकर उसकी परेड करवाई। जब गांव के दलितों ने इसका विरोध किया तो पुलिस वालों ने उन्हें भी लाठियों से पीटा। लेकिन पुलिस वालों को इतना करने के बाद भी चैन नहीं मिला और वे दलित युवक को कौटंभा थाने ले गए और उसके खिलाफ सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज किया।

पुलिस पर आरोप है कि पीड़ित युवक को रात भर कपड़े नहीं पहनने दिए गए। चश्मदीदों के मुताबिक पीड़ित युवक रमन वंकर (38) को पुलिस वाले रविवार को दिन में 1 बजे गांव में लेकर आए और उसके कपड़े उतारकर उसके शरीर पर सिर्फ उसका अंडर वेयर ही छोड़ा। वेद गांव के ही कांति वंकर ने कहा कि सोमवार की सुबह पुलिस वालों ने उसे रमन को कपड़े देने की इजाजत दी।
वेद गांव के दलितों ने रिटायर पुलिस इंस्पेक्टर जीपी जोशी, हेड कॉन्स्टेबल धर्मेंद्र सिंह सोमसिंह पर रमन के कपड़े उतारने और उसे पीटने का आरोप लगाया है।
हालांकि, पंचमहाल जिले की पुलिस ने कपड़े उतरावकर पिटाई करने के आरोप से इनकार किया है।

दलितों और पुलिस वालों के बीच विवाद की शुरुआत रविवार की सुबह हुई। इस गांव से होकर रोज अपने फॉर्महाउस जाने वाले रिटायर पुलिस इंस्पेक्टर जोशी ने नाली का पानी सड़कों पर आने की वजह से दलितों को गालियां देने शुरू कर दीं। जब अरविंद वंकर नाम के युवक ने इसका विरोध किया तो जोशी ने पुलिस वालों को बुलाकर लोहे के रॉड से उसकी जमकर पिटाई कर दी। स्थानीय एनजीओ नवसर्जन चलाने वाले मनु रोहित ने बताया, इस विवाद से दलितों में रोष फैल गया और वे इकट्ठा हो गए। लेकिन पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस वालों ने तीन दलितों-रमन, नरेंद्र और रामा वंकर को गिरफ्तार किया। जब गांव वालों ने गिरफ्तारी का विरोध किया तो पुलिस ने फिर लाठीचार्ज किया।

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  • Published: 5 years ago on June 13, 2012
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  • Last Modified: June 13, 2012 @ 10:50 am
  • Filed Under: अपराध

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. very bad yes police vale sabka naam or desh kharab karte hai inko puniment to dena hi chahiye.

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